सामाजिक मीडिया का बदलता रुख वरदान या अभिशाप?

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सामाजिक मीडिया का बदलता रुख वरदान या अभिशाप?


सामाजिक मीडिया आज की तरीक में नफरत तथा घ्रणा फेलाने का एक बड़ा केन्द्र बन चुका है जिसकी चपेट मे सारी दुनिया फस चुकी है। साल 2019 में न्यू ज़ीलैण्ड मे स्थित दो मस्जिदों पर आतंकी समुदाय दुआरा हमला किया गया था जिसमे 49 लोगो ने अपनी जान गवा दी थी तथा 12 लोग घम्बिर अवस्था में पाए गये थे।

यह पुरे हमले का लाइव प्रसारण फ़ेसबुक पर किया गया था। इस लाइव प्रसारण ने वहां की सरकार को सोचने मे मजबूर कर दिया की केसे एसे दिल धेलाने वाले प्रसारण समाज को नुक्सान पहुचा सकते हैं और उनकी मानसिकता को हानी पहुचा सकते है।

भारत में सामाजिक मीडिया का प्रभाव कूछ पृथक् नही हैं। यह बात 2018 की है, जब राजस्थान मे एक दक्षिणपंथ हिन्दुत्व नेता सम्बुलाल रेगर ने बंगाली मुस्लिम प्रवासी मज़दूर के बेरहमी से टुकडे कर उसके शरीर को जला दिया था।

रेगर ने इस पूरे घटना का वीडियो यूट्यूब मे ” लव जिहद ” के उपदेश के खिलाफ डाला था। रेगर की येह सोच को जहाँ उन्के अन्य विष्णू हिन्दू परिषद कर्ता दुआरा सहराया जा रहा था वही इस वीडियो को देखकर काफी लोगो के बिच देशक्त का माहोल फ़ेल गया था।

न्यूज़ीलैण्ड हो या भारत दोनो ही घटनाओं ने हेवानियत की सरी हदे लाँघ दी थी। नागरिक तथा सामाजिक संबंधित कानुन मे प्रवर्तन लाने के बावजूद भी इन घटनाओं को लोगो के बिच नफरत फेलाने से सरकार असमर्थ रही।

सामाजिक मीडिया से जुडी इस समस्या को जर्मनी ने पहचाना थथा इसे समझा और कानून मे बदलाव लाये जेसे इसे रोका जए। साल 2017 मे वहा की सरकार ने नेटवर्क एन्फोर्चेमेंत ऐक्ट नियमित किया था जिसमे कहा गया है की एसी कोई भी धारणा जो अपमानजनक हो उसे 24 घन्टे के अंतर्गत हट जाना चाहिए वर्ना इंटरनेट कंपनीयो को 50 मिलियन एउरो तक का जुर्माना भरना पड सकता है।

इसके अन्तर्गत सभी सामाजिक मीडिया वेबसाइट को यह आदेश दिया गया की उन्हे BKA को रेपोर्त करना होगा अगर उन्हे एसी कोई भी धारणा या विचार जहाँ चाइल्ड पोर्नोग्राफी का वितरण किया जा रहा हो, या किसी भी तरह के अपराध को बढाया या सराया जा रहा हो, किसी भी हिंसा की तैयारी की जा रही हो।

अगर भारत की बात की जए तो यहा काफी सुधार की अवश्यकता है। हम इस मामले मे अगर देखा जाये तो काफी पीछे है, कड़े कदम उठाने थथा कानून बनने से जादा येह ज़रुरी होगा के उनका पालन भी किया जाये और यह चीज़ को स्थापित करने में हमे काफ़ी चदायी करनी होगी।

– कशिश आहूजा, बैतूल

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