मानव सेवा, परोपकार निस्वार्थ परमार्थ का दूसरा नाम -अनिल यादव

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मानव सेवा, परोपकार निस्वार्थ परमार्थ का दूसरा नाम -अनिल यादव


जी हां, मध्य प्रदेश के बैतूल शहर से मैं तुम्हें एक ऐसे योद्धा की कहानी से अवगत करा रहा हूं, एक ऐसे कर्मवीर से मैं आपका परिचय करवाने जा रहा हूं, जो अपने आप में त्याग परोपकार मानव सेवा परमार्थ वन्य प्राणी सेवा आदि के लिए एक जाना पहचाना नाम है, अनिल नारायण यादव।

चौंकिए मत, अपने पूरे मध्यप्रदेश में ना केवल बल्कि पूरे देश में लाडो फाउंडेशन का नाम तो सुना होगा जिनका मुख्य उद्देश्य है बेटियों के नाम से हो घर की पहचान ,को सुनिश्चित करते हुए उनके हक और अधिकारों के लिए लड़ते हुए समाज में उन्हें उनका सम्मान, मान ,अभिमान दिलवाना नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी हमेशा अपने त्याग ,बलिदान, तपस्या, संघर्ष और अपने दिल में समाज के लिए लोगों के लिए, गांव के लिए ,शहर के लिए, राज्य के लिए ,देश के लिए, कर गुजरने की जो तमन्ना अपने दिल मे सजाकर जो रखी है।

उस दिशा में आप निरंतर एकला चलो रे के सिद्धांत के आधार पर, बिना किसी दूसरे के सहयोग के, बिना किसी से कुछ लिए, अपने आप आपके कदम बेटियों के सम्मान में, बेटियों के मान मे, निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर है, हम ऐसे कर्मवीर को, ऐसे राष्ट्र के सपूत को ,जो त्याग बलिदान प्रेम भाईचारा का पुजारी है, दिल की गहराइयों से हम धन्यवाद देते हैं, आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने नारी सशक्तिकरण, बेटी -बचाओ बेटी- पढ़ाओ, बेटियों के नाम से हो घर की पहचान ,आदि क्षेत्रों में अपनी पहचान सुनिश्चित करते हुए निरंतर कर्मवीर की भांति अपने कर्तव्य मार्ग पर बेबाक तरीके से दृढ़ संकल्पित होकर मानव सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे है!

निसंदेह अनिल यादव एक ऐसे सरल, सहज, व्यवहार- कुशल, मिलनसार, साहसी, पर्यावरण प्रेमी, मानव समाज एवं पशु पक्षियों के प्रति भीषण गर्मी में उनके द्वारा किए गए सर्जनात्मक कार्यों से जो प्रेम, भाईचारा, झलकता है निसंदेह अपने आप में अद्भुत है, विलक्षण है, कोरोना के वैश्विक महामारी के दौर में लोग अपने घरों में रहकर अपनों के बीच आराम से लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अपनी जीवन चर्या को सीमित कर दिए हैं ,लोगों ने दूसरों के बारे में सोचना बंद कर दिया है, लोगों ने दूसरों के काम आना बंद कर दिया है ,लोगों ने अपनी दुनिया को सीमित कर दिया है।

सोचने विचारने की शक्ति का अंत कर दिया है लोग सोच रहे तो सिर्फ और सिर्फ अपनी दुनिया और अपनों की दुनिया में मस्त रह कर के अपने जीवन को इस मुश्किल दौर में आगे बढ़ा रहे हैं, लोग बहुत स्वार्थी हो गए हैं ,लोग अपने फायदे के लिए दूसरों का नुकसान करने में थोड़ा सा भी नहीं सोचते हैं ,लोग अपने आप में मग्न हैं, उन्हें दूसरों की चिंता नहीं है ,उन्हें चिंता नहीं है कि इस देश में इस विश्व में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो पा रही है, जिनके तन पर कपड़े नहीं है ,जिनके पास रहने के लिए छत नहीं है ,रोटी कपड़ा और मकान के लिए जो तरस रहे हैं आज के इस मुश्किल दौर में सब अपने में मगन है उन्हें दूसरों की चिंता नहीं है सिर्फ चिंता है अपनी और अपनों की…

ऐसे ही समय में जिले का एक नाम सहज ही उभरकर हमारे लबों पर आ जाता है उस व्यक्तित्व का नाम है ,उस कर्मवीर वीर योद्धा का नाम है, जिले का जाना पहचाना नाम है ,जो नारियों के सम्मान में ,लाडो फाउंडेशन है मैदान में, “बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ “अभियान एवं “बेटियों के नाम से हो- घर की पहचान” राष्ट्रव्यापी अभियान के सूत्रधार जो पूरे देश में बेटियों के नाम से नेम प्लेट लगाते हैं और बेटियों को एक नाम , मान, और सम्मान प्राप्त होता है ऐसे योद्धा का नाम है भाई अनिल नारायण यादव जिला बैतूल मध्य प्रदेश।

आज आवश्यकता है कि इंसान की बात ,इंसान माने ,व्यक्ति के सुख-दुख के सहभागी भागी बने, हर व्यक्ति अपने लिए तो जीता है लेकिन कभी-कभी हमें दूसरों के लिए जीना भी आना चाहिए, परस्वार्थ की भावना, दूसरों के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना जब हमारे दिलों में जागेगी, तब कहीं जाकर मानव को मानव से प्यार होगा, एक इंसान दूसरे इंसान के सुख-दुख का सहयोगी बनेगा, जी हां पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश फैलाने के लिए जो कटिबद्ध है -वह नाम है “अनिल नारायण यादव “मानव सेवा के क्षेत्र में हमेशा दूसरों की मदद करना दूसरों को खुश रखना और दूसरों के लिए अपने जीवन को कुर्बान कर देना यह भी हम अनिल नारायण यादव से सीखते हैं।

पशु पक्षियों के प्रति प्रेम की झलक , गौसेवा की सेवा करना उन्हें भोजन प्रदान करना पशु पक्षियों के लिए गर्मी के इस पड़ाव पर उनके लिए जल प्रबंध करना आदि अनेक परोपकार के कार्य है जिनके दर्शन हमें अनिल नारायण यादव के द्वारा किए गए कार्यों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं।

कर्तव्यपरायण ,मिलनसार लोक कल्याण ,परस्वार्थ ,प्रेम -भाईचारा त्याग, तपस्या, अपनी खुशी को दूसरों के बीच में बांटना, उनके गमों को हमारे दिलों से लगा लेना आदि यह सब मानवीय जीवन के महत्वपूर्ण आदर्श एवं सिद्धांत है बस आवश्यकता वर्तमान समय में इस बात की है कि हमें दूसरों के सुख दुख मे भागी होना चाहिए मानव को मानव से प्रेम होना चाहिए ,पशु पक्षियों के प्रति भी हमें मानवता का व्यवहार करते हुए उनकी मदद करना चाहिए उनकी भूख प्यास का प्रबंध करना चाहिए ,इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हम यह बात कह सकते हैं पूरा विश्वास है।

पूरी आस्था है यहीं वह नाम है जो अपने लिए कम दूसरों के लिए ज्यादा जीता है जो अपनों से ज्यादा दूसरों की खुशी के लिए कार्य करता है जो मानव समाज परस्वार्थ परमार्थ के कार्यों में दिन और रात लगा रहता है लोगों की सेवा करता है ,लोगों की पूजा करता है ,लोगों के सुख और दुख को बांटने का काम करता है, पशु पक्षियों के प्रति प्रेम दर्शाता है, उनकी भूख प्यास का प्रबंध करता है ,उस शख्सियत का नाम है अनिल नारायण यादव।

आलेख एवं संकलन- एस ब्राह्मणे
मानस नगर सदर बैतूल

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