June 22, 2021

वेद के प्रकाश से ही हटेगा अज्ञान रूपी अंधकार- आचार्य निरंजन

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NEWS IN HINDI

वेद के प्रकाश से ही हटेगा अज्ञान रूपी अंधकार- आचार्य निरंजन

घरों में वैदिक यज्ञ करने से सुखमय होता है जीवन

नन्हें चन्द्रवंशी
बैतूल/सारनी। सारनी के ओल्ड एफ में दस से 13 फरवरी तक चले वैदिक यज्ञ में इटारसी के जमानी गुरुकुल से आए आचार्य निरंजन जी ने कहा कि वेद के प्रकाश से ही अंधकार रूपी अज्ञान को मिटाया जा सकता है। घरों में वैदिक यज्ञ करने से मन शांत रहने के साथ ही जीवन मे सुख शांति का वातावरण निर्मित होता है। दस से 13 फरवरी तक ओल्ड एफ में सुबह-शाम हुए वैदिक यज्ञ में क्षेत्र से लोगों ने हवन में भाग लिया। सारनी में बीते 15 साल से महर्षि दयानद सरस्वती के बोध्य उत्सव के अवसर पर वैदिक मंत्रों से हवन पूजन होता गई। जो महाशिरात्री के दिन पूर्ण आहुति के साथ समापन होता है। यज्ञ में वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ वेदी में हवन डाला जाता है। आचार्य जी ने बताया कि हवन सामग्री के जलने से निकलने वाले धुंए से वायुमंडल शुद्ध होने के साथ ही बरसात अधिक होती है। गौरतलब रहे कि स्वामी दयानंद सरस्वती सामान्यत: आर्य समाज के संस्थापक तथा समाज-सुधारक के रूप में जाने जाते है। राष्ट्रीय स्वतन्त्रता के लिए किये गए प्रयत्नों में उनकी उल्लेखनीय ने अंग्रेजो के छक्के छुड़ा डाले और समाज मे फैली कुरूतियो का स्वामी जी ने खूब विरोध किया। आचार्य जी ने प्रवचन में कहा कि वस्तुस्थिति यह है। कि पराधीन आर्यावर्त भारत में यह कहने का साहस सम्भवत: सर्वप्रथम स्वामी दयानन्द सरस्वती ने ही किया था। कि “आर्यावर्त भारत आर्यावर्तियों भारतीयों का है।” प्रवचनों के नाध्यम से श्रोताओं को जीवन सत्य सस्ते में चलने और समाजमें फैली कुरूतियों को मिटाने का उपदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि बिना जाने किसी को नही मानना चाहिए। जब तक ज्ञान का बोध्य न हो तब तक संघर्ष जारी रखना चाहिए। जीवन में परोपकार के साथ,सत्य शास्त्रों का उद्धार कर,मत मतांतरों की अविद्या को मिटाकर गर्त में जा रहे लोगों को सही रास्ते में लाया जा सकता है। जीवन मे मानव ने वेदों का अध्यन नही किया तो उनका जन्म लेना सार्थक नहीं हो सकता।

जीवन के कल्याण के मुद्दों पर डाल प्रकाश
पति की मृत्यु के बाद पत्नी को अपने पति की चिता के साथ जीवित ही प्राण त्यागने की अमानवीय कुप्रथा का पुरज़ोर विरोध। और शास्त्रज्ञान अनुसार जीवन के प्रथम पच्चीस वर्ष अविवाहित रह कर ब्रह्मचर्य पालन करना समाज में चल रहे बालविवाह प्रथा का विरुद्ध करना और नारी जाति को समृद्ध समाज का आधार मानना पति की मृत्यु के बाद स्त्री की स्थिति बड़ी दयनीय हो जाती थी। उन्हें प्राथमिक सामान्य मानवीय अधिकारों से वंचित न किया जाए। वही कार्यक्रम में प्रेमलाल साहू,दिनेश चंद्रवंशी,सुनील बघेल,केवल सिंह चंद्रवंशी,सुरेश बिसोने,राधा बिसोने,पुष्पा बघेल,म दन कहर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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NEWS IN English

The light of the Vedas will be ignored by ignorance – Acharya Niranjan

Life is auspicious by making vedic sacrifices in homes

Nanhene chandravanshi
Betul / Sarani Acharya Niranjan ji, who came to Gurukul from the Itarsi era in the Vedic yagna that lasted from 10th to 13th of February in Sarni, said that the ignorance of darkness can be erased from the light of the Vedas. By making Vedic Yajna in the house, keeping the mind calm, it creates an atmosphere of peace and calm in life. From the 10th to 13th February, in the Old F. in the Vedic Yagna, people took part in the Havan from the area. Havana was worshiped from Vedic mantras on the occasion of the Buddha festival of Maharishi Dayanad Saraswati from last 15 years in Sarni. Which ends with a full holocaust on the day of the great saint. Hajj is inserted in the altar with the pronunciation of Ved Mantras in Yajna. Acharya ji told that the smoke coming out of the burning of Havan material is very much rainy as the atmosphere is purified. Significantly, Swami Dayanand Saraswati is commonly known as Arya Samaj’s founder and social reformer. In his efforts for national independence, his remarkable release of Sixteen Sixes of the British and the master of Kurutiyo spread in society had a great opposition. Acharya said in the discourse that the situation of the object is this. That the courage to say this in the aftermath of the Aryavarta India was probably the first thing that Swami Dayanand Saraswati did. That “Aryavarta India is of Indian orthodoxy.” Through the discourses, the audience was given the precepts to walk life cheap and to eradicate the well-being of society. He said that nobody should be treated without knowing it. Conflicts should continue until the knowledge is understood. With charity in life, by saving the true scriptures, the people going to the trough can be brought in the right way by erasing the ignorance of votes. If a person does not study the Vedas in life then it can not be meaningful to take birth.

Lighting on the issues of life’s welfare
After the death of her husband, she is strongly opposed to the inhuman mischief of sacrificing life with her husband’s molestation. And according to scientific knowledge, abiding by unmarried and abiding by celibacy, against the ongoing child marriage system and treating women as the basis of a prosperous society, after the death of her husband, the situation of the woman became very pitiable. They should not be deprived of primary normal human rights. In the same program Premlal Sahu, Dinesh Chandra Vanshi, Sunil Baghel, only Singh Chandravanshi, Suresh Bisone, Radha Bisone, Pushpa Baghel, others along with the funeral were present.

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