बबूल-रायमुनिया पालने वाली बंजर भूमि पर लहलहाने लगे सागौन और बांस के पेड़

Advertisements

बबूल-रायमुनिया पालने वाली बंजर भूमि पर लहलहाने लगे सागौन और बांस के पेड़


सारनी, (ब्रजकिशोर भारद्वाज)। यूं तो सतपुड़ा के जंगलों की गाथा काफी पुरानी है। ऐसे घने जंगल शायद ही देश के अन्य कोने में रहे हों, लेकिन समय के साथ वनों का दोहन हुआ और ये सघन वन कई स्थानों पर विरले होने लगे। हालांकि वन विभाग समय-समय पौधारोपण कर वनों की हरियाली को बरकरार रखे हुए हैं।

बावजूद इसके कई बंजर क्षेत्र ऐसे थे जहां जंगलों की जरूरत थी। ऐसे में उत्तर वन मंडल ने नया कीर्तिमान करने की योजना बनाई। इसके तहत वर्ष 2017 में एक दिन में ही करीब 360 हेक्टेयर बंजर भूमि पर 4.40 लाख मिश्रित पौधे लगाकर उसे हरा-भरा कर दिया गया। आज करीब 3 सालों बाद लगाए गए इन पौधों में से 87 फीसदी पौधे जीवित हैं।

इतना ही नहीं बंजर भूमि पर हुए पौधारोपण से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जिस बंजर भूमि पर कभी बबूल, जंगली बैर और रायमुनिया जैसे कांटेदार पौधे पनपते थे उस जमीन पर अब सागौन, आंवला और बांस जैसे उपयोगी पेड़ लहलहा रहे हैं।

बंजर क्षेत्रों को सघन करने के लिए उत्तर वन मंडल (सामान्य) के सारनी परिक्षेत्र के तहत गांधीग्राम और गोपालपुर में तकरीबन 4 ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया गया, जहां राजस्व से बंजर भूमि प्राप्त कर पौधे लगाए गए।

जबकि घोड़ाडोंगरी के एक क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर पौधे लगाए गए। तत्कालीन वनमंडलाधिकारी उत्तर बैतूल श्री संजीव झा के मार्गदर्शन और नेतृत्व में उत्तर वन मंडल सारनी की पूरी टीम ने एक साथ एक ही दिन में 360 हैक्टेयर में 4.40 लाख पौधे लगाने की चुनौती अपने हाथों में ली।

वर्ष 2017 में कैंपा, वैकल्पिक वृक्षारोपण योजना के तहत वन सुरक्षा समिति शक्तिगढ़, आमढाना, ढोकली और घोड़ाडोंगरी की मदद से पौधारपोपण किया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी विजय कुमार बारस्कर ने बताया अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं पदेन मुख्य वन संरक्षक बैतूल एमएल मीणा, उत्तर वन मंडल के डीएफओ पुनीत गोयल एवं प्रभारी एसडीओ सारनी बघेल के दिशा-निर्देशन में गांधीग्राम की 70 व 90 हैक्टेयर बंजर भूमि, गोपालपुर की 80 व 40 हेक्टेयर बंजर भूमि, घोड़ाडोंगरी में 30 हैक्टेयर एवं ढोकली गांव में 50 हैक्टैयर में वन भूमि में एक ही दिन में किए गए पोधारोपण की देखरेख की जा रही है।

श्री बारस्कर ने बताया बंजर भूमि पर 360 हैक्टेयर में तकरीबन 4 लाख 40 हजार 425 पौधों में से 87 फीसदी पौधे जीवित हैं।

बंजर भूमि पर ऐसे पौधे लगाए जो ग्रामीणों के आए काम

वन विभाग ने वैकल्पिक मिश्रिम पौधारोपण में ऐसे पौधों का चयन किया जो आगे जाकर ग्रामीणों की दिनचर्या को आसान बना सके।

इसके तहत वन विभाग ने इस 360 हैक्टेयर में संरक्षित प्रजाति के सागौन के अलावा उपयोगी बांस, आंवला, बेहड़ा, जामुन, हर्रा, करंज, श्वेत सिरस, अर्जुन, खमेर, शहतूत, चिरोल जैसी अन्य उपयोगी प्रजाति के पौधे लगाए। इन पौधों की उपज से वन एवं ग्रामीण क्षेत्र के आस-पास के लोगों को काफी फायदा मिलेगा।

रेत से तेल निकालने जैसा काम था बंजर भूमि पर पौधारोपण

वन विभाग अमूमन वन क्षेत्रों की भूमि पर रूटशूट, राइजोम जैसे पौधारोपण करता है, लेकिन बंजर भूमि पर पौधारोपण करना किसी चुनौती से कम नहीं था। बंजर भूमि को पौधारोपण करने के लिए वन विभाग की टीम ने दिन-रात एक कर वन सुरक्षा समितियों की मदद से यहां पौधाराेपण किया।

बेहतर बात यह रही कि इसमें से 87 फीसदी पौधे मई 2020 की गणना तक जीवित हैं। वन विभाग का मैदानी अमला और सुरक्षा समिति के सदस्य सतत इनकी देखरेख कर रहे हैं।

कहां कितना पौधारोपण


गोपालपुर-80 हैक्टेयर- 100000

गोपालपुर-40 हैक्टेयर- 48800

गांधीग्राम 70 हैक्टेयर- 87500

गांधीग्राम- 90 हैक्टेयर- 112500

घोड़ाडोंगरी-40 हैक्टेयर- 41000

ढोकली-50 हैक्टेयर – 50625

कुल पौधारोपण – 440425


 

Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error:
WhatsApp chat