बैतूल : परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से उबारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका हो, मैदानी शिक्षा अमले की बैठक में बोले कलेक्टर

Advertisements

बैतूल : परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से उबारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका हो, मैदानी शिक्षा अमले की बैठक में बोले कलेक्टर


बैतूल, (गजेंद्र सोनी)। कलेक्टर श्री तरूण कुमार पिथोड़े ने कहा कि शिक्षक ज्ञान के सूत्रधार होते हैं। उनकी भूमिका बच्चों के भविष्य संवारने में अति महत्वपूर्ण होती है। बच्चों का भविष्य संवारने के साथ-साथ वे समाज का भविष्य संवारने के भी सूत्रधार बनें। मौजूदा समय में जल संकट को देखते हुए समाज में जल बचाने की क्रांति लाने के लिए शिक्षक अहम् भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षक न केवल बच्चों, बल्कि समाज से भी सरोकार रखते हैं। वे बच्चों एवं उनके अभिभावकों को जल बचाने के लिए प्रेरित करें तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं के निर्माण के प्रति जन जागरूकता लाने में अपना योगदान दें। श्री पिथोड़े रविवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित शैक्षणिक संस्थाओं के प्रमुखों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री क्षितिज सिंहल, जिला शिक्षा अधिकारी श्री बीएस बिसोरिया, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री अमरनाथ सिंह सहित शिक्षा विभाग का मैदानी अमला मौजूद था।

कार्यशाला में कलेक्टर ने आगे कहा कि पिछले वर्षों से जिले में हुई अल्प वर्षा के कारण पानी की समस्या धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसी स्थिति में वर्षा जल को सहेजने हेतु हमें गांव-गांव में कदम उठाना पड़ेंगे। जल संरक्षण की दिशा में उठने वाला हर कदम भविष्य में सकारात्मक परिणाम भी देगा। कलेक्टर ने कहा कि जिले के प्रत्येक गांव में खेत-तालाब एवं जल संरचनाओं का निर्माण करवाया जा रहा है। शिक्षकगणों से अपेक्षा है कि वे बच्चों एवं ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें जल संरचनाएं बनाने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा प्रत्येक स्कूल में आवश्यक रूप से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगवाएं। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री क्षितिज सिंहल ने शालाओं में लगे हैण्डपंपों के आसपास सोख्ता गड्ढा निर्माण करवाने के लिए भी प्राचार्यों से अपेक्षा की। कार्यशाला में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जल संरक्षण के महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदुओं की जानकारी भी उपस्थित प्राचार्यों को दी गई।


परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को विद्यार्थियों को हतोत्साहित न होने दें


कार्यशाला में कलेक्टर ने प्राचार्यों से कहा कि वार्षिक परीक्षाओं का समय आ गया है। बच्चों को पढ़ाई के लिए उचित मार्गदर्शन देना सभी शिक्षकों का दायित्व है। शिक्षक इस बात पर विशेष ध्यान दें कि बच्चे परीक्षा को लेकर तनाव में न आएं और न ही वे हतोत्साहित हों। पढ़ाई के प्रति उनका पूरी तरह उत्साहवद्र्धन किया जाए। समय-समय पर बच्चों की काउंसिलिंग कर अध्ययन की उचित सलाह दी जाए। बच्चों को समझाईश दी जाए कि वे मेहनत से पढ़ाई करें, अंकों की चिंता न करें। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी श्री बीएस बिसोरिया ने विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से शाला स्तर पर जल संरक्षण से संबंधित चित्रकला, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ, पत्र लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि शिक्षक एवं प्राचार्य अपने क्षेत्र के किसी गांव को गोद लेकर उस गांव में जल संरक्षण के लिए कार्य करें। वहीं सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री अमरनाथ सिंह ने भी जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में भी जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने एवं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने के प्राचार्यों को निर्देश दिए। कार्यशाला में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुलताई के शिक्षक श्री गिरीश साहू और श्री आरके मालवीय ने पिछले वर्षों में जल संरक्षण पर किए कार्यों पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया।


प्रार्थना सभा में किया जाए जल संरक्षण का जिक्र


प्रत्येक स्कूल में कक्षाएं प्रारंभ होने के पूर्व आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा में प्रतिदिन जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालने के भी शिक्षकों को कार्यशाला में निर्देश दिए गए।


वाटर हार्वेस्टिंग के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई


कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ ने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने एवं जल स्त्रोतों को रिचार्ज करने के लिए सोख्ता गड्ढा बनाने की तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध कराई।


Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!
WhatsApp chat
%d bloggers like this: