June 22, 2021

आपदा को अवसर समझ रहे झोलाछाप डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से मौत को गले लगा रहे मरीज, हुई कार्यवाही

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आपदा को अवसर समझ रहे झोलाछाप डॉक्टर, खुद भी दे रहे और मेडिकल से भी दवाई लेने लिख रहे पर्चा

स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से मौत को गले लगा रहे मरीज


सारनी। कोरोना के कहर से जहां पूरा देश ख़ौफ़ज़दा है। वहीं झोलाछाप डॉक्टर इस आपदा को अवसर समझ रहे हैं। कोरोना से डरकर लोग टेस्ट कराने के बजाय झोलाछाप डॉक्टरों के शरण में जाना बेहतर समझ रहे हैं। यही वजह है कि समय पर सही उपचार नहीं मिलने से कोरोना अब कहर बरपा रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग मौन है। 

जबकि कई सामाजिक संगठन और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा। जिसके चलते सुबह से देर रात तक इन दिनों झोलाछाप डॉक्टरों के क्लिनिको पर मरीजों की भरमार उमड़ रही है।

सर्दी, खांसी, बुखार जैसे कोई भी सिम्टम्स सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना टेस्ट की सलाह दी जा रही है। लेकिन यह मरीज कोरोना टेस्ट कराने से बेहतर बिना डिग्री धारी डॉक्टरों की शरण में जाकर उपचार करा रहे हैं। ऐसा करने से मरीज और गंभीर हालत में जाता जा रहा है। साथ ही कोविड-19 से अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी संक्रमित कर रहे हैं। जो सरकार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। खासकर बैतूल जिला जो कि एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है।

यहां अक्सर झोलाछाप जिसे हम बिना डिग्री धारी डॉक्टर भी कहते हैं। यह डॉक्टर खुद ही मरीजों का उपचार करके उन्हें मूल कीमत से अधिक दामों पर दवाइयां भी उपलब्ध करा देते हैं। कुछ डॉक्टरों ने तो अपने क्लीनिक और घर को ही मेडिकल में तब्दील कर दिया है। जो दवाइयां पास में उपलब्ध नहीं है। उसे पर्चा लिखकर मेडिकल से मंगा ली जा रही हैं। झोलाछाप डॉक्टरों के इस रवैया से मेडिकल संचालक भी हैरान और परेशान हैं। लेकिन चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

यूं कहे तो कोरोना महामारी को झोलाछाप डॉक्टरों ने अवसर समझ लिया है। मरीजों से मनमुताबिक रुपए तक वसूले जा रहे हैं। लेकिन लिखित प्रमाण नहीं होने से मरीज भी तथाकथित भगवान से कुछ नहीं कह पा रहे। सिर्फ नगरीय क्षेत्र की ही बात करे तो यहां दो दर्जन से अधिक ऐसे डॉक्टर है। जिनकी डिग्री की सही जांच हो जाए तो जेल जाने से इन्हें कोई नहीं बचा सकता।

कई तो ऐसे भी डॉक्टर है जो खुद ही झोलाछाप है पर इलाज सामान्य बीमारी से लेकर ऑपरेशन तक सभी का करते हैं। एलोपैथिक दवाइयां भी ऐसे लिखते हैं जैसे एमबीबीएस डॉक्टर भी नहीं लिखते। सही समय पर इन झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं कि गई तो औधोगिक नगरी में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही रहेगा।


इनका कहना –

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मुहिम जल्द चलाएंगे। हालही में शोभापुर के पाल डॉक्टर के यहां छापा मारा था। दवाइयां जप्त की है। डॉक्टर के पास कोई डिग्री भी नहीं मिली। डॉक्टर के विरुद्ध एफआईआर के लिए बीएमओ घोड़ाडोंगरी को पत्र लिखा है।

मोनिका विश्वकर्मा तहसीलदार, घोड़ाडोंगरी।


झोलाछाप डॉक्टरों की लगातार शिकायतें मिल रही है। वर्कलोड इतना है कि कार्रवाई का समय नहीं मिल रहा। लेकिन जल्द ही पूरे क्षेत्र के बिना डिग्रीधारी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इनकी सूची भी तैयार की जा रही है। सामान्य मरीजों का कुछ भी इलाज कर रहे। दवाइयां दे रहे हैं। लोगों को भी जागरूकता का परिचय देकर झोलाछाप डॉक्टरों से बचने की आवश्यकता है।

डॉ.संजीव शर्मा, बीएमओ, घोड़ाडोंगरी


 

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