आयकर रिटर्न में फाइलिंग में देरी पड़ सकती हैं भारी, रखिये इन बातों का ध्यान

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आयकर रिटर्न में फाइलिंग में देरी पड़ सकती हैं भारी, रखिये इन बातों का ध्यान


आयकर रिटर्न देर से दाखिल करने पर टैक्सपेयर्स को कॉफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कम छूट के अलावा, टैक्सपेयर्स को जुर्माना भी देना होगा। देरी से ITR फाइल करने पर एक तरफ इनकम टैक्‍स में छूट (Income Tax Exemptions) का कम लाभ भी नहीं मिल पाता है। ऐसा करने से हो सकते है ये नुकसान

ये हैं नुकसान – रिटर्न फाइल करने पर करदाता आवासीय संपत्ति (House Property) को हुए नुकसान के अलावा किसी भी तरह की क्षति को कैरी फार्वर्ड (Carry Forward) नहीं कर सकते हैं।

आयकर कानून (Income Tax Act) की धारा-234A के तहत करदाता को 1 फीसदी की साधारण दर से हर महीने ब्‍याज (Simple Interest) चुकाना होगा।

धारा 234 एफ के तहत लेट फाइलिंग फीस, AY 2018-19 से दाखिल रिटर्न के लिए लगाई जाती है, अगर तय तारीख के बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है। लेकिन, आकलन वर्ष के 31 दिसंबर से पहले, 5,000 रुपय की देर से दाखिल शुल्क लिया जाता है। अगर रिटर्न 31 दिसंबर की तुलना में बाद में दाखिल किया जाता है, तो 10,000 रुपय की देर से फाइलिंग शुल्क देय है। हालांकि, देर से दाखिल शुल्क का पैमेंट, 1,000 से अधिक नहीं हो सकता है, यदि कुल इनकम 5 लाख रुपय से ज्यादा नहीं हैं।

कम लाभ – जुर्माने का पैमेंट करने के अलावा, एक टैक्सपेयर्स  को उस वर्ष के लिए कुछ छूट और कटौती को छोड़ना होगा। छूट और कटौती जो आईटीआर देर से दाखिल होने पर उपलब्ध नहीं होगी, नीचे दिए गए हैं:

इनमें आयकर कानून की धारा-10A और धारा-10B के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिल पाएगी।

धारा-80IA, 80IAB, 80IC, 80ID और 80IE के तहत मिलने वाली छूट से भी हाथ धोना पड़ेगा।

देरी से इनकम टैक्‍स रिटर्न (ITR) फाइल करने के कारण टैक्सपेयर्स  को आयकर कानून की धारा-80IAC, 80IBA, 80JJA, 80JJAA, 80LA, 80P, 80PA, 80QQB और 80RRB के तहत मिलने वाले डिडक्‍शन का लाभ भी नहीं मिलेगा।

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