भाजपा सरकार प्रदेश के अतिथि शिक्षको के साथ भेदभाव एवं दोहरी नीति अपना रही है

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भाजपा सरकार प्रदेश के अतिथि शिक्षको के साथ भेदभाव एवं दोहरी नीति अपना रही है


सारनी। मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग में 12-13 वर्ष से कार्य कर रहे अनुभवी और योग्य डीएड ,बीएड प्रशिक्षित अतिथि शिक्षकों के साथ भेदभाव एवं दोहरी नीति अपनाना शिक्षाविभाग एवं शासन को उचित नही है। जैसा कि इनसाइड में देखा जा सकता है कि उच्च शिक्षाविभाग में कार्यरत अतिथि विद्वानों के लिए सरकार द्वारा आदेशित किया है कि अतिथि विद्वानों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी और दूसरी तरफ जब स्कूल अतिथि शिक्षक अपने नियमितकरण की बात करते हैं तो उन्हें आरटीई का बहाना बताते है।

वरिष्ठ शिक्षकों की तो आप नियम में शिथिलता ले आते है। आप देख सकते हैं अतिथि शिक्षकों के साथ किस तरह दोहरी नीति अपना रही है। सरकार किस तरह सीएम राइस स्कूल के लिए प्राचार्य न मिल पाने की स्थिति में नियम शिथिल किए और अनुभव को वरीयता देते हुए प्राचार्यों की व्यवस्था की जा रही है और स्पष्ट कथन लिखा हुआ है कि वे भी सम्मिलित हो जो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासन काल में जिनको बिना परीक्षा दिए शिक्षक बनाया गया था।

परंतु स्कूल शिक्षा विभाग में पूर्ण प्रशिक्षित डीएड एवं बीएड योग्यताधारी अतिथि शिक्षक जो कि पिछले कई वर्षों से शिक्षा विभाग को आधार देते हुए आए हैं इनके अनुभव और योग्यता को दरकिनार करते हुए शासन ने इनको न केवल बेरोजगार किया और अभी भी लगातार बेरोजगार करने का सिलसिला जारी है। शासन की तरफ से इनको किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्रदान नही किया गया है जबकि सभी के लिये शिथिल कर नियम बनाये जा रहे है।

आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ के सह प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश खंडेलवाल ने बताया हैं की शासन एवं विभाग हमसें वार्तालाप करने के लिए भी तैयार नही, कई बार ज्ञापन एवं सांकेतिक धरना दिया आवेदन निवेदन किया गया किन्तु एक भी बार वार्तालाप करने नही बुलाया ताकि अतिथि शिक्षकों की समस्या का समाधान हो सके। एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री रोजगार मेले का उद्घाटन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ 70 हजार मे से 30-40 हजार अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार कर दिया गया है, जिनके ऊपर उनके परिवार की जिम्मेदारी है। 8, 10, 12 और 13 वर्ष कार्य करने के बाद भी अतिथि शिक्षकों को न तो वर्षवार अनुभव के अंक प्रदान किए गये और न ही इनके नियमितीकरण के लिए कोई सुसंगत योजना शासन प्रशासन के द्वारा बनायी गयी।

विगत माह 12 नवंबर 2021 को मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जी ने नसरूल्लागंज में अतिथि शिक्षकों से यह कहा कि “विभागीय परीक्षा तो दो यार” परंतु आज तक ये नही बताया कि कब हो रही विभागीय परीक्षा? मामा सब का हित करते हैं सर्वा हरी है उन्होंने हर वर्ग का हित किया है। किंतु मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों के लिये अभी तक कोई ठोस नीति नही बनाई। इसलिए प्रदेश भर के अतिथि शिक्षकों ने मामाजी पर दोहरी नीति एवं भेदभाव करने का आरोप लगाया है।

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