तत्कालीन सचिव और ठेकेदार निगल गए प्रधानमंत्री आवास की राशि, प्रधानमंत्री आवास बने नहीं राशि हो गई खर्च

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तत्कालीन सचिव और ठेकेदार निगल गए प्रधानमंत्री आवास की राशि, प्रधानमंत्री आवास बने नहीं राशि हो गई खर्च


आठनेर, (विजय प्रजापति)। जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत लगभग 65 किलोमीटर की दूरी आदिवासी अंचल में स्थित ग्राम पंचायत मानी जो पूरी तरह से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। वहां घुसपैठिए इस कदर आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उनके हितों पर कुठाराघात करते इस मामले से उजागर हो जाता है।

शासन स्तर से प्रधानमंत्री आवास निर्माण हेतु जरूरतमंदों को उनके खातों में राशि आवंटित की जाती है जिस पर पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधि अधिकारी कर्मचारियों की नजरें गिद्ध की तरह लगी रहती है उनकी जीत तब तक लप-लप आती रहती है जब तक कि उनका उसमें हिस्सा नहीं हो जाए।

भ्रष्टाचार की इंतेहा देखो की पंचायत में बैठे मालगुजार कहे जाने वाले सचिव ने इस कदर पंचायतों को चारागाह बना रखा है कि उन्हें हरे हरे नोटों के अलावा कुछ सूझता ही नहीं है। पंचायती राज व्यवस्था के यह प्रहरी जरूरतमंदों के हक पर किस कदर डाका डालते हैं यह मामले से उजागर हो जाएगा। वर्ष 2018-19 में ग्रामीण रामू /मदिरा ग्राम नडा, सुनील/इठू ग्राम मानी, गरीबा कोडिया ग्राम धारूड़, दशरथ/झिग्गू ग्राम धारूड, गणेश मौजी ग्राम धारूड, जमुना/सोमसिग ग्राम धारूड इसके अतिरिक्त 2 दर्जन से अधिक हितग्राही जिनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1,50,000 रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी।

गौरतलब हो कि तत्कालीन सचिव दिलीप ने जिस तरह इन हितग्राहियों के आसपास मकड़जाल बुना की सारी राशि बिना आवाज बने खर्च हो गई। सचिव दिलीप के द्वारा हितग्राहियों को गुमराह करते हुए स्थानीय ठेकेदार जयदेव पिता काशीनाथ, मोइज उर्फ गोलू पिता शेख प्यारे को उनका आवास निर्माण करने हेतु ठेका दे दिया क्योंकि हितग्राही निरक्षर है। इसलिए इन ठेकेदारों ने सचिव के साथ सांठगांठ कर हितग्राहियों के बैंक खाते से ऑनलाइन अंगूठा लगाकर राशि निकाल ली एवं खर्च कर ली हितग्राहियों के आवास आज भी आधे अधूरे है राशि हेरा फेरी हो गई है।

गांव के स्थानीय निवासी रमेश के द्वारा मामले पर पर्दा डालते हुए हितग्राहियों को गुमराह कर रहा है कि तुम्हारा काम वर्तमान सचिव राजकुमार नहीं होने दे रहा है। इसकी शिकायत 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन करो जिसके कारण तुम्हारे मकान बनेंगे वस्तुस्थिति यह है कि वर्तमान सचिव का इस मामले में कोई लेना देना नहीं है। जो कि रमेश स्थानीय ठेकेदारों एवं तत्कालीन सचिव दिलीप का चट्टा-बट्टा है। जो ग्रामीणों को गुमराह करके वस्तु स्थिति पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है बरहाल मामले की जांच कर हितग्राहियों के आवासों को पूर्ण किया जाना चाहिए तथा दोषियों पर कार्रवाई भी किया जाना चाहिए।

हितग्राही वर्तमान बारिश जो कि क्षेत्र में लगातार कहर बरपा रही है वह खुले में अपने परिवार बच्चों के साथ जीने के लिए मजबूर है उनके सिर पर छत नहीं होने के कारण वे बीमारी का शिकार बन रहे रात दिन उन्हें जंगली जानवरों सांप बिच्छू का डर बना रहता है। परिवार का प्रत्येक सदस्य बारी बारी से रात में जाग कर परिवार की चौकीदारी करता है दिन निकलते से ही वह काम पर निकलते हैं। लेकिन घरों में दरवाजे खिड़की नहीं होने से अनायास ही बारिश होने से अनाज खराब होने चोरी होने की आशंका के चलते डरेसे में रह रहे किंतु विभागीय अधिकारी ना तो इस समय उनकी सुन रहे हैं और ना ही कोई उचित कार्रवाई कर रहे परिवार का जीना दूभर हो गया है। चुकी वर्तमान में खेती-बाड़ी का काम लगा है परिवार का एक सदस्य घर पर रहने से मजदूरी का घाटा हो रहा है।

विगत दिनों क्षेत्रीय विधायक धरमु सिंह सिरसाम ग्राम धारूड मार्ग पर पुलिया निर्माण का भूमि पूजन करने गए थे तब ग्रामीणों ने अपनी समस्या से उन्हें अवगत कराया था एवं लिखित आवेदन देकर उचित कार्रवाई की मांग की थी किंतु आज तक कोई सकारात्मक पहल इसलिए नहीं हुई। 

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