February 25, 2021

बोरदेही में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं, मरीजों की कौन लेगा सुध…??

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बोरदेही में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं, मरीजों की कौन लेगा सुध…??


खेड़ली बाजार, (सचिन बिहारिया)। बोरदेही का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज हेतु यहां आने वाले मरीजों, घायलों को आगे रिफर करने का स्थान मात्र बनकर रह गया है। स्थाई एमबीबीएस डॉक्टर और एंबुलेंस वाहन जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में बोरदेही अस्पताल आने वाले मरीजों को सिर्फ औपचारिक रूप से पर्ची बना कर आगे रेफर कर दिया जाता है।

बहुत से मरीजों का बोरदेही अस्पताल इलाज हेतु नहीं आने के पीछे मानना है कि जब यहां डॉक्टर ही नहीं है तो यहां आकर समय खराब करने से अच्छा है कि मरीजों को सीधे आमला या जिला अस्पताल बैतूल पहुंचाया जाए ताकि मरीज एवं घायलों का समय पर उपचार हो सके। लेकिन सभी मरीज़ आमला या जिला अस्पताल बैतूल तक नहीं पहुंच पाते।

बोरदेही अस्पताल ओपीडी पर्ची कटवाने का एकमात्र स्थान बन गया है यहां ना तो किसी भी प्रकार के कोई सुविधाएं हैं और ना ही एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध है जो कि किसी भी मरीज का उपचार कर सकें, यह अस्पताल सिर्फ आयुष डॉक्टर और कुछ सीमित संख्या के कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।

चुनाव में याद आती है ग्रामीण जनता

क्षेत्र के ग्राम डुडरिया के जागरूक नागरिक मुकेश साहू, सोनू साहू, ग्राम बीसखान के बंशीलाल पटेल, राजकुमार पंवार आदि का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और नेताओं को हमारी चिंता सिर्फ चुनाव के दौरान ही होती है, जब भी चुनाव आते है तो प्रत्याशियों द्वारा सभी समस्याओं को दूर करने को लेकर बड़ी बड़ी कसमें खाई जाती है, बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद सारी कसमें भूल जाते हैं, किए गए वादे निभाए नहीं जाते और इधर पलट कर आते ही नहीं। हम क्षेत्रवासियों ने आखिर इनका क्या बिगाड़ा है जो हमारे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे क्षेत्रवासी

ग्राम खेड़लीबाजार के अतुल पारखे, राहुल साहू, महेश डांगे, उदयभान पारखे, व्यवसायी योगेश साहू, मनीष(गोलू)करोले आदि का कहना है कि क्षेत्र के बोरदेही और मोरखा के सरकारी अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने से हम सभी को अपनी जान जोखिम में डालकर झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज करवाना पड़ता है।

सभी का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में कम से कम डॉक्टर उपलब्ध रहे तो वे इलाज हेतु सरकारी अस्पताल में ही जाएंगे।शासन द्वारा जल्द ही स्थाई एमबीबीएस डॉक्टर और एंबुलेंस की व्यवस्था करना चाहिए।

पोस्टमार्टम और एमएलसी भी आमला में

ग्राम ब्राम्हणवाड़ा के पूर्व जनपद सदस्य अधिवक्ता रमेश चिल्हाटे, बोरदेही के ललित सूर्यवंशी, सूर्यप्रकाश शेटे का कहना है कि बोरदेही थाना क्षेत्र में लगभग सौ से अधिक ग्रामों आते हैं जिनमें होने वाले आपराधिक मामलों में आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल परीक्षण ( एमएलसी ) कराने आमला जाना पड़ता है जिसमें अनावश्यक समय नष्ट होता है और पीड़ित को काफी परेशानियां भी झेलनी पड़ती है।

इसके साथ ही थाना क्षेत्र में यदि किसी मृतक का पोस्टमार्टम कराना हो तो भी मृतक के परिजनों को पोस्टमार्टम हेतु आमला ही जाना पड़ता है,कई बार देरी हो जाने के कारण पोस्टमार्टम अगले दिन होता है जिससे परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने लगाए भेदभाव के आरोप

ग्रामीण क्षेत्र खामढाना के निवासी सम्पतराव देशमुख, दिलीप पंवार, मुकेश पंवार, देवेन्द्र देशमुख आदि का कहना है कि क्षेत्र में कम से कम एक एमबीबीएस डॉक्टर की स्थाई नियुक्ति होनी चाहिए। जिससे क्षेत्र के मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग बैतूल द्वारा बोरदेही और मोरखा क्षेत्र की आम ग्रामीण जनता के साथ इतना भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

इस तरह का भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस क्षेत्र में डाक्टर उपलब्ध नहीं होने से सभी को जान जोखिम में डालकर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवाना पड़ता है। शासन को जल्द ही डॉक्टर और एंबुलेंस की व्यवस्था करना चाहिए।

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