सारनी : अस्पताल है पर डॉक्टर नहीं – क्षेत्र में एक लाख के ऊपर जनसंख्या फिर भी सिविल अस्पताल का दर्जा नहीं डब्लूसीएल और मंडल के अस्पताल में गैर कर्मचारियों का नहीं होता उपचार

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सारनी : अस्पताल है पर डॉक्टर नहीं – क्षेत्र में एक लाख के ऊपर जनसंख्या फिर भी सिविल अस्पताल का दर्जा नहीं डब्लूसीएल और मंडल के अस्पताल में गैर कर्मचारियों का नहीं होता उपचार

दीपेश दुबे

बैतूल/सारनी । जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका सारनी में सरकारी अस्पताल की सुविधा न के बराबर है। बताया जाता है कि वर्तमान समय में सारनी के पाटाखेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दुरुस्त पड़ी हुई है। लगभग 20 वर्ष पूर्व बगड़ोना और आसपास की जनसंख्या को देखते बगडोना और पाथाखेड़ा के लिये स्वास्थ्य केंद्र का गठन किया गया था। तीन वर्ष बगडोना में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का संचालन होने के बाद इसे पाटाखेड़ा भेज दिया गया था। वर्तमान समय में क्षेत्र की जनसंख्या लगभग डेढ़ लाख और मतदाता 87 हजार होने के बाद भी सिविल अस्पताल का दर्जा क्षेत्र को नहीं मिल पाया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पाटाखेड़ा के अंतर्गत चार सेक्टरों में 22 गांव के लोगों की स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटाखेड़ा पर निर्भर है। लेकिन यह अस्पताल कई वर्षों से डॉक्टर विहीन चल रहा है। जिससे लोगों को परेशानी होती है। पर इस ओर कोई पार्टी नेता प्रशासन देखने को तैयार नहीं है।

डब्ल्यूसीएल, एमपीईबी का अस्पताल बना बांधा

कोयलांचल क्षेत्र पाथाखेड़ा और विद्युत नगरी सारनी में कंपनी के अस्पताल है ओर इस अस्पताल में गैर कर्मचारियें का उपचार नहीं किया जाता है । हालांकि दोनों अस्पताल अपने कर्मचरियों के अलावा गैर कर्मचरियों का उपचार नहीं करते। ऐसी स्थिति में क्षेत्र की जनता, आदिवासी समुदाय ग्रामीण लोगों को झोलाछाप डॉक्टर के उपचार पर निर्भर रहना पड़ता है या तो घोड़ाडोंगरी, बैतुल, पाड़र, नागपुर, भोपाल के अलाव कोई दूसरा विकल्प नही होता है ।

जनसंख्या पर खुलता अस्पताल-

स्वस्थ्य विभाग के आला अधिकरियों की माने तो 15 से 25 हजार की जनसंख्या वाले क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 25 से 60 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और एक लाख से ऊपर वाले क्षेत्र में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया जाता है । लेकिन जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका में सिविल अस्पताल न होने से गैर कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र से उपचार के लिए आने वाले ग्रामीणों को झेलाछाप डॉक्टर या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घोड़ाडोंगरी उपचार के जाना पड़ता है । अगर क्षेत्र की जनता कमर कसते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटाखेड़ा को सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाने में कामयाब होते हैं तो नगरपालिका क्षेत्र सारनी को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने पर अस्पताल में 8 डॉक्टर, 8 नर्स, 8 का स्टॉफ व एंबुलेंस कंपाउडर सहित फर्मसिस्ट की सुविधा मिलेगी। जिसका लाभ क्षेत्र की जनता ले पाएगी ।

इनका कहना है-

उपचार हेतु बाहर जाना पड़ता है-

कई बार डॉक्टर की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालकर बैतूल,नागपुर,भोपाल उपचार के लिए जाना पड़ता है ।

शब्बीर बेदी-
व्यापारी शॉपिंग सेंटर सारनी

इनका कहना है-

डॉक्टर की कमी से जूझ रहे

लोग कई वर्षों से क्षेत्र के लोग अस्पताल में डॉक्टर की कमी से जूझ रहे है, लेकिन शासन-प्रशासन नेता ने क्षेत्र के लोगों की सुविधा हेतु परमानेंट डॉक्टर की नियुक्त करना उचित नहीं समझा । इसी वजह से क्षेत्रवासियों का उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है।

अजय रघुवंशी-
लकी मेडिकल संचालक सारनी

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NEWS IN ENGLISH

Sarni: There is a hospital but not a doctor – the population above one lakh in the area is still not civil hospital status; WCL and non-staff treatment is not treated at the Mandal’s hospital.

Deepesh dube

 Betul / Sarani The facility of government hospital in Sarni, the largest municipality in the district, is no more. It is said that at present, the condition of the primary health center in Sarani’s Patkheda is fixed. Around 20 years ago, a health center was set up for Bagdona and Patkheda to look around and the surrounding population. Three years after the primary health center was operated in Bagdona, it was sent to Patkheda. At present, the area’s population is not available for the area of ​​civil hospital status even after about 1.5 lakh people and 87 thousand voters. Under the Primary Health Center Patkheda, the responsibility of the health of 22 villages in four sectors is dependent on Patakhera Primary Health Center. But this hospital has been running without doctors for many years. That makes people difficult. But no party leader on this side is ready to see the administration.

Build WCL, MPEB Hospital

Coalchalchal area is the hospital of Patkheda and electrical town Sarni and non-staff is not treated in this hospital. Although both hospitals do not treat non-employees as well as their employees. In such a situation, the people of the area, tribal communities, rural people have to depend on the treatment of a zodiac doctor or there is no other alternative except Ghoddongri, Betul, Padar, Nagpur, Bhopal.

Hospital opens on population-

According to the top officials of the Health Department, the primary health center in the population of 15 to 25 thousand and the community health center in the area of ​​25 to 60 thousand and the status of civil hospital in the area above one lakh is given. However, due to non-civil hospital in the district’s largest municipality, the villagers coming to treatment from non-employee and rural areas have to go to Zelachap Doctor or community health center Ghoradongri. If the public health center of the area is getting the status of civil hospital status to Patkheda, then the community health center will get the status of civil hospital, if it gets status of civil hospital, 8 doctor, 8 nurse, 8 staff and ambulance compounder, the facility of Firmisit Will meet The people whose benefits will be able to get the area.

They say-

You have to go out for treatment-

Many patients who come from rural areas due to lack of doctor due to lack of time have to go for the treatment of Betul, Nagpur, Bhopal by risking their lives.

Shabbir Bedi-
Merchant Shopping Center Sarnani

They say-

Coping with a doctor’s deficiency

 For many years, people of the area have been facing a shortage of doctors in the hospital, but the governance leader did not consider it suitable to appoint a permanent doctor for the convenience of the people of the area. For this reason, the residents of the area have to go out for treatment.

Ajay Raghuvanshi-
Lucky Medical Director Sarni

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