April 13, 2021

कोरोना काल मे मसीहा बन कार्य कर रहे समाज सेवी रिंकू चौरसिया

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कोरोना काल मे मसीहा बन कार्य कर रहे समाज सेवी रिंकू चौरसिया


छिन्दवाड़ा, (दुर्गेश डेहरिया)। कोरोना संक्रमण की एकाएक अत्याधिक मामले सामने आ रहे हैं। समूचे जिले से भयावह स्थिति बनी हुई है। ऐसे समय पर जिला अस्पताल एवं अन्य जिले के अस्पतालों में नागपुर, भोपाल, इंदौर कहीं पर भी मरीज को एडमिट करने के लिए जगह खाली नहीं है।

इन विषम परिस्थितियों पर जिले के बहुचर्चित जागते रहो ग्रुप खून का रिश्ता ग्रुप समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया मरीजों को अस्पताल ले जाने हेतु एंबुलेंस की व्यवस्था करवा रहे हैं।

जिले के आला अधिकारियों एवं डॉक्टरों से सम्पर्क कर आग्रह करके मरीजों को अस्पताल में एडमिट करवा रहे हैं। कुछ महत्वपूर्ण दवाइयां जो कि मरीज को आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है उसकी व्यवस्था भी तत्काल करवा रहे हैं। इसके साथ ही मरीज को रक्तदान भी नि:शुल्क उपलब्ध करवा रहे हैं।

आज हमारे संवाददाता ने समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया से फोन पर चर्चा किया उन्होंने जानकारी दिए उनके द्वारा बडकुई एवं छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में 42 कोविड संक्रमित मरीजों को भर्ती करवाया गया। 24 घंटे निरंतर मरीज से उसके स्वास्थ्य की जानकारी लेते एवं उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए नि:स्वार्थ सेवा कर रहे हैं। विगत सप्ताह मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य आग्रह कार्यक्रम किया गया था। जिसमें समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया को संवाद सुझाव हेतु आमंत्रित किया गया।

कोरोना से लड़ने हेतु सुझाव मैं जिले में स्वास्थ सेवा व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाने, नागपुर छिंदवाड़ा ट्रेन को बंद करने, जिले में जगह-जगह अस्थाई अस्पताल एवं आइसोलेशन भवन बनाने, और जिस जगह पर अभी कोरोना नहीं है वहां के डॉक्टरों की टीम को बुलाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया। संवाद कार्यक्रम के उपरांत जिला कलेक्टर सौरभ सुमन द्वारा जिले में बहुत सी व्यवस्थाएं की जा रही है।

सभी आला अधिकारी अपने अपने स्तर से निरंतर कार्यों में लगे हैं। विगत वर्ष परासिया, चांदामेटा, न्यूटन, बड़कुही में 24 मार्च 2020 में 59 दिन के लॉक डाउन में 1200 दीन-दुखियों एवं निराश्रित एवं पलायन करते मजदूरों को प्रतिदिन भोजन व्योवस्था करवाया गया।

गौ माता के लिए चारे की व्यवस्था की गई। लावारिस सॉन्ग बली (कुत्तों) के लिए रोटियों का प्रबंध किया गया। इन विषम परिस्थितियों पर जहां जान बचाने के लाले बने पड़े हैं वहां नि:स्वार्थ भाव से सेवा करना बहुत ही सराहनीय, अनुकरणीय है। इनके कार्यों की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम होगी।

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