घर-घर स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारियों की दस्तक

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घर-घर स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारियों की दस्तक


बैतूल/चिचोली। अभियान 15 फरवरी से 20 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। इसी के तहत चिचोली विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पाठाखेड़ा के कई ग्रामों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अंकिता वरवड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार हमारे देश का औसत आईएमआर प्रति 1,000 जीवित जन्मों में 32 है, जिसमें ग्रामीण इलाकों में औसतन 36 मौतें और शहरी इलाकों में 23 मौतें शामिल हैं। मध्य प्रदेश में यह ग्रामीण क्षेत्रों में 52 और शहरी क्षेत्रों में 36 बच्चे हैं।

निर्जलीकरण(दस्त उल्टी) से शिशुओं की मृत्यु तथा वर्तमान में सबसे आम कारण न्यूमोनिया है। अधिक विकसित देशों में शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों जन्मजात विकृति, संक्रमण और एस आई डी एस शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में नवजात शिशु,0 से 5 वर्ष बच्चो में मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से दस्तक अभियान का आयोजन 15 से मार्च तक किया जा रहा है। तथा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्राप्त द्वारा जानकारी के अनुसार इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य अभियान के तहत् स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल (ए.एन.एम., आशा एवं आंगनवानी कार्यकर्ता) द्वारा 5 वर्ष तक की उम्र के बच्चों वाले परिवारों के घर-घर जाकर बच्चों में प्राय: पाई जाने वाली बीमारियों की सक्रिय पहचान एवं उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना है।

समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं और समुदाय स्तर पर नवजात शिशु की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार समानता और गरिमा सुनिश्चित करना है, जिससे नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अंकिता वरवड़े ने बताया कि इसके तहत समुदाय स्तर पर आशा कार्यकर्ता द्वारा गांव के समस्त नवजात शिशुओं के वजन, तापमान, सांस की गिनती की जायेगी एवं माताओं को स्तनपान,टीकाकरण, साफ सफाई, खतरे के आम चिन्ह तथा कंगारू मदर केयर के संबंध में सलाह दी जायेगी। साथ ही 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बाल्यकालीन दस्त रोग के नियंत्रण हेतु ओआरएस एवं जिंक के उपयोग संबंधी सामुदायिक जागरूकता में बढ़ावा एवं प्रत्येक घर में गृहभेंट के दौरान ओआरएस पहुंचाया जाएगा।

इसके अलावा 9 माह से 5 वर्ष तक के समस्त बच्चों को विटामिन-ए अनुपूरण, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृद्धि विलम्ब की पहचान करना, इस अभियान के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा नवजात शिशु सुरक्षा हेतु विशेष गतिविधियों का आयोजन कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुये किया जा रहा है, जिसमें समस्त धात्री माताओं की बैठक ली जाकर उन्हें नवजात सुरक्षा, खतरे के चिन्हों एवं संस्था आधारित नवजात देखभाल के बारे में जानकारी प्रदाय की जा रही है, माता अपने घरेलू स्तर पर क्या कर सकती हैं जिसमें शिशु को हमेशा गर्म सूखे कपड़े में रखें ठंड से बचाए रखें।

इससे बच्चों को हाइपोथर्मिया की संभावनाएं कम हो जाएगी, समय-समय अर्थात हर 2 घंटे मे पर स्तनपान कराएं, जिससे बच्चा हाइपोग्लाइसीमिया से बचा रहेगा, शिशु में बुखार नाभि से पस आना कान से मवाद, पसली का चलना ,शरीर पर दाने या चकत्ते आना, बुखार आना, शिशु का ठीक से स्तनपान ना करना ,स्तनपान के प्रति अरुचि दिखाना। अन्य किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर जांच कराएं।

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