अनदेखी 👁️ – कभी जिले की शान था आज उपेक्षा का शिकार मूढा वन विश्रामालय

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अनदेखी 👁️ – कभी जिले की शान था आज उपेक्षा का शिकार मूढा वन विश्रामालय


शाहपुर, (सचिन शुक्ला)। ब्लॉक मुख्यालय से 17 किमी दूर वन ग्राम मूढा में स्थित लकड़ी बाँस से निर्मित रेस्टहाउस अपने अतीत के शानों शौकत की याद दिला रहा है।

विशेष ढ़ंग से लकड़ी से निर्मित इस रेस्टहाउस को देखने से ही लगता है कि वन विभाग ने इसे यहां के वातावरण व लकड़ी बाँस की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता को देखते हुए ही इसके निर्माण की परिकल्पना काठ एवँ बाँस के बने आकर्षक डिजाइन के इस आलीशान आशियाने में फ़र्श पर टाइल्स लगाकर हाल व बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन आदि की व्यवस्था सुनियोजित ढ़ंग से की थी। वन विभाग के उचित रखरखाव व मरम्मत के अभाव में रेस्टहाउस अपने आलीशान अतीत को सोच आंसू बहा रहा है।

बता दें कि इस फारेस्ट रेस्टहाउस का जिले में अपना एक अलग ही आकर्षण रहा है। क्षेत्रों में शौकिया या फिर विभागीय जरूरत से भ्रमण करने वाले अधिकारियों को यह रेस्टहाउस काफी भाता था। शुरूआती दौर में वन विभाग द्वारा इसके रखरखाव व मरम्मत के लिए शासन से धन मिलता रहा हैं, लेकिन कुछ वर्षों के बाद जब इस मद में धन मिलना बंद हो गया तो इसके उपेक्षा की कहानी शुरू हो गयी।

बताया जा रहा है कि पिछले 20 वर्षों से इस रेस्टहाउस की मरम्मत व रखरखाव पर एक भी पाई खर्च नहीं हुई है। वर्ष 2015 – 16 में इस रेस्टहाउस में फर्स पर टाइल्स लगाई गई थी पर छत का काम नही किया गया। वर्तमान स्थिति यह है कि रेस्टहाउस के छत की लकड़ी बाँस सड़ गये हैं छत जगह जगह टूटकर खपरे गिर रही हैं। अगर यही हाल रहा तो इस आने वाले 2022 की बारिश में यह लकड़ी बाँस से बना रेस्ट हाउस का नामोनिशान खत्म हो जावेगा।

अगर सरकार व वन विभाग इसका जीर्णोद्धार करवाएं तो यह विश्राम गृह पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। इस विश्राम गृह में लकड़ी बाँस की दीवारों एवँ छप्पर की हालात जर्जर है। यह कभी भी ढह सकता है, लेकिन इसको लेकर न तो विभाग संजीदा है और न ही अन्य अधिकारी। कई वर्षो से इसकी हालत खराब है। विश्राम गृह के सामने का टूटा खपरेलू छप्पर इसकी हालात बयान करने के लिए काफी हैं।

इनका कहना है

मेरे द्वारा भी रेस्टहाउस को देखा गया है। रेंजर शाहपुर इस रेस्टहाउस को सुधारने का स्टीमेट बनवा रहे हैं। विभाग में बजट का आभव है स्टीमेट तैयार होते वरिष्ट कार्यलय स्वीकृति के लिऐ भेज दिया जावेगा। विभाग से निर्माण की कब स्वीकृति मिलेगी यह हम समय नही बता सकते।

पुनीत गोयल, उत्तर वन मंडल, डीएफओ, बैतूल

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