पितृ दोष से बचने के लिए रोजाना करें ये उपाय, मिलेगी शांति, इन वस्तुओं का ना करें दान

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पितृ दोष से बचने के लिए रोजाना करें ये उपाय, मिलेगी शांति, इन वस्तुओं का ना करें दान


पितृ दोषों से मुक्ति के लिए यदि आप रोजाना कुछ उपाय ऐसे हैं जिन्हें करने से घर में सुख-शांति रहेगी. हिन्दू धर्म में लोग अपने पितृों की शांति के लिए अनेक प्रकार के क्रिया कर्म, दान पुण्य, पिंड दान, तर्पण आदि कार्य करते हैं जिससे आपके पितृों को शांति मिल सके.

वैसे तो पितृों की शांति उन्हें प्रसन्न करने के धर्म शास्त्रों में अनेक उपाय बताए गए हैं लेकिन कुछ सरल उपाय करने से पितृ जल्दी ही प्रसन्न तृप्त हो जाते हैं आपको इस उपाय को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. ये सरल उपाय आपको पितृ पक्ष में रोजाना करने चाहिए. तो आइए आप भी जानें पितृ दोष से मुक्ति, पितृों को प्रसन्न करने के उपाय के बारे में जरूरी बातें.

15 दिनों तक चलने वाले इन पितृ पक्ष की शुरुआत

आश्विन मास महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से हुई है, जो आश्विन अमावस्या को समाप्त होंगे. इन दिनों पूर्वजों के लिए तर्पण पिंड दान कर्म किये जाते हैं. इस दौरान कई लोग पितृ दोष की भी पूजा करवाते हैं. कहते हैं पितृ दोष दूर करने के लिए आप कई प्रकार के उपाय आजमा सकते हैं.

ऐसा माना जाता है कि पितृ दोष के चलते आपको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस दौरान हर जगह से आपके बनते काम धीरे-धीरे बिगड़ते चले जाते हैं. मान्यताओं के अनुसार, इन उपायों से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है. ज्योतिष मान्यता है कि कुंडली में दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति बनने पर पितृ दोष लग जाता है. सूर्य के तुला राशि में रहने पर या राहु या शनि के साथ युति होने पर पितृ दोष का प्रभाव बढ़ जाता है।

इसके साथ ही लग्नेश का छठे, आठवें, बारहवें भाव में होने लग्न में राहु के होने पर भी पितृ दोष लगता है। पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है। पितृ दोषों से मुक्ति के लिए व्यक्ति को रोजाना नियम से हनुमान जी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। हनुमान जी की पूजा- अर्चना करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है.

  • रोजाना करें हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान चालीसा का पाठ रोजाना करना चाहिए. एक से अधिक बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. सभी तरह की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए रोजाना नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें. इससे आपको अप जरूर मिलेगा.

बजरंग बाण का पाठ भी जरूरी

बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सभी तरह के दुख- दर्द, भय को दूर करने के लिए बजरंग बाण का पाठ जरूर करें. भगवान राम माता सीता के नाम का संकीर्तन करें. कहा जाता है कि जहां भगवान राम का संकीर्तन होता है, वहां हनुमान जी उपस्थित रहते हैं। राम नाम का संकीर्तन करने से जीवन के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.

हनुमान जी को भोग अवश्य लगाएं

हनुमान जी को भोग अवश्य लगाएं. हनुमान जी को बूंदी या लड्डुओं का भोग लगाएं. आप हनुमान जी को अपनी मनपसंद सात्विक चीजों का भोग भी लगा सकते हैं. भोग लगाने के बाद प्रसाद को लोगों के बीच जरूर बांटे.

पितृपक्ष में क्या करें दान

•पितृ पक्ष में गुड़ और नमक का भी दान किया जाता है और यह काफी शुभ माना जाता है. यदि आपके घर में कलेश या झगड़ा होता है तो श्राद्धों में गुड़ और नमक का दान करना चाहिए. शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष में कपड़े दान करने का भी काफी महत्व है. इसलिए आप जूते, चप्पल और छाते का दान कर सकते हैं।

•सनातन धर्म के अनुसार प्रतिपक्ष के दौरान भोजन को सबसे बड़ा दान माना गया है। भूखें, निर्धन एवं जरूरत लोगों की मदद करना एवं अन्न भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। यदि भोजन ना कर सको तो भोजन की सामग्री भी दान कर सकते हैं।

क्या ना करें

•पितृपक्ष के दौरान हमेशा सादा भोजन करना चाहिए। •पूर्वजों को जब प्रसाद लगाएं तो भूलकर भी उसमें प्याज लहसुन का इस्तेमाल ना किया गया हो।

•अगर आपको अपने पूर्वज की तिथि याद नहीं है तो पितृपक्ष के अंतिम दिन करके तर्पण विधि पूजा अर्चना कर सकते हैं।

•पितृपक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण विधि करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों की पूजा न करने से पूर्वजों को मृत्युलोक में जगह नहीं मिलती और उनकी आत्मा भटकती रहती है, जिससे पितर नाराज होते हैं और कई दोष लगते हैं। इसलिए पितृपक्ष में तर्पण विधि और श्राद्ध कर्म किया जाता है।

•पितृपक्ष पर पूर्वजों को यदि भोजन ना दिया जाए एवं तर्पण ना किया जाए तो इससे पूर्वजों को मृत्यु लोक में स्थान नहीं मिलता और उनकी आत्मा पृथ्वी पर भटकती
रहती है इसलिए हमें तर्पण विधि या श्राद्ध करना चाहिए।

•पितृपक्ष के दौरान कोई भी नशा नहीं करना चाहिए।

•पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों की पूजा,अर्चना करनी चाहिए। आपको ध्यान रखना चाहिए, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य ना करें एवं कोई भी नई वस्तु घर में ना लाएं ऐसा करने से पूर्वज रूष्ट होते हैं और इसे अशुभ माना जाता है।

•यदि आपका स्वभाव क्रोधी है तो आपको क्रोध से बचना है क्योंकि यदि आप किसी पर क्रोध करते हैं तो इससे उसका अपमान होगा और पूर्वज नाराज हो सकते हैं। आपको अपना स्वभाव सामान्य रखना होगा सभी से सरल और सहजता से बर्ताव करना होगा।

•यदि आपको कोई निर्धन व्यक्ति अथवा भूमिका व्यक्ति दिखे तो उसे भोजन कराएं और उसकी मदद करें इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

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