टीबीसीएल कम्पनी किसके आदेश पर बना रही 10 मीटर के बजाय 7 मीटर की सड़क

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टीबीसीएल कम्पनी किसके आदेश पर बना रही 10 मीटर के बजाय 7 मीटर की सड़क


आठनेर (प्रकाश खातरकर)। राजनीतिक उठापटक में उलझी आठनेर नगर सीमा में बन रही सीसी रोड जो 10 मीटर चौड़ाई की स्वीकृत होने के बावजूद अचानक कैसे सात मीटर की बन रही है उसे लेकर नगर में माहौल गरमाने लगा है। कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी इस मामले को लेकर चुप्पी साधे बैठे है। जबकी डीपीआर में स्पष्ट उल्लेख है की आठनेर की नगर सीमा में 10 मीटर चौड़ाई की सड़क बनना है उसके बाद भी कम्पनी ने इस सड़क की चौड़ाई घटाकर अपनी मर्जी से सात मीटर कर निर्माण कार्य को अंजाम देने में लगी है। अब प्रश्न यह है की डीपीआर में कोई संशोधन नही हुआ उसके बावजूद आठनेर की नगरीय सीमा में 10 मीटर की सड़क को 7 मीटर कीसके आदेश पर कीया गया और निर्माण कार्य भी 7 मीटर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।महज इस एक बिन्दु से समझा जा सकता है, की टीबीसीएल कम्पनी को पहले याने भाजपा के शासन और आज काँग्रेस के शासन में किसके वरदहस्त प्राप्त है। जो प्राक्कलन को नजरअंदाज कर अपनी मनमर्जी का खुला प्रदर्शन कर जनता के हितों से खिलवाड़ कर रही है। और उसका खुलकर समर्थन पीडब्ल्यूडी विभाग कर रहा है। रात के अंधेरे में निर्माण कार्य कर रही इस कंपनी ने नियम कानून की धज्जीया उड़ाते हुए नाली निर्माण का कार्य पेटी पर दिया है भीन्ड और बालाघाट के ठेकेदार नाली बना रहे है। जब से नाली बन रही है तब से तराई नही हुई है। इसका जवाब देते हुए पेटी कांट्रेक्टर कहते है कम्पनी पानी डालेगी। इस चकित करने वाले जवाब से लोग नाराज है। नाली मे तराई नही होने से नाली के स्लेब मे जगह – जगह हेयर क्रेक आ रहे है। अभी सडक का फाइनल क्रांक्रीट की लेयर डल रही है परन्तु दो दिन पुराने कार्य की तराई के नाम पर नाम मात्र एक बार पानी का छिडकाव किया जा रहा है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है की क्रांक्रीट मिलर मे लाकर सडक पर डलना चाहिए मगर इस सवा अरब की सड़क पर कांक्रीट मसाला 5 किमी दूर से डम्फर मे भरकर क्रांक्रीट लाया जा रहा है और वह सडक पर डालकर फैलाया जा रहा है, जिससे क्रांक्रीट स्थल पर आते आते मसाले के डिगले बन रहे है। कहने का मतलब यह मसाला किसी भी दृष्टीकोन से इस सड़क पर बिछाने योग्य नही है। लेकिन इस भारीभरकम राशी के सड़क का निगहबान ही कोई नही है तो कम्पनी अपनी मनमानी तो करेंगी ही। बड़ा सवाल यह की जब नगरीय क्षेत्र के अंदर जनता की आंखों मे धुल झोकी जा रही है तो सोचो नगर क्षेत्र के बाहर सड़क निर्माण में कितनी धाधली बरती गई होंगी। इस नगर क्षेत्र की सीमा में फाईनल बेस तराई एक दिन भी नही हुई है जबकी बेस के उपर से लगातार ट्राफिक चलते रहा क्रांक्रीट की धुल उडती रही बगैर बेस मजबूत हुये छठवें दिन फाईनल बेस का कांक्रीट कर देना पीडब्ल्यूडी विभाग के मुह पर तमाचा जैसे है, परन्तु विभाग तकनीकी मापदंडों को नजरअंदाज कर इस तरह के तमाचों को सहन कर रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग के रोस्टर को देखे तो नियमित रूप से उपयंत्री साइड पर निगरानी रखे, एसडीओ से लेकर एक्सक्यूटिव इंजीनियर तक की भूमिकाये तय होने के बाद कोई सड़क निर्माण की सुध नही ले रहा है। नगर के अनेक पार्षदों ने आरोप लगाया की अधिकारियों की मिली भगत से कम्पनी ने जिन पुलियो का निर्माण किया है, उसमे छोटे छोटे नालो पर जिसका पानी आधे कि.मी.से आता है उस पर हाई लेवल ब्रिज बना दिये है, जिसमे शासन का करोड़ों रूपये पानी की तरह खर्च कर दिया है। अनेक उदाहरण है जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है की जिस नाले का पानी एक स्पान से आसानी से निकल जाता है वहा पर दो से तीन स्पान बनाये है। कैचमेंट पर डिजाइन के आधार पर पुलिया नही बनाई है उदाहरण बतौर वायगाव के पास दोनो पुलिया देख सकते है। इस प्रकार इनके काम की जाचं सी.टी से करने हेतु शिकायत करने की तैयारी चल रही है। आक्रोशित जानकारों ने बताया की आठनेर नगर के बाहर पांच मीटर रोड की चौडाई बनाई है जिससे दो गाडी पास नही होती, सडक की चौडाई 7 मी होना था लगता है पुलियो पर ज्यादा राशी खर्च करने के चक्कर मे रोड की चौडाई कम कर दी यह भी जांच का विषय है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस 80 किमी सड़क में जगह जगह टेक्निकल माप दन्डो को ताक पर रखकर कार्य को अंजाम दिया गया है जो जांच का विषय है।


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