June 22, 2021

कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने संवाद को बनाया प्रमुख अस्त्र, काउंसलर की भूमिका निभाई मुख्यमंत्री श्री चौहान ने

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कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने संवाद को बनाया प्रमुख अस्त्र, काउंसलर की भूमिका निभाई मुख्यमंत्री श्री चौहान ने


भोपाल। महामारी के दौर में प्रदेश में ही नहीं देश में भी फिजिकल डिस्टेंस संक्रमण की चेन तोड़ने का प्रमुख आधार थी तब मध्यप्रदेश में संवाद के जरिये कोरोना महामारी के संक्रमण की चेन को तोड़ने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दो गज की दूरी-मास्क है जरूरी, मास्क नहीं-तो सामान नहीं, मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा जैसे प्रभावशाली संदेश के साथ कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने सभी वर्गों से संवाद को प्रमुख अस्त्र बनाया।

यह भी सही है कि परिवार का मुखिया हो या प्रदेश का मुखिया वह अपने आचरण से ही दूसरों को प्रेरित कर सकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस कसौटी पर भी अपने को खरा उतारा। समाज का शायद ही ऐसा कोई वर्ग छूटा हो जिनसे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संवाद न किया हो। उन्होंने सर्वप्रथम स्वास्थ्य आग्रह के माध्यम से प्रदेश की जनता को यह संदेश दिया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये शासन-प्रशासन के साथ आमजन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

इसी क्रम में उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर जनता को जागरूक करने के लिये सीधा संवाद कर कोरोना संक्रमण से बचाव के उपाय भी बताये। संचार की आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सोशल मीडिया के द्वारा वर्चुअली कार्यक्रम आयोजित कर अधिकांश वर्गों से संवाद का क्रम बनाये रखा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संवाद का जो क्रम अप्रैल माह से शुरू किया उसमें सांसद, विधायक, शहरी क्षेत्र में महापौर, अध्यक्ष और पार्षद, ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों के जन-प्रतिनिधियों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ, महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों, धर्म गुरूओं, समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों, व्यापारियों, शहरी एवं ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर्स, किसान भाइयों, संबल योजना के हितग्राहियों, तेंदूपत्ता संग्राहक, विशेष पिछड़ी जनजाति सहरिया, बैगा और भारिया की महिलाओं, जिला-तहसील और ग्राम स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट के समूहों, म.प्र. जन-अभियान परिषद के जिला समन्वयकों और मैदानी अमले के साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वेच्छा से कोरोना वॉलंटियर्स बने कार्यकर्ताओं से संक्रमण की चेन को तोडऩे के लिये प्रभावी और प्रेरक संवाद किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान की इस मुहिम की खूबी यह भी रही कि उन्होंने न केवल संवाद के दौरान कोरोना की दूसरी लहर की विभीषिका से अवगत करवाया, बल्कि एक सजग अभिभावक और परिवार के बड़े बुजुर्ग के रूप में महामारी से बचाव के लिये प्रेरित भी किया। इस तरह से उन्होंने महामारी से लोगों को डराया नहीं।

उन्होंने बचाव के लिये न केवल लोगों को तैयार किया बल्कि उन्हें बचाव के तरीके भी उन्हीं की उनकी भाषा में समझाये। इसी का नतीजा था कि मध्यप्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर पर उम्मीद से काफी पहले काबू पाने में सरकार सफल रही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने राजनैतिक कार्यक्रमों को तो स्थगित किया ही साथ ही अधिकांश प्रशासनिक कवायद भी उन्होंने वर्चुअली ही की।

इस तरह कोविड एप्रोपिएट बिहेवियर का पालन करने के उद्देश्य से वर्चुअली काम काज को प्रमुखता देने की प्रेरणा भी मुख्यमंत्री श्री चौहान अपने कार्यों के जरिये प्रदेशवासियों खासतौर से शासन-प्रशासन के लोगों और समाज के विभिन्न वर्गों को देने में सफल रहे हैं।

अप्रैल और मई 2021 की पूरी अवधि इस बात की गवाह है कि प्रदेश में सारे प्रशासनिक काम बदस्तूर सीमित अमले के साथ जारी रहे। टोटल लॉकडाउन की जगह पर कोरोना कर्फ्यू जैसी नई और कारगर व्यवस्था मध्यप्रदेश में लागू रही। इस व्यवस्था का उजला पहलू यह रहा कि यह कर्फ्यू सरकार द्वारा थोपा हुआ नहीं होकर जन-स्फूर्त या यूं कहें कि स्व-स्फूर्त था। यहीं कारण रहा कि लॉकडाउन की तुलना में कोरोना कर्फ्यू महामारी की लड़ाई में ज्यादा उपयोगी और परिणामकारी रहा।

कोरोना कर्फ्यू ने महामारी से प्रदेश की लड़ाई में लोगों को अपनी भूमिका अदा करने का मौका भी दिया। राज्य, जिला, गाँव और छोटे नगरों में वार्ड स्तर पर बनी क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियाँ और उनके द्वारा कोरोना की दूसरी लहर के नियंत्रण में निभाई गई भूमिका और बढ़-चढ़ कर किये गये कार्य, सरकार के साथ समाज के खड़े होने के आने वाले कई वर्षो तक उदाहरण बने रहेंगे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की जन-भागीदारी रणनीति ने मध्यप्रदेश को कोरोना संक्रमण से मुक्ति दिलाने में अहम रोल अदा किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तरह से लोगों ने कोरोना संक्रमण की चेन को तोडऩे में भागीदारी सुनिश्चित की वह पूरे देश में सुर्खियों में रही। यहाँ तक कि कई प्रान्तों ने इसे अपनाया भी है और केन्द्र सरकार ने सराहना भी की है।

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