वर्षा आधारित फसल को नुकसान पर 16 हजार रुपए हेक्टेयर सहायता

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वर्षा आधारित फसल को नुकसान पर 16 हजार रुपए हेक्टेयर सहायता

भोपाल। प्रदेश में ओलावृष्टि से सिंचित फसल को 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान होने पर अब 30 हजार रुपए हेक्टेयर आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं वर्षा आधारित फसल होने पर 16 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अरुण पांडे ने गुरुवार को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधन के आदेश जारी कर दिए हैं।

दो हेक्टेयर तक के लघु एवं सीमांत किसान या खातेदार को 25 से 33 फीसदी नुकसान होने पर वर्षा आधारित फसल के लिए पांच हजार रुपए, 33 से 50 प्रतिशत तक क्षति पर आठ हजार और 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर 16 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इसी तरह सिंचित फसल पर नौ, 15 और 30 हजार रुपए की सहायता की जाएगी। बारामासी फसल की बोवनी और रोपाई से छह माह से कम में फसल क्षतिग्रस्त या प्रभावित होने पर नौ, 18 और 30 हजार रुपए दिए जाएंगे।

फसल के छह माह से अधिक के बाद नुकसान होने पर 15, 20 और 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता मिलेगी। सब्जी, मसाले और ईसबगोल की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 18, 26 और 30 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है। एरी, शहतूत और टसर की फसल में नुकसान पर 6 और 12 हजार रुपए जबकि मूंगा के लिए 7.5 और 15 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।

दो हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर खेती करने वाले किसानों को 25 से 33 फीसदी नुकसान होने पर वर्षा आधारित फसल के लिए 4 हजार 500, 33 से 50 प्रतिशत तक क्षति पर 6 हजार 800 और 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने पर 13 हजार 600 रुपए प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता सरकार देगी।

सिंचित फसल के लिए यह प्रावधान 6 हजार 500, 13 हजार 500 और 27 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। बारामासी फसल में बोवनी या रोपाई से छह माह से कम में फसल के प्रभावित होने पर 6 हजार 500, 18 हजार और 30 हजार रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। छह माह से ज्यादा समय बीतने के बाद फसल खराब होने पर 12, 18 और 30 हजार रुपए की सहायता मिलेगी। सब्जी, मसाले व ईसबगोल की खेती के लिए 14, 18 और 30 हजार की मदद प्रति हेक्टेयर सरकार करेगी।

 

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NEWS IN ENGLISH

16 thousand hectare assistance on loss of rain-related crop

Bhopal. After the loss of more than 50 per cent of the crop irrigated by the hailstorm in the state, now 30 thousand hectare will be provided financial assistance. On the other hand, assistance of 16 thousand rupees will be given on rain-bearing crop. Following Chief Minister Shivraj Singh Chauhan’s announcement, Principal Secretary of the Department of Revenue Arun Pandey has issued an order for amendment to Revenue Book Circular 6-4 on Thursday.

For small and marginal farmers or account holders up to two hectares, losses of 25 to 33 per cent will be increased to Rs 5000 for rain-related crops, loss of losses from 33 to 50 per cent to eight thousand and more than 50 per cent damage to the tune of 16 thousand rupees per hectare will be given.

Similarly, assistance of Rs 9, 15 and 30 thousand rupees will be given on irrigated crop. Nine, 18 and 30 thousand rupees will be given if the crop is damaged or affected in less than six months from Bawani and transplantation of Baramasi crop.

After more than six months of crop loss, 15, 20 and 30 thousand rupees per hectare financial assistance will be provided. For cultivation of vegetable, spices and isabgol, a provision of 18, 26 and 30 thousand rupees per hectare has been made. In case of erosion, mulberry and tussar crops, Rs. 6 and 12 thousand rupees will be provided, whereas for coral, 7.5 and 15 thousand rupees per hectare will be provided.

If the farmers who cultivate more than two hectares have been affected by 25 to 33 per cent loss, 4 thousand 500 for rain-based crop, losses of between 33 to 50 per cent, 6 thousand 800 and more than 50 per cent losses of Rs. 13 thousand 600 The government will provide financial support to the hectare.

For the irrigated crop this provision will be 6 thousand 500, 13 thousand 500 and 27 thousand rupees per hectare. In the Baramasi crop, after six months of bovine or transplantation, the crop will be affected by the crop, 6 thousand 500, 18 thousand and 30 thousand rupees will be given financial help. After more than six months, after the bad crop, 12, 18 and 30 thousand rupees will be provided. 14, 18 and 30 thousand help per hectare government for cultivation of vegetable, spices and isabgol.

 

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