भारत सरकार के मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में 18 अगस्त को होगी हड़ताल, मांगे नहीं मानने पर अनिश्चिततकालीन होगी हड़ताल – वंसत राय

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भारत सरकार के मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में 18 अगस्त को होगी हड़ताल, मांगे नहीं मानने पर अनिश्चिततकालीन होगी हड़ताल – वंसत राय


सारनी, (ब्यूरो)। भारत सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों को लेकर कोल श्रमिक संगठनों ने तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था जो कि 2 जुलाई से लेकर 4 जुलाई तक चली। यह हड़ताल वेकोलि क्षेत्र पाथाखेडा में तीनों दिन काफी सफल रही परंतु इस हड़ताल के बावजूद सरकार ने संगठनों की मांग नहीं मानी। जिसके बाद संगठनों ने वर्चुअल मीटिंग कर 18 अगस्त को संकेत के रूप में हड़ताल का आह्वान दिया है अगर इससे पहले अगर केंद्र सरकार मांगे नहीं मानता है तो 18 अगस्त से होने वाली हड़ताल अनिश्चित कालीन होगी। ऐसा बयान देते हुए प्रेस से बाते करते समय वसंत रॉय ने कहा। इस दौरान 5 श्रमिक संगठनों ने मिलकर बीएमएस के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं कोल प्रभारी वसंत राय का पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया। जिसके पश्चात बीएमएस के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं कोल प्रभारी वसंत राय ने बताया कि भारत सरकार द्वारा लगातार कोल उद्योगों को लेकर मजदूर विरोधी नीतियां चलाई जा रही है, जिसके विरोध में पांचों संगठनों ने एकजुट होकर हड़ताल का आह्वान किया था, जिसके पश्चात और भी कई श्रमिक संगठन इस आंदोलन से जुड़े और इस हड़ताल को केरल से भी संगठनों ने एक दिन की रैली के रूप में समर्थन किया। हमारे इस आंदोलन को सफल बनाने में प्रिंट मीडिया ने बहुत जिम्मेदारी निभाई है, जिसका हम आभार व्यक्त करते हैं। हड़ताल के पश्चात सभी संगठनों की वर्चुअल मीटिंग हुई जिसमें कि सभी ने मिलकर यह निर्णय लिया कि सभी 40 खदानों का हम सर्वे करेंगे, यह 40 खदानें अन्य प्रदेशों में भी है जिन सभी का हम सर्वे करेंगे। इन सभी खदानों का हम 2 हफ्ते के अंदर सर्वे करेंगे और जो माइंस के क्षेत्र हैं हम उन उस क्षेत्र के निवासियों से संपर्क करके बताएंगे कि आपकी या झोपड़ी और जमीन जाने वाली परंतु आपको इसके बदले कुछ नहीं मिलेगा। क्योंकि सरकार आरआरपासी बदलने जा रही है जिसके तहत नौकरी नहीं जाएगी क्योंकि उन पर उद्योगपतियों का दावा है कि हम को जमीन लेना है। अभी तक आरआरपासी में नियम था कि जमीन का मुआवजा एवं नौकरी दी जाएगी परंतु अब ऐसा नहीं है। जिसकी साथ ही हमने टेंडर भरने वाले उद्योगपति से अपील करी है कि वे ऐसे में अपने पैसे खर्च ना करें। हम खदानों को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ेंगे। हमने यह निर्णय लिया है कि 18 अगस्त को कोल इंडिया का टेंडर समाप्त होता है उसी दिन हम हड़ताल करेंगे जिसके लिए हमने सरकार को संकेत दिए हैं, कानूनी कार्यवाही भी पूरी की जा रही। अगर 18 अगस्त तक सरकार मांगे नहीं मानती है तो 18 अगस्त से होने वाली हड़ताल अनिश्चित कालीन होगी अब भी तो यह सिर्फ संकेत है। श्री राय ने कहा कि सरकार रेल बंद करके देश चला सकती परंतु कोल उद्योग बंद करके देश 1 दिन भी नहीं चला सकती है।


आउट सोसींग के ठेकेदार का सहयोग लेकर हड़ताल के प्रयास की करी भर्त्सना

वही डॉ कृष्णा मोदी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (आई एम डब्लयूएफ) एटक ने बताया कि कोयला उद्योग में निजी कम्पनीयों तथा उद्योगपतियों के द्वारा कामर्शियल माईनिंग लाने हेतु भारत सरकार की निती के विरोध मे कोयला उद्योग मे कार्यरत संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर 2, 3, 4 जुलाई 2020 को तिन दिवसीय हडताल सफल करने हेतु कोयला उद्योग में कार्यरत सभी श्रमिक , सभी एसोशिएशन, अन्य उद्योग के श्रमिक संघ, स्थानिय जनता, व्यवसायी, स्थानिय प्रशासन का सकारात्मक सहयोग मिलने के कारण ही हडताल पूर्ण रूप से सफल रहा। इस हडताल को कंम्पनी प्रबंधन द्वारा आउट सोसींग के ठेकेदार का सहयोग लेकर हड़ताल को तोडने का भरकस प्रयास किया गया है, उसका संयुक्त मोर्चा भर्त्सना करता है। इन्ही प्रबंधन एवं ठेकेदार की मिलीभगत के कारण ही कोयला उद्योग में कार्यरत ठेका मजदूरों का आजतक हायपॉवर कमिटी के सिफारिश के आधार पर वेतन लागु नहीं हुआ है, इस पर सरकार द्वारा गंभीर रूपसे दखल देने की आवश्यकता है। जिसके लिये संघठन मांग करता है कि सरकार एवं प्रबंधन द्वारा हडताल मे शामील श्रमीकों के उपर किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कारवाई एवं आठ दिन का वेतन कटौती आदि गलत व्यवहार ना करे। भारत सरकार कोयला उद्योग में कामर्शियल माईनिंग के निर्णय को यथाशिघ्र स्थगित कर हडताल नोटिस मे सम्मिलित अन्य मांगो पर श्रमिक संघ प्रतिनिधि से चर्चा कर समस्यायों का समाधान करें। अन्यथा संयुक्त मोर्चा द्वारा कोयला उद्योग मे लगातार तीव्र आंदोलन जारी रखा जायेगा एवं 18 अगस्त को कोयला उद्योग मे हडताल किया जायेगा। फलस्वरूप उत्पन्न स्थिती के लिये भारत सरकार पूर्ण रूपसे जिम्मेदार रहेंगी।

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