हाईवे किनारे फल-सब्जी, रेडीमेड की दुकानें लगाकर 500 रूपए रोज तक कमा रहे ग्रामीण

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हाईवे किनारे फल-सब्जी, रेडीमेड की दुकानें लगाकर 500 रूपए रोज तक कमा रहे ग्रामीण

सरकारी जमीन तलाश कर विकेन्द्रीकृत हाट-बाजार विकसित करने के प्रयास होंगे-कलेक्टर श्री राकेश सिंह


बैतूल। बैतूल से परतवाड़ा हाईवे पर जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर छोटी-सी बसाहट ग्राम भडूस। गांव के अंदर स्थानीय उपयोग की सामग्री के विक्रय हेतु लगने वाला छोटा-सा हाट-बाजार। लॉक-डाउन यहां छोटी-छोटी सब्जी-फल, रेडीमेड इत्यादि की दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर आजीविका का संकट पैदा कर गया।

व्यावसायिक गतिविधियां प्रारंभ होते ही इन छोटे सब्जी उत्पादकों/व्यापारियों ने आजीविका प्रारंभ करने गांव के बाहर यहां से गुजरने वाले हाईवे के किनारे नायलोन की बोरियों से बनाई बिछायत बिछाकर सब्जी-फल, चने-फुटाने, रेडीमेड कपड़े इत्यादि का विक्रय शुरू किया। नतीजे अच्छे आए। हाईवे से गुजरने वाले वाहनों के यात्री एवं आसपास के ग्रामीण यहां बिक रही ताजी सब्जियों एवं फलों के प्रति आकर्षित हुए एवं इन छोटे व्यापारियों का धंधा चल निकला। चने-फुटाने एवं रेडीमेड की दुकान करने वालों की आजीविका भी यहां चलने लगी। नजदीकी जिला मुख्यालय बैतूल के लोग भी आकर्षित हुए और गाहे-बगाहे यहां सब्जी-फल इत्यादि खरीदने जाने लगे। मौजूदा स्थिति में यहां व्यापार कर रहे छोटे व्यापारी/सब्जी एवं फल उत्पादक प्रतिदिन दो सौ से पांच सौ रूपए तक की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। वे पहले अन्य स्थानों पर हाट-बाजार करने जाते थे, जहां उन्हें आने-जाने का खर्च भी वहन करना पड़ता था। अब वे स्थानीय स्तर पर अपनी सामग्री बेचकर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं एवं स्वयं को आत्मनिर्भर महसूस कर रहे हैं।

हाईवे के किनारे रेडीमेड की दुकान लगाने वाले श्री भरतलाल पंवार बताते हैं कि पहले वे सारनी के हाटबाजार में रेडीमेड की दुकान लगाते थे, अब वे गांव में अपना व्यवसाय कर रहे हैं। रेडीमेड कपड़ों से प्रतिदिन आजीविका योग्य आमदनी हो जाती है। गांव भडूस के ही सब्जी उत्पादक किसान श्री भीम खोटे यहां सब्जी की दुकान लगाकर लगभग दो सौ रूपए तक कमाई कर रहे हैं। उनके पास सात एकड़ जमीन है एवं वे सब्जी उत्पादन करते हैं। यहीं चने-फुटाने एवं चिप्स इत्यादि बच्चों के खाने की चीजों की दुकानें लगाए श्री दशरथ अमझरे बताते हैं कि वे दो सौ रूपए तक प्रतिदिन आमदनी प्राप्त कर लेते हैं। वहीं फलों की दुकान लगाए श्री दिलीप अमझरे का कहना है कि वे पहले विभिन्न गांवों के हाट-बाजारों में जाकर फलों की दुकान लगाते थे। लॉक-डाउन के बाद अब वे स्थायी रूप से यहीं दुकान लगाकर चार सौ से पांच सौ रूपए रोज आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह यहां लगभग 50 दुकानदार विभिन्न तरह के फलों, सब्जियों एवं अन्य रोजमर्रा के उपयोग की सामग्री की बिक्री कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। सडक़ के किनारे छोटा-सा बाजार विकसित कर व्यावसायिक गतिविधियों से जुडऩा उनका आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम है।

इस संबंध में जिला कलेक्टर श्री राकेश सिंह बताते हैं कि इस तरह के दुकानदारों/सब्जी-फल उत्पादकों के लिए हाईवे के किनारे अनुपयोगी रिक्त सरकारी भूमि तलाश कर आवश्यकतानुसार विकेन्द्रीकृत हाट-बाजार विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि नगरीय क्षेत्रों में अनावश्यक भीड़ न हो। साथ ही स्थानीय लोगों को आवश्यकता की चीजें सुगमता से उपलब्ध हो सके तथा लोग आजीविका से जुड़ सके।

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