इंदौर अस्पताल में सेवाएं देकर लौटी कविता का किया सम्मान

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इंदौर अस्पताल में सेवाएं देकर लौटी कविता का किया सम्मान

कोविड-19 में अस्थाई तौर पर दी सेवाएं, कोरोना योद्धा की निभाई भूमिका


बैतूल। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमपुर में पदस्थ महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता कविता बारपेटे ने इंदौर में कोरोना की लंबी लड़ाई लड़ी। पिछले दो महीने से कविता बारपेटे द्वारा इंदौर के एन व्हाय अस्पताल में सेवाएं दी जा रही थी। 23 अप्रैल से कविता कोविड-19 के मरीजों के सैंपल लेकर वार्ड में लगातार सेवाएं दे रही थी। कविता 21 जून को बैतूल वापस आकर 14 दिन क्वॉरेंटाइन रही। इसके बाद मंगलवार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमपुर में वापस लौटने पर स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका जोरदार स्वागत किया, कर्मचारियों ने पुष्पवर्षा कर उन्हें सलाम किया। कविता ने बताया कि इंदौर में कोरोना के मरीज ज्यादा थे, ऐसे में वहां काम बहुत था और जोखिम भी बहुत था। इंदौर में कोरोना ज्यादा फैलने से प्रदेश के विभिन्ना हिस्सों से स्वास्थ्य कर्मचारियों को इंदौर में पदस्थ किया गया था। उन्हें भी अस्थाई तौर पर पदस्थ कर सेवाएं ली गई। उन्होंने निरंतर ड्यूटी पर रहते हुए मरीजों की सतत देखरेख की। कर्तव्य के दौरान घर की चिंता जरूर सताती रही, लेकिन राष्ट्र हित में कोविड-19 में सेवा देने के अवसर को ज्यादा महत्वपूर्ण समझा। उन्होंने कहा कि कर्तव्य से बढकऱ और कुछ भी नहीं है। स्वागत के दौरान कर्मचारियों ने उन पर पुष्पवर्षा की और उनकी सेवाओं के लिए उनका आभार माना। इस मौके पर डॉ राकेश तिवारी एमओ, एमएल सागरे, बीडी बर्डे, सुरेंद्र राजपूत, ब्रजलाल उईके, प्रदीप जगदले, सुनील उईके, छोटू उइके, नवीन, सूर्यकांत माथनकर, छोटू उइके, श्रवण परते उपस्थित रहे।

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