रक्तदाताओं को ही रक्त की दरकार

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रक्तदाताओं को ही रक्त की दरकार


बैतूल। जहाँ हमने न्यूज़ पड़ी की हमारे बैतूल जिले का रक्तकोष प्रदेश में अव्वल आया है, उसे देखकर मन बहुत खुश हुआ की हमारे जिले के रक्तदाताओं, रक्तदान समितियों की बदौलत और निस्वार्थ सेवाभावी रक्त मित्रो की बदौलत ऐसे रक्तदान शिविर आयोजित हो रहे है और जिला रक्तकोष प्रदेश में अव्वल आ रहा है।

लेकिन इस बात को देख कर मन विचलित हो गया की कल जब एक नियमित रक्तदाता जिन्होंने गत कुछ दिन पूर्व ही एक कैम्प में स्वयं भी रक्तदान किया साथ ही अपने कुछ मित्रों के से भी जिला चिकित्सालय में रक्तदान कराया।

आज उनके परिवार में ही रक्त की आवश्यकता पड़ने पर रक्तकोष के कर्मचारियों द्वारा यह कह कर मना कर दिया गया, की आप एक्सचेंज में लाये तदोपरांत ही आपको रक्त दिया जाएगा। जब मरीज के परिजनों द्वारा बताया गया कि वह स्वयं कैम्प में रक्तदान कर चुके है तो भी रक्तकोष द्वारा उन्हें साफ साफ यह कह कर मना कर दिया गया कि हम नही देगे जब तक एक्सचेंज नही दिया जाएगा।

परिवार के परिजनों द्वारा इस परिस्थिति में रक्तदान समिति से निवेदन कर रक्त की व्यवस्था तो करवा ली गयी लेकिन उनका मन यह कहते हुए व्यथित हो उठा कि जब हम नियमित रक्तदाता है और निरंतर रक्तदान कर रहे है।
तो हमे आखिर क्यों रक्त के लिए मना किया जा रहा है।

अभी 8 मई के दिन कैम्प में रक्तदान करने वाले रक्तदाता के परिवार को जब रक्त की आवस्यकता हुई, तब जिला चिकित्सालय मैं उनके परिजन से एक्सचेंज की बात कह कर वापस कर दिया गया। ऐसे में संस्था व रक्तदाता के हौसले ना टूटे तब हमारी अन्य समिति के सदस्य आदर्श अग्निहोत्री उदित सोनी जी द्वारा एक्शन स्वरूप रक्त डोनेट किया गया और परिवार के सदस्य की जान बचाई गई।

आज जब बैतूल जिला रक्तदान में मध्यप्रदेश में सबसे ऊपर है तब भी एक डोनर के परिवार को इस तरह परेशान होना संदेहात्मक प्रतीत होता है रक्त कोष में कहा गया है कि किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल में जब भी रक्त जाएगा तो उन्हें एक्सचेंज लगेगा। जबकि जो भी डोनर कैंप में डोनेट करते हैं उनके परिजन प्राइवेट अस्पताल में ही एडमिट होते हैं ऐसे में वह खुद तो 3 महीने डोनेट नहीं कर सकता तब उसके सामने सबसे बड़ी समस्या हो जाती है।

रक्तदाता के परिवार को रक्त की जरूरत होने पर वह रक्त कहां से लाये और अधिकतर समय जब समिति के सदस्यों को रक्त की आवश्यकता होती है रक्त कोष प्रभारी उनका कॉल अटेंड नहीं करते या रक्तपूर्ति में मेसिज को अंधिस्त कर्मचारियों को नही कहते। तत्पश्चात समिति के सदस्यों द्वारा अन्य समिति के सहयोग से रक्त की पूर्ति करवानी होती है ताकि एक रक्तदाता के परिवार के सदस्य की जान बचाई जा सके।

रक्तमित्र विकास मिश्रा का कहना है कि इसके पूर्व आमला से सबसे अधिक रक्तदान करने वाली समितियों की पूर्ति उनके द्वारा की गई है, ताकि रक्तदाता खुद को ठगा महसूस न करें, एवम पूर्व में बहुत बार रक्तकोष के उस मुद्दे को लेकर आवाज उठा चुके है साथ में सारी समितियो ने एक साथ 2 वर्ष पूर्व हड़ताल भी की थी किन्तु समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

इस कारण हमारे जिले में रक्तदान में पिछले 2 सालों में काफी गिरावट हुई है एक समय हमारे रक्तकोष का सालाना कलेक्सन 10 हजार पहुँच जाता है विगत 2 वर्षों में 7 हजार पर जा कर आंकड़ा रुक जा रहा है।

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