रिश्‍वतखोर सहायक ग्रेड -2 को हुई 3 साल की कठोर सजा और जुर्माना

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रिश्‍वतखोर सहायक ग्रेड -2 को हुई 3 साल की कठोर सजा और जुर्माना


छिन्दवाड़ा, (दुर्गेश डेहरिया)। संक्षेप में प्रकरण इस प्रकार है कि प्रार्थी पवन अग्रवाल द्वारा दिनांक 01-12-2014 को लिखित शिकायत आवेदन दिया गया था।

जिसमे लेख किया कि करीब 8-10 दिन पहले वेंडर लाइसेंस चाहने के लिये जिला पंजीयक कार्यालय छिन्‍दवाडा में आवेदन पत्र जमा किया था और मैने आवेदन जिला पंजीयक कार्यालय में पदस्‍थ सहायक ग्रेड -2 मोहम्‍मद शफी कुरैसी को दिया था जिस पर उसके द्वारा मुझे वेंडर लाइसेंस का काम कराने के लिये मुझसे 40,000 रूपये रिश्‍वत मांगेे और मेरे द्वारा मना करने पर वह बोला की तुम्‍हारा काम बिना पैसे दिये नही होगा। प्रार्थी की शिकायत पर रिश्‍वत मांग संबंधी वार्ता रिकार्ड करने की लिये उसे वाॅइस रिकार्डर दिया गया था।

दिनांक 01/12/2014 को प्रार्थी द्वारा सूचना दी की उसने रिश्‍वत संबंधी वार्ता रिकार्ड कर ली है, रिकार्डर में दर्ज वार्तालाप में रिश्‍वत की मांग संबंधी तत्‍यो की पुष्टि होने पर दिनांक 03/12/2014 को समय 6 बजे रजिस्‍टार कार्यालय छिन्‍दवाडा में आरोपी से पैसे की लेन-देन की बात हुई और बातचीत के दौरान आरोपी ने 35,000 रूपये रिश्‍वत लेने को तैयार हो गया और रिश्‍वत की राशि 35,000 रूपये प्रार्थी के द्वारा देने पर रख लिया था।

जिस पर आरोपी को रिश्‍वत लेते हुये लोकायुक्त जबलपुर द्वारा रंगेहाथ गिरफ्तार कर उसके विरूध्‍द अपराध क्रमांक 515/2014 धारा 7, 13(1)(D), 13(2) भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम] 120 (बी) भादवि0 में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना कार्यवाही की गई बाद संपूर्ण विवेचना कर प्रकरण का अभियोग पत्र विशेष न्‍यायालय (भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम) छिन्दवाडा के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया।

विशेष न्यायाधीश (भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम) छिन्दवाडा द्वारा प्रकरण में अभियोजन पक्ष एवं बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को पर विचार करने के पश्चा्त आरोपी मोहम्‍मद सफी कुरैसी को भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 मे 3 वर्ष का सश्रम कारावास से और 5000₹ के अर्थदंड से दंडित किया गया एवं जुर्माना अदा न करने की दशा में पर 6 माह का अतिरिक्‍त कारावास से दण्डित किया गया।

प्रकरण में शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी समीर कुमार पाठक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। अभियोजन द्वारा प्रस्‍तुत विधिक तर्को एवं सुसंगत साक्ष्‍यों से सहमत होकर न्‍यायालय द्वारा आरोपी को सजा दी गई।

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