July 23, 2021

डॉ. कृष्णा मोदी जन्मदिन विशेष – कोयला मजदूरों के लिए लड़ते रहे है

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डॉ. कृष्णा मोदी जन्मदिन विशेष – कोयला मजदूरों के लिए लड़ते रहे है

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कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ जाने के बाद 1953 से पार्टी के मजदूर यूनियन “एटक” के साथ कार्य प्रारंभ किया। 1954 में एटक यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव कॉम. एस.ए .दांगे ने कॉम मोदी को मध्यप्रदेश कि मैग्नेसे और कोल माइन्स का सहप्रभारी बनाया था । 1958 में ही एटक कोल फेडरेशन (इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन) की स्थापना हुई थी डॉ मोदी इसके संस्थापक सदस्य भी है।

1959 में कॉम मोदी ने इंटर कास्ट शादी कर भिलाई में बस गए थे और वहां नंदिनी माइन्स क्षेत्र में एटक यूनियन की स्थापना कर कोयला मज़दूरों के लिए लड़ना शुरू किया। श्रीमती शैल नेल्सन मोदी जी की पोस्टिंग पाथाखेडा क्षेत्र में हो गई जिस वजह से कॉम मोदी यहां आकर बस गए। मजदूर वर्ग के प्रतिनिष्ठा और उनके उत्थान के लिए पूर्ण क्षमता व समर्पण के साथ 67 वर्षों से कार्य कर रहे हैं।

शिवम् बताते है कि कॉम. मोदी वर्ष 1966 में डब्लू.सी.एल में सामान्य मजदूर के रूप में नौकरी प्रारंभ की और वर्ष 1990 में सीनियर सिविल सुपरवाईजर के रूप में रिटायर्ड़ हुये। क्षेत्र में 1965 से आजतक मजदूरों के लिए हर छोटे बड़े आंदोलन का नेतृत्व कर चुके कॉम. मोदी ने पाथाखेड़ा,कन्हान,पेंच क्षेत्र मे एटक यूनियन की स्थापना कॉम. पी के ठाकुर, भोपाल से विधायक शेरे भोपाल शाकिर अली खान, एस के सान्याल, ए बी बर्धन के साथ मिलकर किया था।

डॉ मोदी बताते हैं कि एक जमाना था जब कोयला खदानों मे उत्तरप्रदेश- बिहार – पश्चिम बंगाल के मजदूरों को बहाली करके लाया जाता था और उनसे गुलामों की तरह कार्य लिया जाता था। उस समय ना कोई वेतन फिक्स था ना कोई सामाजिक सहूलियत मिलती थी।

श्रमिको को एकता की वजह से कोयला श्रमिको के लिए 1972 तक 3 कमेटी का निर्माण हुआ तथा 1972-73 राष्ट्रीयकरण के पश्चात आज द्विपक्षय वेतन कमेटी एवम् सामाजिक सहूलियत मिलना प्राप्त हुई है। डॉ मोदी एटक यूनियन डब्ल्यू.सी.एल कोऑर्डिनेशन कमेटी के 20 वर्षो तक चेयरमैन रहे चुके है।

नागपुर के पूर्व जनरल मैनेजर ऑफ इंडस्ट्रेल रिलेशन (जी.एम.आई.आर) बी एल नंदवाना ने बताया कि मोदी जी की कार्य शैली का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है कि उनके द्वारा सन् 1978 में 28 दिन कि गई भूख हड़ताल जिसमे 12000 मज़दूरों ने कोयला डिस्पैच बन्द कर दिया था।

तब पाथाखेडा क्षेत्र के सभी मजदूरों को एक साथ बोनस और रविवार का दुगना पैसा प्रबंध को देना पड़ा था। इस हड़ताल से मोदी जी ने स्वयं को कोल इंडिया का सबसे लोकप्रिय श्रमिक नेता के रूप में स्थापित किया था।

लेख – शिवम मोदी

Brajkishore Bhardwaj

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