नीलामी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल, जनपद सदस्य ने ली पत्नी के नाम से दुकान, जनपद सदस्यो ने की शिकायत

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नीलामी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल, जनपद सदस्य ने ली पत्नी के नाम से दुकान, जनपद सदस्यो ने की शिकायत


आमला, (नितिन खातरकर)। दो वर्ष जनपद पंचायत आमला ने ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत लोगो को रोजगार मुहैया कराने के लिए 23 दुकानों का निर्माण करवाया था। यह पूरी दुकान ग्रामीणों को दी जाने वाली थी लेकिन वर्तमान में इन दुकानों पर नगर के रसूखदार लोगो का कब्जा है। निविदा में बड़ी चतुराई से शासकीय मूल्य के आसपास दुकानों का आवंटन करा लिया गया और 10 लाख से 13 लाख तक के दाम पर नगर के रसूखदार लोगो को दुकाने बेच दी गई। इतना ही नही नीलामी में अपनाई गई प्रक्रिया और नियम को भी दरकिनार कर दिया गया।अब स्तिथि यह है कि दुकान जिन लोगो के नाम पर आवंटित हुई वो तो नदारद है और लाखों की कीमत देकर रसूखदार लोग दुकान का धडल्ले से संचालन कर रहे है।

जनपद सदस्यो ने की शिकायत

जनपद पंचायत में बनी दुकानों में हुए बड़े स्तर के भ्रष्टाचार की भनक जब जनपद सदस्यों को लगी तो क्षेत्रीय विधायक के नेतृत्व में कलेक्टर से शिकायत की गई। जिसकी जांच के आदेश जनपद पंचायत सीईओ आमला को दिए गए। आदेश मिलने के बाद सीईओ ने जब जाँच शुरू की तो नीलामी से लेकर लाखो के दाम में बेचने के बड़े भ्रष्टाचार की पूरी कहानी जाँच में सामने आ गई। जाँच दल ने जब एक के बाद एक दुकानों का भौतिक सत्यापन किया तो पता चला कोई भी दुकान पर वास्तविक खरीददार दुकान का संचालन नही कर रहा है। दुकानों का संचालन तो रसूखदार लोग ही कर रहे है।


इनका कहना है।

आमला के इतिहास में जनपद की 23 दुकान का मामला सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है।

डॉ. योगेश पंडाग्रे, आमला विधायक


दुकान मामलों में अनिमितताये पायी है जांच कर उच्चाधिकारियों अवगत करा कर उनके मार्गदर्शन पर कार्रवाई करेंगे।

संस्कार बावरिया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंचायत, आमला


 

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