आठनेर : लापरवाही की भेंट चढ़ रही अरबो की सड़क, PWD विभाग मौन

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आठनेर : लापरवाही की भेंट चढ़ रही अरबो की सड़क, PWD विभाग मौन


आठनेर (प्रकाश खातरकर)। नियम कायदे और प्राक्कलन को नजरअंदाज कर अपनी मनमर्जी से कार्य कैसे होता है उसकी बानगी इस समय आठनेर नगर में आसानी से देखी जा सकती है।जिम्मेदार विभाग PWD के इंजीनियर से लेकर एक्सक्यूटिव स्तर के अधिकारी रोजाना हो रही शिकायतो के बाद मौन साधे बैठे है। जिम्मेदार विभाग के इस संदिग्ध मौन का फायदा उठाकर टी बी सी एल कंपनी का अधिकांश कार्य रात में हो रहा है।चुंकी इस सड़क निर्माण का कार्य नगरीय क्षेत्र में होने से शिकवा शीकायते और नियम कायदे को समझने वाले हल्ला मचा रहे परन्तु नगर परिषद और पी डब्लू डी के उदासीन रवैय्ये से अरबो रु की सड़क लापरवाही की भेंट चढ रही है। सड़क बना रही टी बी सी एल कंपनी का कार्य इस समय आठनेर के नगरीय क्षेत्र में प्रगतिरत है। जिसके तहत 10 मीटर सड़क के दोनों ओर ड्रेन याने बड़ी नालियों का निर्माण भी सड़क के साथ ही चल रहा है।लेकिन जिस गति से टी बी सी एल कम्पनी अपनी समयावधि में निर्माण कार्य को अंजाम दे रही है उसमें कार्य की गुणवत्ता तो प्रभावित हो ही रही है साथ मे प्राक्कलन के मुताबिक निर्माण कार्य नही होने से नगर वासीयो के लिए स्थाई परेशानीयो का कारण भी बनने जा रही है। इस गंभीर मामले के जानकार और सेवा निवृत्त हो चुके आर ई एस के एस डी ओ कमलाकर धाडसे की मॉने तो आठनेर के नगरीय क्षेत्र में यह कम्पनी मनमाने ढंग से प्राक्कलन को दरकिनार कर कार्य कर रही है। उनके द्वारा इस प्रतिनिधि को साथ मे लेकर कीये गए सड़क के मुआयना में लापरवाही लंबी लिस्ट है मगर पी डब्ल्यू डी विभाग के निकम्मे कर्मचारी और अधीकारीयो ने इस मामले को लेकर मौन साध रखा है। शरीके जुर्म नगर परिषद के भी अधिकारी है परन्तु वे भी स्थानीय जनप्रतिनिधीयो के हस्तक्षेप का इंतजार कर रहे है। बहरहाल टी बी सी एल कम्पनी जो कार्य कर रही है उस कार्य की गुणवत्ता को परखने और देखने वाला साइड पर कोई भी कर्मचारी और अधिकारी मौजूद नही होने से कम्पनी निर्माण कार्य मे हद से ज्यादा अनियमित्ता बरत रही है।अभियांत्रिकी तौर पर इस निर्माण कार्य का जायजा लेने पर जो खास तथ्य उभर कर आये उसके मुताबिक सड़क निर्माण में जो गिट्टी, और मुरुम प्रयुक्त की जा रही है उसमें 40 प्रतिशत मिट्टी होने से सड़क की क्षमता और अवधी प्रभावित हो रही है। सड़क के दोनों ओर बनने वाली नाली और सड़क का कोई लेबल का मिलान नही होने से नालीयो से पानी कहा और कैसे निकलेगा का जवाब कम्पनी दे रही न पी डब्लुय डी विभाग के नीकम्मे अफसर?? नाली की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को ही सड़क पर बिछाया जा रहा जबकी प्राक्कलन में स्पष्ट निर्देश है की मुरम बिछाकर उसे भारी दबाव से समतल कीया जाए इसके अलावा नाली निर्माण के प्रावधान भी प्राक्कलन में उल्लेखीत है जिसके अनुसार नाली का बेस कांक्रीट 10 सेंटीमीटर होना चाहिए परन्तु यह बेस और कांक्रीट महज 2 से 3 सेंटीमीटर ही है। नाली निर्माण का स्लोप सही दिशा में नही होने से पानी कैसे और कहा नीकलेंगा वह गंभीर प्रश्न बना हुआ है।सड़क की बात करे तो नगरीय क्षेत्र में इस सी सी सड़क में भारी वाहनों को बर्दाश्त करने के लिए 30 से 32 एम एम की सरिया का उपयोग होना चाहिए था पर कम्पनी 16 एम एम की सरीया लगाकर कीसी भी तरह से आनन फानन में सड़क बनाने पर उतारू दीख रही है। इस मामले को लेकर सेवानिवृत्त इस डी ओ कमलाकर धाडसे ने नगर परिषद सी एम ओ से लेकर कलेक्टर को भी शिकायत की परन्तु इस ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है।शिकायतकर्ता के अनुसार निर्माणाधीन नालियों में लोग अपने सेप्टिक टैंक का ओवरफ्लो निकलने वाले दुर्गंध युक्त पानी की सप्लाई वाले पाइप डाल दे रहे है जो आने वाले समय मे नागरिको अन्य लोगो को बीमार करने में सहायक सीद्ध होंने वाला है।धाडसे अपनी शिकायत में उपरोक्त तमाम तकनीकी खामियों और भविष्य की परेशानीयो का जिक्र कीया है मगर इस ओर नगर परिषद का ध्यान है न ही निकम्मे विभाग पी डब्ल्यू डी का नतीजतन टी बी सी एल कम्पनी जमकर मनमानी करते हुए कीसी तरह कार्य समाप्त करते हुए दिख रही है।

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