शब्द जब छपता है तो पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन बन जाता है – मोहन नागर

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शब्द जब छपता है तो पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन बन जाता है – मोहन नागर

साझा संकलन कोविड-19 आपदा में आपबीती का गरिमामय विमोचन


बैतूल। कोराना काल जैसे दिन भगवान किसी भी समाज को किसी भी देश को दोबाना न दिखाए। जब मौत सामने खड़ी थी तब लोग सेवा जुटे तो कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपने ही परिजनों का साथ छोड़ दिया था। लोगों में अवसाद की स्थिति थी, लेकिन सभी ने एक दूसरे का सहयोग भी किया, संघर्ष किया। शब्द या समस्याएं जब पुरानी हो जाती है, लेकिन शब्द जब छप जाता है तो पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करता है।

उक्त उद्गार पर्यावरणविद, लेखक एवं भारतभारती आवासीय विद्यालय के सचिव मोहन नागर ने बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति राष्ट्र रक्षा मिशन एवं केसर बाग परिवार द्वारा राष्ट्र ध्वज दिवस के अवसर पर केसर बाग आयोजित सांझा संकलन कोविड-19 आपदा में आपबीती के विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता कही।

कार्यक्रम में आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे, एडीएम जेपी सचान, एएसपी श्रद्धा जोशी, चिंतक विचारक एवं लेखक प्रवीण गुगनानी, डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे, वरिष्ठ पत्रकार नवनीत गर्ग संस्था के पदाधिकारी, सहयोगी एवं संकलन में अपने आलेख, आपबीती और चुनौतियों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने वाले कलमकार मौजूद रहे। राष्ट्र ध्वज अंगीकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं भारत माता के पूजन के साथ अतिथियों ने की।

इस अवसर पर बर्ड्स ऑफ बैतूल टीम ने केक काटकर एवं संस्था अध्यक्ष गौरी बालापुरे, सचिव भारत पदम, सह सचिव ईश्वर सोनी, नितिन वागद्रे, सशक्त सुरक्षा बैंक संयोजक नीलम वागद्रे, संगीता अवस्थी सदस्य कल्पना तरुड़कर, मोनिका वागद्रे व संरक्षक मनीष दीक्षित ने आगंतुकों एवं अतिथियों को तिरंगे के बैच लगाए।

जिले के प्रसिद्ध गायक कलाकार एवं समाजसेवी धीरज बोथरा, डैनी सावन कुमार, डॉ विनय सिंह चौहान ने गीतो से कार्यक्रम में समां बांधा। वरिष्ठ पत्रकार रिशु नायडू ने कार्यक्रम का संचालन किया, आभार सशक्त सुरक्षा बैंक की संयोजक नीलम वागद्रे ने व्यक्त किया।

110 आलेख 224 पृष्ठ का संकलन बैतूल को समर्पित
कार्यक्रम को आगे संबोधित करते हुए श्री नागर ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान की जटिल परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होनें बताया कि हर दूसरे-चौथे दिन आपदा प्रबंधन की बैठक कलेक्टर की मौजूदगी में होती थी। प्रशासनिक, स्वास्थ्य, पुलिस, सामाजिक एवं राजनीतिक हर वर्ग ने इस आपदा से निपटने में अपना महत्वपूर्ण रोल निभाया है।

आपदा में आपबीती जैसी पुस्तक पूरे देश में कहीं नहीं छपी होगी उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में जिसने सहा है उन्होंने लिखा है, प्रसव पीड़ा के बाद जिस तरह बच्चे का जन्म होता है, उसी तरह आपदा के बाद आपदा में आपबीती अस्तित्व में आई है।

पुस्तक के स्वरुप की जानकारी देते हुए संपादक गौरी पदम ने बताया कि संकलन के ग्राफिक्स एवं डिजाईनिंग के वरिष्ठ पत्रकार अनिल गोयर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।आवरण में कोसमी जलाशय का चित्र है जो कार्टूनिष्ट एवं चित्रकार द्वारा लिया गया है। 110 लेख संकलन में शामिल है। 224 पेज का संकलन मात्र एक माह में तैयार हुआ।

संकलन में जिला प्रशासन की चुनौतियों और कोविड नियंत्रण के लिये किये गये प्रयास के संदर्भ में कलेक्टर अमनवीर सिंह, सीएमएचओ डॉ ए के तिवारी, कोरोना नोडल अधिकारी डॉ सौरभ राठौर, टीकाकरण अधिकारी डॉ अरविंद भट्ट, ज्योतिषी पण्डित डॉ कांत दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार मयंक भार्गव सहित प्रबुद्ध जनों आलेख शामिल हैं। स्प्रेन्डिंग इस्माईल ग्रुप के संस्थापक अक्षय तातेड़, सन्दीप कौशिक,मोनू सोनकपुरिया का संकलन के प्रकाशन में सहयोग प्राप्त हुआ।यह संकलन पूरे बैतूल को समर्पित है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली से पढ़े कई नाटकों की वर्कशॉप कर चुके टीवी सीरियल एवं फिल्मों में काम कर चुके कलाकार अविनाश देशपांडे, प्रतिध्वनि संस्था के सचिव वीरेन्द्र सिंह ठाकुर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दीप साहू, समाजसेवी परमजीत सिंह बग्गा, हेमंत पगारिया, धीरज हिराणी, मनोज विश्वकर्मा आमला, अभिमन्यू श्रीवास्तव, एसआई कविता नागवंशी, योग प्रशिक्षक निहारिका भावसार, लेखिका जाह़नवी आहूजा, सायबर सेल प्रभारी राजेन्द्र राजवंशी, पूर्व सैनिक विजय नरवरे, संजय नरवरे, रवि त्रिपाठी, राजेश गोठी सहित अन्य प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे। केसर बाग के संचालक अतीत पवार के सहयोग की वजह से झमाझम बारिश में भी कार्यक्रम निर्विघ्न सम्पन्न हुआ।

दोबारा कभी ऐसा भयानक मंजर न देखे

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने कहा कि कोरोना का जो भयानक मंजर हमने देखा वह हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो जाए, दोबारा कभी ऐसा भयानक मंजर हम न देखे। जब पुस्तक के पन्ने पलटाये तो उस वक्त की खौफनाक यादे सामने आ गई।

उन्होनें कहा कि जब दूसरी लहर सामने तो उन्होंने भी अपने अस्पताल को कोविड केयर सेंटर में बदल दिया था। विषम परिस्थितियों में किए काम का जिक्र भी उन्होंने किया। एडीएम जेपी सचान ने आपदा में आपबीती संकलन को बैतूल के लिए उपयोगी बताया।

उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज हर वर्ग के अनुभव का प्रतिनिधित्व कर रहा है। डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने कहा कि एक-एक व्यक्ति यहां कीमती है, ये आपदा में आपबीती महज एक किताब नहीं है, यह बैतूल जिले का ऐसा पन्ना है जिसने हम सभी को एक मंच पर एक छत के नीचे लाया। बैतूल की आवाज इस किताब में लिखी हुई है। यह मप्र में ही नहीं पूरे भारत में पहली पहल है।

ईश्वर तीसरा दौर न लाये

एएसपी श्रद्धा जोशी ने बताया कि ज्वानिंग से लेकर अब तक उनकी कोराना काल की ही वर्किंग रही है। मार्च में जब पहला लॉकडाउन लगा था तब से अलग-अलग चुनौतिया आई जिसका सभी ने सामना करने का प्रयास किया। सभी ने एक भाव से काम किया है पुलिस, प्रशासन, डॉक्टर और आम नागरिक भी काम कर रहे। उन्होंने कहा कि थोडी सी सावधानी रखने की जरुरत है। दूसरी लहर में लापरवाही के दुष्परिणाम सामने आए।

वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत गर्ग ने भी कहा कि किताब में उन्होंने दो लाईन यह लिखी है….सिर्फ वो गिने गए कोरोना में जो मर गए शरीर से, उनकी गिनती अभी बाकी है जो गिर गए जमीर से। श्री गर्ग ने कहा कि व्यापक एवं राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो ऐसे बहोत लोग है जिन्होंने आपदा को अवसर बनाया है।

बात समय की है, इच्छाशक्ति और संकल्प की है। आदमी अवसर का लाभ न उठाये लोगों को सहयोग दे। इस दौर में जितना डॉक्टर पुलिस का रोल था उतना मीडिया का भी रोल था। कुछ मीडिया संस्थानों ने कोरोना की बुरी से बुरी खबर चलाई उसका नुकसान कोरोना पीड़ितों के परिजनों को हुआ। उन्होंने कहा कि बस इतना कहना चाहूंगा कि ईश्वर तीसरा दौर न लाये। डॉ रजनीश शर्मा ने कहा कि जब भी नेक काम करने का मौका मिले अपनी झोली में जरुर नेकी रख लेना उन्होंने भी वहीं किया। 

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