राफेल पर सामने आई ऐसी चिट्ठी, मोदी सरकार को देनी पड़ रही है सफाई

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राफेल पर सामने आई ऐसी चिट्ठी, मोदी सरकार को देनी पड़ रही है सफाई

आम चुनावों से पहले संसद के बजट सत्र में विपक्ष एक बार फिर राफेल सौदे पर सवाल उठाते हुए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) की मांग दोहरा रहा है. विपक्ष ने मीडिया में प्रकाशित राफेल सौदे से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए एक बार फिर अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि ताजा तथ्यों से साफ है कि राफेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप था, लिहाजा अब उन्हें सिर्फ जेपीसी पर भरोसा है.

चिट्ठी में क्या लिखा है?

एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित सरकारी दस्तावेज दावा कर रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने राफेल सौदे के संदर्भ में रक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था. पत्र में रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में समानांतर बातचीत से रक्षा मंत्रालय की नेगोशिएशन टीम की कोशिशों को धक्का लग सकता है.

मंत्रालय की तरफ से रक्षा मंत्री को गए इस पत्र को मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी एसके शर्मा ने 24 नवंबर 2015 को जारी किया और इस पत्र को मंत्रालय में रक्षा सौदों के लिए जिम्मेदार डायरेक्टर जनरल एक्विजिशन की सहमति थी.
विपक्ष का क्या आरोप है?

इस पत्र को आधार बनाते हुए दिन की संसद की कारवाई में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने सवाल उठाया कि जब राफेल विमान खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय और फ्रांस सरकार के बीच बातचीत जारी थी तो क्यों प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप किया गया? वहीं इन्हीं तथ्यों के आधार पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और एयर चीफ मार्शल इस मुद्दे पर अलग-अलग बात कह रहे हैं तब सच्चाई उजागर करने के लिए सिर्फ जेपीसी का रास्ता बचता है.

सरकार ने क्या सफाई दी है

सामने आए नए तथ्य और विपक्ष के आरोपों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सरकार की तरफ से सफाई दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल मामले पर सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के सामने है. लिहाजा, विपक्ष सिर्फ गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम कर रहा है.
निर्मला सीतारमण ने रक्षा मंत्रालय की नोटिंग पर कहा कि मीडिया में फाइल नोटिंग को पूरी तरह नहीं प्रकाशित किया गया है. निर्मला ने कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा सचिव की फाइल नोटिंग का स्पष्ट जवाब दिया था. लिहाजा इस संदर्भ में तत्कालीन रक्षा मंत्री का जवाब बेहद अहम है जिसे न तो प्रकाशित किया गया और न ही विपक्ष ने उठाया.

निर्मला सीतारमण ने सदन में बताया कि मनोहर पर्रिकर ने अपनी फाइल नोटिंग में रक्षा सचिव से साफ-साफ कहा कि मामले में शांत रहने की जरूरत है क्योंकि चीजें सही दिशा में चल रही हैं और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है.
लिहाजा, निर्मला सीतारमण ने सदन में दलील दी कि यदि किसी मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय प्रगति जानना चाहता है तो उसे हस्तक्षेप नहीं कहा जाना चाहिए. विपक्ष के रुख को राजनीति और कॉरपोरेट वॉरफेयर से जोड़ते हुए निर्मला ने कहा कि विपक्ष मल्टीनेशनल कंपनियों की युद्ध नीति से प्रेरित है और वह महज राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है.

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NEWS IN ENGLISH

Such a letter appeared on Rafael, Modi government has to give cleanliness

In the budget session of Parliament before the general elections, the opposition is once again raising the demand of the Joint Parliamentary Committee (JPC), raising questions over the Rafael deal. Referring to the facts related to the Raphael deal published in the media, once again, reiterating their allegations, the latest fact is clear from the fact that the Prime Minister’s Office interference was in the Rafael deal, so now they have only trust in the JPC.

What is written in the letter?

The official document, published in an English newspaper, is claiming that the Ministry of Defense wrote a letter to the Defense Minister in connection with the Rafael deal. In the letter, it was said from the Ministry of Defense that the efforts of the Negotiations team of the Ministry of Defense could be shocked by the Prime Minister’s Office parallel talks in the Rafael Deal.

This letter, issued to the Defense Minister on behalf of the Ministry, was released by the Deputy Secretary SK Sharma in the Ministry on November 24, 2015 and this letter was agreed by the Director General Acquisition, responsible for the defense deals in the Ministry.
What is the allegation of the opposition?

In the proceedings of the day’s parliament, Trinamool Congress MP Saugata Roy raised the question that when the talks between the Defense Ministry and the French government were to buy the Rafael aircraft, then why did the Prime Minister’s Office intervene? On the basis of these facts, Congress leader Mallikarjun Kharge said this as a serious matter and said that when the Prime Minister, Defense Minister and Air Chief Marshal are speaking differently on the issue, then only the way the JPC is left to highlight the truth.

What is the government’s clearance

Defense Minister Nirmala Sitharaman cleared the government’s behalf in the Lok Sabha between new facts and allegations of opposition. The Defense Minister said that all allegations on Rafael’s case have been dismissed and the Supreme Court’s decision is in front of the country. So, the opposition is just trying to uproot the idiots.
Nirmala Sitharaman said on the notice of the Ministry of Defense that file notation has not been fully published in the media. Nirmala said that the then Defense Minister Manohar Parrikar gave a clear reply to the file secretary of the defense secretary. So in this context, the answer to the then defense minister is extremely important, which neither was published nor did the opposition raise it.

Nirmala Sitharaman told in the House that Manohar Parrikar in his file notation asked the Secretary of Defense clearly that there is a need to remain calm because the things are going in the right direction and there is no possibility of any kind of disturbances.
Therefore, Nirmala Sitharaman argued in the House that if in any case the Prime Minister’s Office wants to know the progress then it should not be called interference. Linking the stand of the opposition to politics and corporate warfare, Nirmala said that the opposition is inspired by the war policy of multinational companies and it is doing politics on the issue of national security for political gain only.

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