सारनी में बन रही प्रदेश की सबसे महंगी बिजली,पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने जारी की एमओडी

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सारनी में बन रही प्रदेश की सबसे महंगी बिजली,पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने जारी की एमओडी

नई इकाइयों से 21 पैसे प्रति यूनिट महंगा हुआ बिजली उत्पादन


बैतूल/सारनी, (ब्यूरो)। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने प्रदेश के बिजली घरों की एमओडी जारी की है। जिसमें सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की नई इकाइयों से बिजली उत्पादन करना 21 पैसे प्रति यूनिट तक महंगा हुआ है। वहीं पुरानी इकाइयों से विद्युत उत्पादन करना पांच पैसे सस्ता हुआ है। सबसे कम दर पर अमरकंटक ताप ग्रह से उत्पादन लिया जा रहा है। यहां पिछली एमओडी में 1 रुपए 86 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उत्पादन हो रहा थी। मौजूदा एमओडी में एक पैसे का सुधार आया है।

इसी तरह बिरसिंहपुर पावर प्लांट की 500 मेगावाट की इकाई से पहले 2.22 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उत्पादन होता था। नई एमओडी में एक पैसे प्रति यूनिट सुधार आया है। बिरसिंहपुर की ही पुरानी इकाइयों की उत्पादन लागत पहले 2.65 पैसे प्रति यूनिट थी। जिसमें एक पैसे का सुधार आया है। इधर सिंगाजी पावर प्लांट के फेज वन की 600-600 मेगावाट उत्पादन लागत पहले 2.86 पैसे प्रति यूनिट थी। मौजूदा एमओडी में एक पैसे बढ़कर 2.87 पैसे हो गई है।

वहीं सिंगाजी पावर प्लांट के फेज टू से बिजली उत्पादन करना 13 पैसे महंगा हुआ है। यहां की 660-660 मेगावाट की तीन और चार नंबर इकाई से पहले 2.75 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उत्पादन होता था जो नई एमओडी में बढ़कर 2.88 पैसे प्रति यूनिट हो गया है। सतपु?ा की नई इकाइयों से पहले 2.21 पैसे प्रति यूनिट की दर से उत्पादन होता था जो नई एमओडी 13 पैसे ब?कर 2.42 पैसे प्रति यूनिट हो गई है। वहीं पुरानी इकाइयों की उत्पादन लागत पहले 3.11 पैसे थी जो घटकर 3.5 पैसे प्रति यूनिट हो गई है।

प्रदेश में बारिश का दौर थमते ही बिजली की मांग बढऩे लगी है। इन दिनों रोजाना 10 हजार मेगावाट के आसपास बिजली की मांग रह रही है। इससे यह तो तय है कि आगामी दिनों में डिमांड और बढ़ेगी। इसका असर यह होगा कि लंबे समय से रिजर्व शटडाउन यानी कि आरएसडी में बंद सतपुड़ा की छह व सात नंबर इकाई को मौका मिलेगा। फिलहाल 5400 मेगावाट क्षमता के मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी कि 16 में से 9 इकाइयों से 1700 मेगावाट के आसपास बिजली उत्पादन लिया जा रहा है। बिजली उत्पादन लागत कम करने विद्युत नियामक आयोग द्वारा मापदंड निर्धारित किया है।

इसी के आधार पर प्रदेश के थर्मल पावर स्टेशनों को बिजली उत्पादन करना होता है। लेकिन तय मापदंड से अधिक कोयला और आयल की खपत होने से बिजली उत्पादन लागत बढ़ती है। उत्पादन लागत बढऩे की एक और वजह कोयले के दाम बढऩा है। जानकार बताते हैं कि जितनी कम दूरी से प्लांट को कोयला आपूर्ति होगा। उत्पादन लागत में उतना सुधार होगा। वहीं जितनी अधिक दूरी से कोयला प्लांट में पहुंचेगा। वहां उत्पादन लागत बढ़ेगी।

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