अन्य कई बीमारियो को जन्म देती है मोटापा – मलय जैसवाल

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अन्य कई बीमारियो को जन्म देती है मोटापा – मलय जैसवाल


आज अस्वस्थ जीवनशैली के कारण उत्पन्न बीमारियों में से सबसे बड़ी बीमारी मोटापा है। यह बीमारी पूरी दुनिया में एक महामारी बन गई है यह बात प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का अध्यन कर रहे मलय जैसवाल ने बताया कि भारत में अनेक लोग मोटापा के शिकार हैं। मोटापे के कारण शरीर में कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं। जब परेशानियां बढ़ने लगती हैं तो लोग मोटापा कम करने के लिए उपाय खोजने लगते हैं। कई बार उचित जानकारी नहीं हो पाने के कारण लोग अपना वजन घटा नहीं पाते हैं।

लेकिन आप प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग की शरण में आते है तो आप जल्द ही अन्य चिकित्सा पद्धतियों की तुलना में आप जल्द ही स्वस्थ हो जाते हो। मोटापा (Obesity) एक शब्द है जिसका use हम ऐसे person के लिए कर सकते है जिसके शरीर में fat की उच्च मात्रा के कारण उसका वजन बहुत अधिक बढ़ जाता है।किसी व्यक्ति के वजन का आकलन आमतौर पर कई तरीकों से लगाया जा सकता है।

मोटापे को मापने की बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाने वाली विधि है जिसे हम Body mass index (BMI)) कहते है।यदि आपका बीएमआई 25 और 29 के बीच है, तो आपका Weight अधिक है यदि आपका बीएमआई 30 से 40 के बीच है, तो आपका Weight मोटापे की श्रेणी में आएगा यदि आपका बीएमआई 40 से अधिक है तो आपको बहुत मोटा (“अस्वस्थ रूप से मोटा”) माना जाएगा।

इसके अलावा कमर की चर्बी माप कर भी मोटापे का पता लगाया जाता है। बहुत मोटी कमर वाले लोगों (पुरुषों में 94 सेमी या इससे अधिक और महिलाओं में 80 सेमी या इससे अधिक) में मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा अधिक होता है। मोटापा होने के कारण प्रमुख कारण है – निष्क्रिय जीवनशैली मोटापे को जन्म देती है।

दिन-भर बैठकर कार्य करना,आवश्यकता से अधिक भोजन करना,आनुवंशिकी भी मोटापे का एक प्रमुख कारण है। कई व्यक्तियों में मोटापा आनुवंशिक होता है। उस व्यक्ति विशेष के शरीर में उपस्थित जीन्स के कारण ही वह मोटा होता है। यह उसे पैतृक एवं वंशानुगत रूप से मिला होता है। मोटापे का एक कारण मासिक धर्म सम्बन्धी अनियमितताएं है।

कई महिलाओ में मासिक धर्म का कई महीनो के बाद या अनियमित रूप से होना भी मोटापे को बढ़ाता है।आजकल फास्टफूड एवं कन्फेनशरी आहार का अत्यधिक सेवन किया जा रहा है। फास्टफूड, चाकलेट, कॉफी, चाय, कोल्ड डिंक में वसा की मात्रा अधिक होने पर यह मोटापे को बढ़ाता है।

कई व्यक्तियों में दवाइयों के दुष्प्रभाव के द्वारा भी मोटापा बढ़ जाता है। कई व्यक्तियों को छोटी- छोटी बीमारियों एवं तकलीफ में दवाइयाँ लेने की आदत होती है। जो आगे चलकर नुकसान करती है।
प्रसवोपरान्त महिलायों का मोटापा बढ़ जाता है।

दिनचर्या अस्त-व्यस्त होने से भी व्यक्ति मोटापे का शिकार होता है। सोने से सम्बन्धित गलतियाँ भी मोटापे को जन्म देती है। वही आवश्यकता से अधिक सोने से भी मोटापा बढ़ जाता है।

मोटापे का एक कारण हृार्मोन्स असन्तुलन है। थाइराइड और पिट्यूटरी ग्रन्थि के हृार्मोन्स स्त्राव जब अनियमित हो जाते है। तब व्यक्ति मोटापे से ग्रसित हो जाता है।
व्यक्ति में मोटापे का एक कारण क्षार तत्वो की कमी है। जो व्यक्ति क्षार तत्वों से युक्त भोजन कम करते है या ऐसे भोजन को ग्रहण करते है जिनमें क्षार तत्व नहीं पाया जाता मोटापे से ग्रसित हो जाते है।

मोटापा के लक्षण प्रमुख कारण है –

मोटापे में विशेषकर पेट बढ़ जाता है। मोटापे में आन्तरिक अंगों पर भी प्रभाव पड़ता है। आन्तरिक अंगों में liver , mussels kidney और heart आदि अंगों का आकार भी बढ़ जाता है।


मोटे व्यक्तियो में मेद धातु में वृद्धि हो जाती है। जिससे पेट बढ़ जाता है, क्योंकि मेद धातु की अधिकता वायु को अवरूद्ध कर देती है जिससे वायु कोठो में ही घूमती रहती है और जैसे ही रोगी भोजन ग्रहण करता है, वह उसे जल्दी पचा देती है और रोगी को जल्दी-जल्दी भूख लगने लगती है। किसी व्यक्ति का उचित वजन कितना होना चाहिए, यह बी.एम.आई. पर निर्भर करता है। बी.एम.आई. दो बातों पर

निर्भर करती हैः कद वजन

आप बीएमआई से अपने वजन की जांच कर सकते हैं। बी.एम.आई. का यह फार्मूला होता है- वजन (कि.ग्रा. में)/कद (मीटर में )2।

अगर आपकी बीएमआई 18.5 से कम है तो आप अंडरवेट माने जाएंगे।

अगर आपकी बीएमआई 18.5 से 24.9 के बीच है तो आपका वजन सामान्य माना जाएगा।

इसी तरह 25 से 029.9 तक की बी.एम.आई. होने पर ओवरवेट माना जाता है।

30 से ज्यादा की बी.एम.आई. होने पर ओबीज या मोटापा कहलाता है।

गर्भावस्था के दौरान बी.एम.आई. की सीमा लागू नहीं होती है।बी.एम.आई. आयु व लिंग पर निर्भर नहीं करता है।
मोटापे की स्थिति में क्या खाएं (Your Diet in Obesity)
अनाज में जैसे की पुराने शाली चावल, बाजरा, मक्का, जौ,पतली खिचड़ी,दलिया।

दालों में : मूंग, चना, अरहर, मसूर दाल

फलो में : अंगूर, सेब, अनार, पपीता, नारंगी आदि
सब्जिययो में करेला, लौकी, तोरई, परवल, कद्दू और मौसमी सब्जियाँ आदि अन्य: हल्का खाना, छाछ, गर्म पानी, इलाइची, चोकर की रोटी ये सब भी खा सकते है।
मोटापे से ग्रस्त लोगों को इनका सेवन नहीं करना चाहिएः-

अनाज में : नया चावल, गेहूं

दाल में : देशी चना

सब्जियां में : आलू, कटहल, अरबी तैलीय मसालेदार भोजन, मांसाहार, मांसाहार सूप, आचार, घी, तेल, अत्यधिक नमक, कोल्ड ड्रिंक, बेकरी पदार्थ, जंक फ़ूड, सॉफ्टड्रिंक, डिब्बा बंद खाना, नमक, चॉकलेट, टॉफी, मछली का माँस, कॉफी, चाय, कोलड्रिंक, मिठाई, दही, आलू, केला, आम, शराब।

मोटापे के लिए प्राकृतिक चिकित्सा

इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को ऊपर बताए गए सभी नियमों का पालन करना चाहिए अपने भोजन करने की आदत पर संतुलन करना चाहिए।
भूख से ज्यादा भोजन कभी नहीं करना चाहिए तथा शर्करा और चर्बी वाले पदार्थो का भोजन भी नहीं खाना चाहिए।

जहां तक हो सके तो भोजन में नमक का इस्तेमाल कम करना चाहिए। यदि नमक खाना भी है तो सेंधानमक का इस्तेमाल करना चाहिए। मोटापा रोग से पीड़ित रोगी को एक गिलास पानी में तुलसी का रस मिलाकर पीना चाहिए तथा पेट पर मिट्टी की पट्टी तथा इसके कुछ देर बाद पेट पर गर्म या ठंडा सेंक करना चाहिए। रोगी को एनिमा क्रिया करके अपने पेट को भी साफ करना चाहिए।

एनिमा लेना चाहिए उसके बाद रोगी व्यक्ति को कुंजल क्रिया करना चाहिए उसके बाद भाप स्नान और सप्ताह में एक बार शरीर पर गीली लपेट का प्रयोग करना चाहिए तथा शंख प्रक्षालन, सूर्यस्नान, गर्म पादस्नान तथा सूखा घर्षण करना चाहिए। मसाज थैरेपी, फास्टिंग थैरेपी भी बहुत उपयोगी होते है। इससे मोटापा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। सूर्यतप्त नांरगी बोतल का पानी पीने से भी आराम मिलता है।

करें ये आसन

आसन में आप सूर्य नमस्कार, दण्ड आसन, वीर भद्रासन, त्रिकोणासन, अधोमुख स्वान आसान, सर्वांगासान, सेतुबंध आसान, उत्कट आसान, धनुरासन, कपालभाति प्राणायाम और मुद्रा में लिंग मुद्रा, व्यान मुद्रा, सूर्य मुद्रा, करना चाहिए।

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