उत्तम क्षमावाणी पर्व मनाया गया

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उत्तम क्षमावाणी पर्व मनाया गया


जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। नगर में आज दशलक्षण महापर्व के अवसर पर सुबह से ही भगवान श्री 1008 पार्श्वनाथ की पूजा अर्चना कर भगवान श्री महावीर स्वामी की पालकी यात्रा बाजे की धुन पर नाचते गाते ओर महावीर स्वामी की जयघोष करते हुए नगर के भ्रमण पर निकली जिसमें जैन धर्म के अनुयायी बडी़ संख्या में मौजूद रहे।

दश धर्म स्कंद
दशलक्षण धर्म प्रवचन

धर्म का स्वरूप दशलक्षण रूप है। इन दश चिन्हों से ही अंतरंग धर्म जाना जाता हैं वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। दशलक्षण महापर्व वीतरागता का पोषक त्याग, तपस्या, संयम एवं साधना का पर्व हैं।

श्री दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन समय मनाये जाते हैं।

1. भाद्रपद सुदी पंचमी से भाद्रपद सुदी चौदस तक

2. माघ सुदी पंचमी से माघ सुदी चौदस तक

3. चैत्र सुदी पंचमी से चैत्र सुदी चौदस तक

दशलक्षण धर्म

1. क्षमा: शांत तथा समता भाव से अपने आप में क्लेश ना होने देना व क्रोध छोड़ना।

2. मार्दव: मान नहीं करना, अहं छोडना।

3. आर्जव: कपट नहीं करना, माया कपट छोडना।

4. सत्य: सत्य वचन बोलना।

5. शौच: लोभ नहीं करना।

6. संयम: इन्द्रियों व मन को वश में करना।

7. तप: इच्छायें छोड़ना।

8. त्याग: त्याग करना।

9. आकिंचन: परिग्रह का त्याग करना।

10. ब्रह्मचर्य: विषय सेवन व यौन भावों को मन वचन काम से छोड़ना।

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