विश्व युवा दिवस पर आयोजित हुआ विराट कवि सम्मेलन

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विश्व युवा दिवस पर आयोजित हुआ विराट कवि सम्मेलन

सर्द माहौल में भी बही कविता की बयार


जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। स्वामी विवेकानंद जयंती और युवा दिवस के विशेष अवसर पर ग्राम भतोड़िया कला, जुन्नारदेव में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ । लोकप्रिय जननेता और समाजसेवी उमाशंकर सूर्यवंशी, राजू साहू, कुलदीप सूर्यवंशी, गोपाल सूर्यवंशी, युवराज सूर्यवंशी, मोनू डेहरिया और आयोजन समिति के अन्य साथी सदस्यो के प्रयास और राष्ट्रीय कवि दीपक साहू ‘सरस’ के बेहतरीन संयोजन से इस कार्यक्रम ने अनंतिम ऊंचाइयों को छुआ।

देश के विभिन्न अंचलों से पधारे कवियों और कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ठ रचनाओं और आकर्षक प्रस्तुतियों से जनमानस का मन मोह लिया। इस अवसर पर मंच संचालन की महती जिम्मेदारी वरिष्ठ कवि दीपक साहू सरस ने उसी खूबी के साथ निभाई जिसके लिए वे देश भर में जाने जाते है । इसमें उन्हे जी भर कर सहयोग दिया उन सुधी श्रोताओं ने जिन्होंने अपनी सराहना और तालियों से सभी आगंतुक कवियों का उत्साह बढ़ाया और कार्यक्रम को उंचाईयां प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्र के वरिष्ठ और सम्मानित नागरिकों के द्वारा माता सरस्वती की पूजा, स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और अतिथियों के स्वागतोपरांत बैतूल के वरिष्ठ कवि अखिलेश परिहार की सरस्वती वंदना से हुआ । इसके उपरांत आमला के सुकुमार कवि कैलाश सलाम ने अपनी मखमली आवाज में गीत गजलो से बेहतरीन समां बांधा । भोपाल से पधारी युवा कवयित्री कंचन नामदेव ने भी अपनी रचनाओं से सभी का मन मोह लिया । इसके पश्चात सतपुड़ा अंचल के लाडले कवि रामनाथ यदुवंशी ‘आदित्य’ ने अपने समसामयिक और सामाजिक मुक्तको से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उनकी गजल को भी बहुत सराहना मिली ।

अगले क्रम में नरसिंगपुर से पधारे ओज के प्रख्यात और ओजस्वी हस्ताक्षर विनीत नामदेव अपनी जोशीली रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । सिवनी के युवा कवि प्रमोद गोल्हानी ‘सरस’ ने अपनी सुरीली और दिलकश रचनाओं से सभी को आनंद सागर में गोते लगवाए । भोपाल से आमंत्रित शायर और गीतकार नितेश कुमार ‘नैश’ ने अपनी मुहब्बत से भरी गजलो और देशप्रेम में डूबे गीतों से माहौल को सतरंगी कर दिया । अखिलेश परिहार के सामाजिक और जमीन से जुड़े गीत निश्चित ही लंबे अंतराल तक लोगो के जेहन में बैठे रहेंगे। बालाघाट की कवयित्री और मध्य भारत की शान माधुरी ‘किरण’ का काव्यपाठ हमेशा की तरह चमत्कृत करने वाला रहा उन्होंने साबित किया की क्यों देश में उन्हें प्रेम और श्रंगार की श्रेष्ठ कवयित्रियों में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।

अंत में सबरस कवि दीपक साहू ‘सरस’ ने अपने संक्षिप्त अनूठे काव्यपाठ से श्रोताओं को खिलखिलाने और लोटपोट होने के कई अवसर उपलब्ध करवाएं । उनकी चुटीली और गुदगुदाती कविताओं के साथ इस कवि सम्मेलन ने उस अंतिम ऊंचाई को भी छू लिया जो आयोजको का ध्येय या कहिए स्वप्न हुआ करती है । इसमें ग्रामवासी श्रोताओं का भी बहुत बड़ा योगदान रहा जिन्होंने हर एक कवि को पूरे मनोयोग से सुना ।

हर एक कवि को अच्छी रचनाओं पर दाद दी। और जब सुनने वाला वर्ग इतना जागृत और ऊर्जावान हो तो निश्चित ही काव्यपाठ में भी आनंद आता है और सभी कवियों ने इस आनंद का पूरा लुत्फ लिया और अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियां दी । भाई उमाशंकर के धन्यवाद संबोधन के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन समिति का यह निर्णय भी अभिनंदनीय है कि कविसम्मेलन की यह साहित्यिक परंपरा भविष्य में भी प्रतिवर्ष 12 जनवरी ( युवा दिवस ) पर निभाई जाती रहेगी।

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