13 से 23 सितम्बर तक होगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन

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13 से 23 सितम्बर तक होगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन


बैतूल। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि दिनांक 13 से 23 सितम्बर 2021तक राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा । 1 से 19 वर्षीय समस्त बच्चों का कृमिनाशन करना राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का उद्देश्य है। इस वर्ष कार्यक्रम का आयोजन समुदाय आधारित गृह भ्रमण रणनीति के माध्यम से किया जायेगा।

कृमि मनुष्य की आंत में रहते हैं और जीवित रहने के लिये मानव शरीर के जरूरी पोषक तत्व को खाते हैं। कृमि के प्रकारों में हुक, व्हिप और राउंड कृमि सम्मिलित हैं। कृमि संक्रमण के लक्षणों में दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख न लगना शामिल हैं।

हल्के संक्रमण वाले बच्चों में आमतौर पर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन बच्चों में कृमि की मात्रा जितनी अधिक होगी, संक्रमित व्यक्ति के लक्षण उतने ही अधिक होंगे। संक्रमित बच्चे के शौच में कृमि के अण्डे होते हैं, खुले में शौच करने से ये अण्डे मिट्टी में मिल जाते हैं और विकसित होते हैं। बच्चों के नंगे पैर चलने से, गंदे हाथों से खाना खाने से या फिर बिना ढका हुआ भोजन खाने से एवं लार्वा के सम्पर्क में आने से बच्चे संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित बच्चों में कृमि के अण्डे व लार्वा रहते हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य को हानि पहुॅचाते हैं।

कृमि संक्रमण के बचाव के तरीकों को अपनाकर इनसे बचा जा सकता है, इनमें नाखून साफ व छोटे रखना, हमेशा साफ पानी पीना, पानी को ढक कर रखना, साफ पानी से फल व सब्जियां धोना, समय समय पर अपने हाथ साबुन व पानी से धोना (विशेषकर खाने से पहले व शौच के बाद) आस पास सफाई रखना, जूते पहनना, खुले में शौच न करना तथा हमेशा शौचालय का उपयोग करना शामिल हैं। कृमि संक्रमण से मुक्ति के लिये संक्रमण निवारण हेतु कृमिनाशन की गोली एल्बेंडाजॉल का सेवन आवश्यक है। एल्बेंडाजॉल की गोली का सेवन सुरक्षित और लाभकारी है।

समुदाय में कृमि की व्यापकता में कमी, स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार, रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि, एनीमिया का नियंत्रण, सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार तथा वयस्क होने पर काम करने की क्षमता और आय में बढोत्तरी आदि कृमिनाशन के लाभों में सम्मिलित हैं।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम 13 सितम्बर से 23 सितम्बर 2021 तक चलाया जायेगा। 1 से 19 वर्ष के बच्चे और किशोरी बालक बालिकाऐं कार्यक्रम के हितग्राही समूह में शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत् बच्चों व किशोर किशोरियों का कृमिनाशन कर मिट्टी जनित कृमि संक्रमण की रोकथाम सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व पोषण स्तर में वृद्धि करना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ता, आशा पर्यवेक्षक, ए.एन.एम. तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर 1 से 19 वर्ष के हितग्राहियों का अभिभावकों की उपस्थिति में कृमिनाशन किया जायेगा। खुले हुये विद्यालयों में भ्रमण कर शिक्षकों के सहयोग से उपस्थित समस्त हितग्राहियों को एल्बेंडाजॉल की गोली का सेवन कराया जायेगा। ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवसों के आयोजन के दौरान उपस्थित हितग्राहियों का कृमिनाशन किया जायेगा।

कृमिनाशन गतिविधि का आयोजन कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पालन करते हुये किया जायेगा। मैदानी कार्यकर्ताओं द्वारा कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुये फेस कवर व मास्क का प्रयोग अनिवार्यतः किया जायेगा। कार्यकर्ताओं द्वारा अपने हाथों को अच्छी तरह से साबुन व साफ पानी से अथवा सेनेटाइजर से साफ करने के उपरांत ही बच्चों को ऐल्बेंडाजॉल टेबलेट का सेवन कराया जाना है। गोली खिलाने से पूर्व कोविड लक्षण के बारे में जानकारी ली जाना है।

मैदानी कार्यकर्ताओं द्वारा ही ऐल्बेंडाजॉल गोली का सेवन कराया जाना है। बच्चे की अनुपस्थिति में अभिभावक या पालक को गोली खिलाने नहीं दी जाना है। प्रतिकूल घटना की जानकारी तत्काल नोडल अधिकारी को दी जाना है।

एल्बेंडाजोल गोली का सेवन निम्नानुसार कराया जाना है- 1 से 2 वर्ष के बच्चों को ऐल्बेंडाजॉल की 400 मि.ग्रा. की आधी गोली चूरा करके पीने के साफ पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष के बच्चों को ऐल्बेंडाजॉल की 400 मि.ग्रा. की पूरी गोली चूरा करके पीने के साफ पानी के साथ तथा 3 से 19 वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की 400 मि.ग्रा. की पूरी गोली चबाकर पीने के साफ पानी के साथ प्रदाय की जायेगी।

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