3 Mar 2021

टोल कर्मचारियों की चूक – मासिक पास भुगतान के बाद भी, काटे जा रहे फास्टटैग खाते से राशि

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टोल कर्मचारियों की चूक – मासिक पास भुगतान के बाद भी, काटे जा रहे फास्टटैग खाते से राशि


सारनी, (ब्यूरो)। भारत सरकार ने 15 फरवरी की आधी रात से राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुजरने वाले सभी वाहनों पर फास्टटैग लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसका प्रमुख उद्देश्य लम्बी कतारों में लगने वाले वाहनों और समय की बचत करना है, लेकिन इन दिनों फास्टटैग की यह सुविधा वाहन मालिकों के जेब पर दुगना भुगतान के रूप में भारी पड़ रही है।

इस उदाहरण के साक्षी पाथाखेड़ा (बैतूल) निवासी विवेकानंद उर्फ विक्की सिंह बने है विक्की सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने लगभग तीन माह पूर्व अपने चार पहिया वाहन हुंडई एक्सेंट रजिस्ट्रेशन क्रमांक एमपी – 04 सीपी – 7618 में फास्टटैग लगाया है। नियमानुसार उन्होंने समीपस्थ पांढरा टोल पर संबंधित सभी दस्तावेज़ टोल कार्यालय में जमा किए, जिससे फास्टटैग को मासिक पास से जोड़ा जाता है।

श्री सिंह ने मासिक पास भुगतान और कागज़ी कार्रवाई के बाद अपना वाहन पांढरा टोल से निकाला। जिसके बाद उनके फास्टटैग खाते से विगत दिसंबर और जनवरी माह में राशि काटने के क्रमशः संदेश उनके सचल दूरभाष यंत्र पर प्राप्त हुये।

दुगने भुगतान के बाद उन्होंने अपने फास्टटैग खाते में राशि डाली ही नहीं, फिर उन्होंने पुन: पांढरा टोल पर मासिक भुगतान कर फास्टटैग वाली लाइन से वाहन निकालना चाहा, परंतु टोल कर्मचारी ने फास्टटैग में राशि नहीं होने का हवाला दिया और नगद वाली लाइन से वाहन निकालने की बात कही।

इससे प्रतीत होता है कि श्री सिंह के फास्टटैग खाते में राशि होती तो पूर्व की भांति इस माह भी उनको दुगना भुगतान करना पड़ता। इस दुगने भुगतान से आहत होकर विक्की सिंह ने पांढरा टोल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि टोल कर्मचारियों की अचेतता और चूक से ही इन दिनों पांढरा टोल प्लाजा पर दुगना भुगतान की स्थिति निर्मित होने की बात कही।

विक्की सिंह ने आशंका जताई है और कहा कि पांढरा टोल के कर्मचारी ने उनके फास्टटैग को मासिक पास से नहीं जोड़ा है जिसके कारण ही फास्टटैग खाते से बार – बार राशि काटी जा रही है। पांंढरा टोल प्लाजा में कार्यरत एक दो कर्मचारी एक नामचीन टेलीकॉम कंपनी से ही फास्टटैग लगाने की गुहार लगाते अक्सर कई बार देखे गये। जो टोल कर्मी के कमीशन की ओर ध्यानाकर्षण करने को मजबूर करती है।

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