वसुधैव कुटुंबकम् हमारी संस्कृति है – मनोरमा मिश्रा

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वसुधैव कुटुंबकम् हमारी संस्कृति है – मनोरमा मिश्रा

(साहित्य संगोष्ठी की श्रृंखला भाग – पाँच)


सारनी, (ब्यूरो)। संस्कार भारती मध्यभारत प्रांत भोपाल महानगर इकाई द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्य संगोष्ठी के भाग – पाँच का शुभारंभ डॉ.रूपाली गोखले, ग्वालियर द्वारा प्रस्तुत संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। साहित्यिक कृतियों के परिचय की श्रृंखला में प्रथम परिचय के रूप में मधुलिका श्रीवास्तव ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार मोहन राकेश की रचना “आधे अधूरे नाटक ” का वाचन एवं द्वितीय पुस्तक ” रंगों में रंग प्रेम रंग ” रचनाकार मोहन सपरा की पुस्तक का वाचन उषा जायसवाल ने किया।

संस्कार भारती की अखिल भारतीय मातृ शक्ति संयोजिका डॉ. मनोरमा मिश्रा ने सरल शब्दों में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों को मानव कल्याण की भावना वाला बताया। वसुधैव कुटुंबकम की हमारी सनातन संस्कृति है। शिव पुराण में शिव , माता गौरी, कार्तिकेय, गणेश जी सुंदर वर्णन किया है, सभी में कई प्रकार की असमानता है फिर भी सब शांति से रहते हैं। चारों वेदों को संक्षिप्त में सरल भाषा में बताया है। हमारे वेदों और ग्रंथों में अथाह ज्ञान का भंडार है।

तभी तो तुलसीदास जी ने अपनी बात को एक चौपाई में रख दी — परहित सरिस धर्म नहीं भाई-मनोरमा जी ने सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद और ऋग्वेद की चर्चा करते हुए बताया कि वेदों के मंत्रों में महामृत्युंजय मंत्र,।गायत्री मंत्र को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों एवं डॉक्टरों ने स्वीकार किया है। मनोरमा मिश्रा ने दोनों पुस्तकों की प्रस्तुति की सराहना की। आपने नये रचनाकारो से नरेन्द्र कोहली के साहित्य का पठन पाठन करने का भी आग्रह किया।

आधुनिक युग के स्वामी विवेकानंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, मुंशी प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन आवश्यक है। कार्यक्रम की प्रस्तावना संस्कार भारती मध्य भारत प्रान्त की प्रान्तीय साहित्य विधा प्रमुख कुमकुम गुप्ता ने देते हुए बताया कि आज संस्कार भारती ललित कलाओं की अखिल भारतीय संस्था है जिसका उद्देश्य कला और साहित्य के माध्यम से राष्ट्र भाव का जागरण करना है। कोरोना काल में भी संस्कार एवं संस्कृति का मंथन चलता रहे।

इसी दृष्टि से यह ऑनलाइन कार्यक्रम नवोदित साहित्यकारों के लिए एक अवसर है। ऑनलाइन कार्यक्रम का संचालन दुर्गा मिश्रा भोपाल ने किया। संस्कार भारती मध्य भारत प्रांत की मंत्री संगठन अनिता करकरे ने बताया कि संस्कार भारती द्वारा नवोदित रचनाकारों में लेखन व वक्तृत्व कला-कौशल को विकसित करने की दृष्टि से साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।

जिसमें पुस्तक परिचय और वरिष्ठ साहित्यकारों का मार्गदर्शन प्राप्त होता है। कला एवं साहित्य की यह अखिल भारतीय संस्था है। नवोदित साहित्यकारों को अधिक से अधिक जुड़कर समाज के हित में लेखन कार्य करना चाहिए। जिससे समाज में नैतिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

इस अवसर पर भोपाल से प्रेमचंद गुप्ता, डाक्टर राम वल्लभ आचार्य, अनिता देशपांडे, डाली पंथी, सारनी ईकाई अध्यक्ष अंबादास सूने, पुष्पलता बारंगे, अरूणा शर्मा, वीणा व्यास, स्वाती वर्तक, नलिनी पटेल, डाक्टर रमा सिंह गुना सहित अनेक साहित्यिक प्रेमी आन लाइन संगोष्ठी में उपस्थित थे।

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