April 14, 2021

सतपुड़ा राख डेम से होने वाली परेशानियां को लेकर ग्राम धसेड़ में ग्रामीणों की बैठक आयोजित

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सतपुड़ा राख डेम से होने वाली परेशानियां को लेकर ग्राम धसेड़ में ग्रामीणों की बैठक आयोजित


सारनी, (ब्यूरो)। ग्राम धसेड़ में मंगलवार शाम ग्रामीणों ने सतपुड़ा ताप विद्युत गृह से होने वाली परेशानियों को लेकर बैठक का आयोजन किया। जिसमें उन्होंने तय किया कि सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी धसेड़ ग्राम और अन्य आसपास के गांवों को मूलभूत सुविधाएं देने में असमर्थ है और मूलभूत सुविधाओं की मांगों को लेकर इससे पहले भी कई बार ग्रामीणों ने आंदोलन कर अधिकारियों से मांग की है परन्तु नतीजा शून्य साबित हुआ है।

जिसके बाद मंगलवार को ग्रामवासियों ने एकत्रित होकर यह तय किया कि पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा की जा रही मनमानियों को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अवगत कराया जाएगा। ग्राम वासियों की समस्याओं का निराकरण हो, क्योंकि सतपुड़ा ताप विद्युत गृह ने इस ग्राम के आदिवासियों की जमीन का अधिग्रहण कर उन्हें मूलभूत सुविधाएं देने का वादा किया था।

वही ग्राम के कनक मर्सकोले, शिवचरण मर्सकोले, कुंजीलाल धुर्वे, जिराती चुके, सरपंच बलसिंग, राकेश उईके ने बताया कि वर्षों पहले सतपुड़ा पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा हमारी जमीनों का अधिग्रहण किया गया अधिग्रहण करते समय वादा किया गया था। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर सड़क पानी सहित अन्य कई ऐसी मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन आज ग्राम धसेड में नदी में पानी नहीं है पानी पाइप लाइन द्वारा नदी में छोड़ने का कार्य किया जाना था। वह भी अधूरा पड़ा है और इस वक्त किसानों के सब्जी, भाजी फसलों को पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

जिसके कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धसेड़ ग्राम में जो राख बाध बनाया गया उसके कारण हवा, आंधी, तूफान राख उड़कर हमारे खेतों को काफी नुकसान होता है। और तो और यही राख हमारे घर पर जम जाती है। इसी कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है ऐसा नहीं है कि इस बारे में सतपुड़ा पावर जनरेटिंग कंपनी सारणी के अधिकारी और कर्मचारियों को अवगत नहीं कराया गया है बल्कि कई बार कहा गया परन्तु सुनवाई नहीं हुई।

जिससे हताश होकर आज ग्रामीणों ने सतपुड़ा पावर जनरेटिंग कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्णय ले लिया है। तीन-चार दिन में इस समस्याओं का निराकरण नहीं किया जाता है तो मजबूरी में ग्रामीण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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