जानें, टपकेश्वर मंदिर का हैरान करने वाला सच

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जानें, टपकेश्वर मंदिर का हैरान करने वाला सच

भगवान शिव शंकर के देशभर में ही नहीं बल्कि पूरे विश्वभर में एेेसे कई प्राचीन मंदिर हैं जिनका इतिहास रामायण, महाभारत आदि से जुड़ा हुआ है। एेेसा ही भोलेनाथ का एक प्राचीन मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित है। इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, यही कारण है कि यह मंदिर अपने आप में खास माना जाता है।

देहरादून से सात कि.मी. की दूरी पर टपकेश्वर मंदिर स्थित है। बाबा के इस धाम पर देशभर से कई लोग दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक मान्यता है कि आदिकाल में भगवान शंकर ने यहां देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर उन्हें देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे।

एेसी मान्यता है कि इसी जगह को द्रोणपुत्र अश्वत्थामा की जन्मस्थली व तपस्थली माना गया है, जहां अश्वत्थामा के माता-पिता गुरु द्रोणाचार्य व कृपि की पूजा-अर्चना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था। जिसके बाद ही उनके घर अश्वत्थामा का जन्म हुआ था।

एक बार की बात है कि अश्वत्थामा ने अपनी माता कृपि से दूध पीने की इच्छा जाहिर की, जब उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी तब अश्वत्थामा ने घोर तप किया। जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने वरदान के रूप में गुफा से दुग्ध की धारा बहा दी।

तब से ही यहां पर दूध की धारा गुफा से शिवलिंग पर टपकने लगी, जिसने कलियुग में जल का रूप ले लिया। इसलिए यहां भगवान भोलेनाथ को टपकेश्वर कहा जाता है। मान्यता यह भी है कि अश्वत्थामा को यहीं भगवान शिव से अमरता का वरदान मिला। उनकी गुफा भी यहीं है जहां उनकी एक प्रतिमा भी विराजमान है।

एक लोक मान्यता यह भी है कि गुरू द्रोणाचार्य को इसी स्थान पर भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त हुआ था। स्वयं महादेव ने आचार्य को यहां अस्त्र-शस्त्र और पूर्ण धनुर्विद्या का ज्ञान दिया था।

 

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NEWS IN ENGLISH

Know, the Surprising Truth of the Tapakeshwar Temple

There are many ancient temples all over the world, not only in the country of Lord Shiva Shankar, whose history is associated with Ramayana, Mahabharata etc. This is an ancient temple of Bholenath located in Dehradun, the capital of Deobandh Uttarakhand. Its history is associated with Mahabharata period, which is why this temple is considered special in its own right.
        

Seven kms from Dehradun At the distance is the temple of Tapakeshwar situated. Many people from all over the country come to visit Baba’s Dham. this temple is dedicated to Lord Shiva. It is mythological belief that in the ancient times, Lord Shankar was pleased with the prayers of the gods and presented him as Deveshwar.

It is believed that this place has been considered as the birthplace and ascetic of Dronaputra Ashvatthama, where Lord Shiva gave blessings to the son to be pleased with the worship of Guru Dronacharya and Kripa, parents of Ashwaththama. After that Ashwaththama was born to his house.

It is a matter of time that Ashwatthama expressed his willingness to drink milk from his mother, when his wish could not be fulfilled, Ashwaththama used to utter severe penance. By which pleased Lord Bholenath shedding milk from the cave as a boon.

From here on, the stream of milk started dripping on the cave from the cave, which took the form of water in Kali Yuga. Therefore here Lord Bholenath is called Tapakeshwar. It is also recognized that Ashwatthama got the gift of immortality from Lord Shiva right here. His cave is also here where one of his statues is seated.

There is also a public belief that Guru Dronacharya received the blessings of Lord Shiva at this place. Mahadev himself had given Acharya knowledge of Arms and Full Archeology here.

 

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