फिर शुरू हुआ हमारी जीटी एक्सप्रेस का सफर, एक ट्रेन जो अपने में समेटे है इतिहास – पालीवाल

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फिर शुरू हुआ हमारी जीटी एक्सप्रेस का सफर, एक ट्रेन जो अपने में समेटे है इतिहास – पालीवाल


बैतूल। मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन के लागू होने के बाद सभी यात्री गाड़ियों के पहिये थम गये थे इन्हीं में से एक थी जीटी एक्सप्रेस। 12 सितंबर से पुनः इसके पहियों ने रफ़्तार पकड़ ली, और चल पड़ी हमारी जीटी अपनी मंजिल की ओर। उक्त बात कहते हुए आमला स्टेशन प्रबंधक वीरेंद्र कुमार पालीवाल ने बताया कि जीटी एक्सप्रेस के पुनः चलने की सूचना ने मेरे अलावा ना जाने कितने लोगों को सूकून और खुशी देने का कार्य किया है।

बहुत खास व्यक्तियों तथा आम व्यक्तियों की एक समान चहेती जीटी एक्सप्रेस ने बैतूल जिले की तीन प्रमुख तहसीलों (आमला, बैतूल एवं घोड़ाडोंगरी) का प्रदेश की राजधानी भोपाल एवं देश की राजधानी नई दिल्ली से संपर्क बनाये रखने के अलावा जिले को उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक जोड़ने का भी दायित्व बखूबी निभाया है।

श्री पालीवाल ने बताया कि चेन्नई और नई दिल्ली के बीच 12615/12616 एवं अब स्पेशल नंबर 02615/02616 से चलने वाली जीटी एक्सप्रेस जिसे ग्रांड ट्रंक एक्सप्रेस भी कहा जाता है अपने आप में इतिहास समेटे हुए है जिससे बहुत ही कम लोग परिचित हैं। जीटी एक्सप्रेस उन चंद एतिहासिक रेलगाड़ियों में से एक है, जो देश की आजादी के पहले से वर्तमान तक लगातार अपना सफर जारी रखे हुए हैं।

सर्वप्रथम अप्रैल 1929 में हमारी जीटी एक्सप्रेस ने अपनी यात्रा मैंगलोर से पेशावर के बीच में प्रारंभ की थी। बाद में इसे मैंगलोर से लाहौर तक कर दिया गया एवं कुछ अरसे बाद इसे चेन्नई से नई दिल्ली के बीच कर दिया गया जो अभी तक बदस्तूर जारी है। नई दिल्ली से पेशावर के बीच एवं बाद में लाहौर तक इसमें कुछ ही डिब्बे जुड़े होते थे एवं जिनकी कल्पना बड़े से ट्रंक ( संदूक ) से करते हुए इसका नाम “ग्रांड ट्रंक” कर दिया गया।

वहीं कुछ लोगों की मान्यता है कि इसके लंबे यात्रा रूट की कल्पना हाथी की लंबी सूंड से करते हुए इसका नाम ग्रांड ट्रंक कर दिया गया। खैर चलिये फिर तैयार है हमारी जीटी एक्सप्रेस अपने लंबे सफर में यात्रियों की सेवा के लिए।

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