June 22, 2021

डॉक्टरो और वैज्ञानिकों द्वारा बनाए वैक्सीन पर संदेह करना भय या अज्ञानता – गायकवाड़

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डॉक्टरो और वैज्ञानिकों द्वारा बनाए वैक्सीन पर संदेह करना भय या अज्ञानता – गायकवाड़

प्रकृति को छेड़छाड़ फिर प्रकृति पर ही विश्वास


कोरोना की दूसरी लहर ने आयुर्वेद के भारत को भी कमजोर कर दिया है कोरोण संक्रमण के कारण आज आयुर्वेद का भारत देश धीरे-धीरे तरह से कोरोना महामारी की चपेट में आता दिखाई दे रहा है मनुष्य आयुर्वेद को जिस तरह नजरअंदाज करता गया यह उसी का ही परिणाम तो नहीं।

हमारे भारत देश के कई गांव में कस्बों में और यहां तक कि कई बड़े शहरों में भी कई लोग ऐसे भी हैं जोकि कोरोना संक्रमण के भाई के कारण अपना और अपने परिवार का घर पर ही थोड़ी बहुत दवाइयों के उपयोग से कर रहा है लेकिन अस्पतालों में जाकर कोरोना की जांच सैंपल देने में लगातार हो रही मौतों के भय से भयभीत होकर और कुछ तो अज्ञानता वस नहीं करवा पा रहे है।

सदियों पूर्व भारतवर्ष में ऐसी कई महामारी आकर निकल गई और भारत का मानव जीवन पुनः प्रकृति और उसके आयुर्वेद अर्ग ले बड़ी बड़ी महामारी पर विजय पाने में सफल यह है वेद ऋषि जो आज वर्तमान में बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के नाम से राष्ट्रहित और जनहित के लिए दिन रात अनुसंधान में प्रयोग कर कोरो ना संक्रमण पर विजय पाने के लिए प्रयासरत और परिश्रमी होकर निरंतर लगे हुए हैं।

जब भारतवर्ष वैदिक काल से आयुर्वेद पर निर्भर होकर बड़ी बड़ी बीमारियों को दूर करने में सफल हुआ है फिर दिन रात प्रयास कर रहे देश के विद्वान वैज्ञानिकों डॉक्टरों अनुसंधानकर्ताओं पर भारत की यही जनता को पूर्ण विश्वास दिलाने में क्यों इतनी जद्दोजहद करनी पड़ रही है कोराना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप और दर-दर भटकती जनता के लिए बनाई गई वैक्सिंग को बिना संदेह के क्यों लगाने में हिचकिचाहट और घबरा रहे भारतवासी।

कोरोना महामारी के प्रथम दौर में जब कोराना वैक्सीन बनाने में पूरा विश्व प्रयासरत था और किसी ने भी वैक्सीन बनाने में सफलता प्राप्त नहीं की थी ऐसे समय में भारत सहित पूरा विश्व कोराेनावैक्सीन बनाने के लिए प्रयासरत होकर जनमानस को बचाने के लिए सभी वैज्ञानिक डॉक्टर वैक्सीन की खोज में लगे हुए थे लेकिन जब वर्तमान परिदृश्य में कोरोना वैक्सीन बनाने में हमारा भारत हमारे विद्वान वैज्ञानिक अनुसंधान कर्ताओं द्वारा सफल हो चुका हैं।

तब भारत देश की आम जनता संक्रमण का टीका लगाने के लिए भयभीत और गलतफहमी के शिकार हो रहे हैं इसका मुख्य कारण गांव में बसा ग्रामीण है जिनके मन में आज भी कोरोना वैक्सीन को लेकर अज्ञानता विद्यमान है साथ ही बढ़ते मौत के आंकड़ों के कारण लोगों में भय का माहौल भी वैक्सिंग नहीं लगाने का मुख्य कारण ग्रामीण अंचलों में देखा सुना जा सकता है।

आवश्यकता है कि सरकार द्वारा जिस तरह संक्रमण काल में लगातार लोगों के जनहित के लिए व्यवस्था की जा रही है वैसे ही कोरोना वैक्सीन को लेकर एक जनजागरूक अभियान भी लगातार गांव गांव वार्ड वार्ड तक जाकर चलाया जाना चाहिए ताकि कोरोना वैक्सीन को लेकर अज्ञानता को समाप्त किया जा सके और भारत कोराेना मुक्त भारत बनने में सफलता प्राप्त कर ले।

भारत की बढ़ती जनसंख्या और आधुनिकरण के कारण गांव से शहरों की ओर पलायन और इस महामारी में पुनरावृति शहरों से गांव की ओर पलायन को स्पष्ट रूप से देखा गया है जो कि यह भी दर्शाता है कि प्रकृति अपनी और पुणे मानव जीवन को आकर्षित कर रहा है मनुष्य भी निरंतर आज प्रकृति की उन औषधियों को ढूंढता उपयोगकर्ता दिखाई दे रहा है।

जिन्हें कभी मनुष्य ने ही नष्ट कर दिया था आज जो लोग शहरों में बड़े आनंद से अपने परिवार के साथ बड़े बड़े व्यापार उद्योग कर रहे हैं आज का परिदृश्य ये दिखाता है कि वे लोग गांव में जंगलों में बने अपने खेत खलियान में शुद्ध वातावरण में आकर जीवन जीना पसंद कर रहे हैं और वही अपने परिवार को सुरक्षित महसूस करते देखे जा सकते हैं। पुराने समय में और आज भी कई गांव में क्या देखा जा सकता है कि लोग घर के आंगन में खेतों में नीम औषधि और छायादार वृक्षों को लगा रहे हैं।

क्यों ना हर व्यक्ति अपने घर में एक नीम ,पीपल ,बरगद , गिलोय , के वृक्ष लगाने का संकल्प ले और अपने परिवार की रक्षा करने के लिए संजीवनी स्वरूप प्रकृति की शुद्ध ऑक्सीजन लेकर जीवन को निरंतर गति प्रदान करता चले ताकि उसे भविष्य में कभी कृत्रिम ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता महसूस ना हो।

भारत विश्व का ऐसा देश है जहां सदियों से प्राकृतिक संसाधनों और प्रकृति की अनमोल औषधियों की खोज करते हुए बड़ी-बड़ी बीमारियों पर विजय प्राप्त करने वाला देश सिद्ध हुआ है प्राकृतिक औषधि योग अभ्यास संगीत सकारात्मक मनोदशा और आत्मविश्वास के साथ मनुष्य हर बीमारीयो से लड़कर स्वस्थ हो सकता है और इन्हीं से मनुष्य सदैव निरोगी होकर स्वस्थ रह सकता है प्रकृति ने इस को रोना काल में मनुष्य जाति को यह भली भाती सीखा दिया है।

इसलिए वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भारत और विश्व के महान वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन को लगाने में किंचित शंका और भय नहीं होना चाहिए साथ ही शासन प्रशासन को सहयोग करते हुये अपने और अपनों के लिए जन जागरूकता आत्म में विश्वास के साथ हमें इस हमारी से लड़ कर उसे हराना होगा।

विजय गायकवाड़ (अधिवक्ता) समाजसेवी

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