बैतूल : जिले में 4 कांग्रेस और भाजपा 1 सीट पर सिमट कर रह गयी, योगेश पण्डाग्रे ने बचाई भाजपा की नाक, पढ़े बैतुल चुनाव परिणाम विशेष

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बैतूल : 4 विधानसभा भाजपा के कब्जे से हुई जिला बाहर, 1 पर अभी भी भाजपा काबिज, 4 पर काँग्रेस


ब्रजकिशोर भारद्वाज/कैलाश पाटिल

विधानसभा क्षेत्र- मुलताई 129

मुलताई विधानसभा क्षेत्र में भाजपा पार्टी का विधायक मुलताई क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे थे। भाजपा ने इस सीट पर अपने प्रत्याशी के तौर पर राजा पवार को टिकट दी जिसके विपक्ष में कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे खड़े हुए थे। जानकारी के अनुसार सुखदेव पांसे इससे पहले भी मुलताई विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। सुखदेव पांसे लगातार 5 साल से चुनाव लड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। राजा पवार भी मेहनत में पीछे नहीं थे। परंतु राजा पवार को समाज की नाराजगी के कारण हार का मुंह देखना पड़ा।


हार जीत का अंतर

बीजेपी – राजा पवार – 65393
कांग्रेस – सुखदेव पांसे – 71716
कांग्रेस 6323 वोटों से जीती

रुझानों में मुलताई विधानसभा से पहले राउंड से ही कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे 1619 मतों से सबसे आगे चल रहे थे। जिसके बाद तीसरे राउंड में भाजपा के राजा पवार 2700 वोटों से आगे चलने लगे। लगातार 13वे राउंड तक भाजपा के प्रत्याशी राजा पवार बढ़त में रहे और ऐसा लग रहा था कि अब तो राजा पवार की जीत निश्चित है। परंतु तभी 15वें राउंड में पासा पलटकर सुखदेव पांसे की ओर आ गया। 15 राउंड के बाद सुखदेव पांसे 702 वोटों से आगे चलने लगे और 21 वे राउंड में कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे भाजपा प्रत्याशी राजा पवार को हराते हुए 6323 वोटों विजयश्री को प्राप्त हुए।

जीत का कारण-

सुखदेव पांसे के जीत का कारण है लगातार 5 सालों से जीतने के लिए आम जनता के बीच में जाकर मेहनत कर रहे थे और चुनाव में मुलताई विधानसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद वह लगातार कार्यकर्ताओ के बीच में रहकर उनसे मतदाताओं का हाल जानते रहे और मतदाताओं ने उनका साथ दिया।

हार का कारण

भाजपा प्रत्याशी राजा पवार की हार का कारण समाज के लोगों की नाराजगी का सामने आना। राजा पवार का आरोपो से घिरे होना जो कि कहीं ना कहीं उनके लिए दुविधा बनकर इस चुनाव में साबित हुआ है। कांग्रेस प्रत्याशी के लगातार 5 साल मेहनत करना।


विधानसभा क्षेत्र- आमला 130

आमला विधानसभा क्षेत्र में इस चुनाव में पार्टी तो वही रही, लेकिन चेहरा बदल गया। बीजेपी ने इस सीट से प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. योगेश पंडाग्रे को अपना प्रत्याशी बनाया था। अपने जनसम्पर्क के दौरान मतदाताओं से सीधा सवांद किया जिससे उन्होंने जनता का विश्वास जीता, और भारी मतों से जीत हासिल की। गौरतलब है कि डॉ योगेश पण्डाग्रे को आमला से 2 बार के विधायक और पिछली बार भारी बहुमत से चुनाव जीते चैतराम मानेकर के स्थान पर टिकट दिया गया था। पार्टी का यह फैसला कारगर साबित हुआ और केवल डॉ. पंडाग्रे ही जिले में पार्टी के इकलौते विधायक चुने गए। कांग्रेस ने इस सीट से आमला के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज मालवे को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उनका चुनाव प्रबंधन इतना लचर रहा, पहले यह सीट पार्टी जीतती हुई लग रही थी, पर आखिरकार उसे गवां बैठी। दूसरी ओर मिलनसार और बेहतर छवि होने से डॉक्टर पंडाग्रे लगातार क्षेत्र के मतदाताओं के मन में उतरते चले गए, इसका नतीजा उन्हें जीत के रूप में हासिल हुआ। खास बात तो यह देखी जा रही है कि डॉक्टर योगेश पण्डाग्रे स्वच्छ छवि के उम्मीदवार थे, इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने से लोगो ने उन पर भरोसा जताया है।

चुनाव में मिले मतो के अंतर

भाजपा से योगेश पण्डाग्रे – 73481
काग्रेस से मनोज मालवे – 54284

योगेश पंडाग्रे 19197 मतों से जीते।

वही रुझानों में आमला विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी मनोज मालवे, भाजपा प्रत्याशी डॉ. योगेश पंडाग्रे, गोंगपा पार्टी से राकेश महाले आमला विधानसभा में तेजी से बढ़ रहे थे। जिसमे की भाजपा प्रत्याशी डॉ. योगेश पण्डाग्रे पहले रॉउंड से ही सभी प्रत्याशियों से आगे चल रहे थे। जिसमे शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि भाजपा की हार निश्चित है, या फिर जीत का अंतर ज्यादा नही आएगा। शुरू से ही भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी से 1000, 275, 200, 371 मतों से आगे चल रहे थे। उसके बाद लगभग 12-13 राउंड में भाजपा प्रत्याशी की बढ़त 7364 मतों से आगे जो बड़ी फिर भाजपा प्रत्याशी ने 21वे एवं अंतिम राउंड में 19197 मतों से आगे आए और जीत हासिल की ।

विनिंग फैक्टर

नया चेहरा और उच्च शिक्षित होने से लोगों ने उन पर पूरी तरह से भरोसा किया कि क्षेत्र की सभी समस्याओं का निदान अवश्य करेंगे, कार्यकर्ताओ के बीच में लगातार बने रहना। किसी भी प्रकार का कोई भी आरोप-प्रत्यारोप ना लगना।

हार का कारण

कांग्रेस प्रत्याशी का नपा अध्यक्ष का कार्यकाल कुछ खास नहीं रहा था, जिसके चलते उनसे लोगों को बहुत अधिक उम्मीद भी नहीं रही। कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव की कमान ऐसे लोग संभाल रहे थे जिन्हें न क्षेत्र की समझ थी और न ही चुनावी रणनीति का ही ज्ञान था और भाजपा के पूर्व विधायक को 10 साल का अवसर देने के बावजूद कोई उपलब्धि नहीं दिलाने के कारण इस बार डॉ. पंडाग्रे पर जताया भरोसा। सारनी क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की नाखुशी। माना जा रहा है, की गोंगपा के प्रत्याशी राकेश महाले ने कांग्रेस के कई वोट काटे है।

यह रहेगी प्राथमिकता

क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

आमला में रेलवे के कुछ बड़े प्रोजेक्ट लाने के लिए सच्चे मन से प्रयास किए जाएंगे।

लगातार उजड़ते जा रहे सारनी और पाथाखेड़ा नगरों को उनका पुराना गौरव वापस दिलवाएंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की सभी दूर व्यवस्था कराएंगे ताकि लोगों को परेशान न होना पड़े।

चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देकर स्थिति में सुधार किया जाएगा।


विधानसभा क्षेत्र- बैतूल 131

बैतूल विधानसभा क्षेत्र में इस चुनाव में काफी बड़ा बदलाव हुआ है जो की काफी अधिक मतों के साथ हुआ है। यहाँ इससे पहले भाजपा के प्रत्याशी थे, जिस सीट पर अब कब्ज़ा कांग्रेस का हो चूका है। कॉंग्रेस ने इस सीट से निलय डागा को अपना प्रत्याशी बनाया था। निलय डागा ने भी अपने जनसम्पर्क के दौरान मतदाताओं से सीधा सवांद किया जिससे उन्होंने जनता का विश्वास जीता और उन्हे भारी मतों से जीत हासिल हुई है। भाजपा ने इस सीट से बैतूल के विधायक हेमंत खंडेलवाल को अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन हेमंत खण्डेलवाल से पार्टी के कई कार्यकर्ताओ की नाराजगी के कारण हार का मुँह देखना पड़ा। दूसरी ओर कार्यकर्ताओ में निलय डागा को जिताने का उत्साह और क्षेत्र के मतदाताओं के मन में उतरते चले जाना इसका नतीजा उन्हें जीत के रूप में हासिल हुआ।

चुनाव में मिले मतो के अंतर

बीजेपी – हेमंत खंडेलवाल – 70966
कांग्रेस -निलय डागा – 92707

निलय डागा 21700 मतों से विजयी हुए।

रुझानों में

वही रुझानों में बैतूल विधानसभा से रुझानों में कांग्रेस प्रत्याशी निलय डागा, भाजपा प्रत्याशी हेमंत खण्डेलवाल से तेजी से बढ़ रहे थे। जिसमे की कांग्रेस प्रत्याशी निलय डागा पहले रॉउंड से ही सभी प्रत्याशियों से आगे चल रहे थे। जिसमे शुरुआत में ही सभी कार्यकर्ताओ ने निलय डागा की जीत घोषित कर दी थी। और जश्न मानना शुरू कर दिया था। शुरू से ही कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी से 960 मतों से आगे चल रहे थे। वे लगातार हर राउंड में लीड लेते रहे उसके बाद लगभग 21वे राउंड में 21700 मतों से आगे निकल कर विजयी हुए।

विनिंग फैक्टर

डागा फॉउंडेशन, नया चेहरा और उच्च शिक्षित होने से लोगों ने उन पर पूरी तरह से भरोसा कियाया कि क्षेत्र की सभी समस्याओं का निराकरण करेंगे। कार्यकर्ताओ के बीच में लगातार बने रहना। किसी भी प्रकार का कोई भी आरोप-प्रत्यारोप ना लगना।

हार का कारण

भाजपा प्रत्याशी हेमंत खंडेलवाल की हार का कारण तो सबसे पहले मतदाताओं के अंदर रोष। जिला अध्यक्ष को बदलना एवं बॉडी को स्थगित करना। लता मस्कीय का बागी होना। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की एवं पदाधिकारियों की नाराजगी जो कि खुलकर चुनाव में सामने आई है।

 


विधानसभा क्षेत्र- घोड़ाडोंगरी 132

घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी ने सीट पर अपना कब्जा कर लिया है। इससे पहले भाजपा के मंगल सिंह धुर्वे इस सीट पर विराजमान थे। जिसे आम जनता के मतों के हिसाब से अब कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मा भलावी ने जीत लिया है। भाजपा ने अपने प्रत्याशी के तौर पर गीता रामजीलाल उइके को चुना था। कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के तौर पर ब्रह्मा भलावी को चुना था। जिसमें कि दोनों प्रत्याशियों के द्वारा काफी जोरो-शोरों से आम जनता के बीच में जाकर जनसंपर्क किया गया था।

जीत का अंतर

बीजेपी – गीता उइके – 728821
कांग्रेस – ब्रम्हा भलावी – 90423
कांग्रेस 17602 वोटों से जीती

रुझानों में

रुझानों में तो घोडाडोगरी विधानसभा से पहले राउंड में कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मा भलावी 884 मतों से आगे चल रहे थे। जिसके बाद सातवें राउंड में पासा पलटते हुए भाजपा की प्रत्याशी गीता रामजीलाल उइके 5127 वोटों से आगे चलने लगी। जिसके बाद पुनः पासा पलटते हुए कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मा भलावी 17वे राउंड में साथ रहे 7415 मतों से आगे चलने लगे। वही वह 25 वे राउंड में 17602 मतों से विजयश्री को प्राप्त हुए।

 

विनिंग फैक्टर

कांग्रेस प्रत्याशी ब्रह्मा भलावी के जितने का विंनिग फैक्टर यह रहा कि वे इससे पहले घोडाडोगरी उपचुनाव में भी खड़े हुए थे, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद से उन्होंने लगातार आम जनता के बीच में जनसंपर्क बनाए रखा और इस बार विजयश्री हुए।

हार का कारण

इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हारने का कारण यह रहा कि भाजपा से गंगा सज्जन सिंह टिकट मांग रही थी। परंतु उन्हें टिकट नहीं मिली जो कि गीता रामजीलाल उइके को मिली। जिसके बाद उनके समर्थकों ने गंगा सज्जन उइके को चुनाव लड़ने हेतु मजबूर किया। उसके बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों को मनाने के बाद गंगा सज्जन सिंह उइके मानी थी। कहीं ना कहीं गंगा सज्जन सिंह उइके के समर्थकों के भीतरघात के कारण गीता रामजीलाल उइके को हार का सामना करना पड़ा। वहीं विधायक मंगल सिंह धुर्वे के कार्यकाल में कब्जा किए गए जमीनों के स्थाई पट्टे बांटना भी इस चुनाव में चर्चा में रहा है।


विधानसभा क्षेत्र- भैसदेही 133

भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र से भाजपा पार्टी का विधायक क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे थें। परंतु इस सीट पर अब कांग्रेस ने अपना कब्जा जमा लिया है। इस सीट पर तो शिवराज सिंह चौहान ने भी काफी कोशिशें की कि वे जीत जाए और उन्होंने यहां पर अपनी सभाये भी की है परंतु यहां पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी के तौर पर महेंद्र सिंह चौहान को खड़ा किया, वहीं दूसरी और कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर धरमु सिंह सिरसाम को खड़ा किया। आपको बता दें कि महेंद्र सिंह चौहान अभी फिलहाल में तो भैंसदेही विधानसभा से विधायक थे। जिसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी धरमु सिरसाम को जनता को चुनते हुए क्षेत्र का विधायक चुना।

जीत का अंतर

बीजेपी – महेंद्र सिंह चौहान – 73712
कांग्रेस – धरमु सिरसाम – 104592
कांग्रेस 30880 वोटों से जीती

विनिंग फैक्टर

भैंसदेही विधानसभा में धरमु सिरसाम की जीत का विनिंग फैक्टर यही रहा कि उनकी साफ स्पष्ट छवि मतदाताओं के बीच में रही। और आम जनता भैसदेही क्षेत्र में बदलाव चाहती थी।

हार का कारण

भैंसदेही क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान की हार का कारण है कि विल लगातार कई भाषाओं विवादित भाषा बोल देते थे जिससे की आम जनता में गुस्सा उत्पन्न हो चुका था। और आम जनता भाजपा प्रत्याशी से काफी ज्यादा नाराज चल रही थी।

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