शीर्षासन की मुद्रा में योग आयोग, ठंडे बस्ते में शिक्षकों की नियुक्ति

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शीर्षासन की मुद्रा में योग आयोग, ठंडे बस्ते में शिक्षकों की नियुक्ति

रायपुर। प्रदेश में भाजपा सरकार के शासनकाल में गठित योग आयोग आज शीर्षासन की मुद्रा में पहुंच गया है। आयोग की गतिविधियां केवल कार्यशाला व जागरण यात्रा तक ही सीमित रह गई हैं। स्कूलों में योग शिक्षकों की भर्ती का मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ है।

इससे प्रदेश के उन तकरीबन चालीस हजार युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है, जो योग की डिग्री/डिप्लोमा लेने के बाद नौकरी की रात ताक रहे थे। वहीं दूसरी ओर योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए पहली से हायर सेकंडरी तक के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर छपवाई पुस्तकें भी स्कूलों के गोदामों में धूल खा रही हैं।
बेरोजगारी के दौर में प्रदेश में योग आयोग का गठन होने के बाद शिक्षित युवाओं को उम्मीदों की किरण नजर आई थी। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय समेत विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों से करीब पचास हजार रुपये खर्च कर योग में डिग्री और डिप्लोमा लिया। लेकिन उन्हें नौकरी तो दूर, इसकी सुगबुगाहट भी नजर नहीं आ रही है।

जागरण रैली में साढ़े तीन करोड़ खर्च

छत्तीसगढ़ योग प्रशिक्षण संघ के अध्यक्ष विक्रम साहू कहते हैं कि गत वर्ष प्रदेशभर में योग जागरण रैली व राष्ट्रीय सेमीनार पर ही करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सेमिनार में करीब 40 लाख रुपया खर्च कर दिया गया, जबकि यह आयोजन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में होना था। कम से कम शैक्षणिक संस्थाओं व शासकीय अस्पतालों में योग ट्रेनर की नियुक्ति की जाए।

सात दिनी प्रशिक्षितों की पूछपरख
विडंबना ही है कि योग में डिग्री-डिप्लोमाधारी युवाओं की पूछ-परख आयोग की ओर से आयोजित योग शिविरों तक में नहीं होती। यहां पतंजली योग समिति व श्री श्री रविशंकर जैसे संस्थाओं से महत सात दिन का प्रशिक्षिण लिए युवाओं को प्रमुखता दी जाती है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से बात करो तो कहते हैं कि योग करने से किसने रोका है।

पुरुष ट्रेनर की मांग कम
योग की पढ़ाई करने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर आमदनी के लिए ये प्रशिक्षित युवा किसी सोसायटी अथवा संगठन में योग की ट्रेनिंग दे रहे हैं। लेकिन ज्यादातर स्थानों पर विशेष रूप से महिला ट्रेनर की मांग की जाती है। ऐसे में पुरुष ट्रेनरों के सामने विकल्प काफी कम है।

– योग आयोग को बंद करने की चर्चा सही नहीं है। फिलहाल लोकसभा का चुनाव व आचार संहिता के चलते आयोग की गतिविधियां जरूर कम हुई हैं। – एमएल पांडेय, सचिव छत्तीसगढ़ योग आयोग
– योग में प्रशिक्षित कोई भी शिक्षक फिलहाल किसी स्कूल में नहीं हैं। विषय शिक्षकों को ही योग की ट्रेनिंग देकर छात्रों को प्रशिक्षित किया जाता है। – एएन बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी

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NEWS IN ENGLISH

Yoga Commission in the currency of Shirshasan, appointment of teachers in cold storage

Raipur. The yoga commission formed in the reign of BJP government in the state has reached the pinnacle of today’s titles. The activities of the Commission are limited to workshop and Jagaran Yatra only. The case of recruitment of Yoga teachers in schools is seen in cold storage.

This seems to have turned around the expectations of nearly forty thousand youth in the state, who were waiting for a job after getting a Yoga degree / diploma. On the other hand, in order to include yoga in the curriculum, spending crores of rupees for the Higher Secondary from the first and the Chhapwai books are also eating dust in schools’ warehouses.
After the formation of the yoga commission in the state of unemployment, educated youths had a ray of hope. He spent around fifty thousand rupees from various training institutions including Pt. Ravi Shankar Shukla University and took a degree and diploma in Yoga. But they are not able to see their fluttering away from the job.

Jagan Rally spent three and a half million

Vikram Sahu, president of Chhattisgarh Yoga Training Association, says that last year, about three and a half crore rupees were spent on Yog Jagaran Rally and National Seminar in the state. In the Pandit Deendayal Upadhyay Auditorium, about 40 lakh rupees was spent in the national seminar, whereas this event was to be held at the Pt. Ravi Shankar Shukla University Auditorium. Yoga trainer should be appointed at least in educational institutions and government hospitals.

Inquiries of seven days trained
Ironically, inquiries of degree-diplomatic youth in yoga are not in the yoga camps organized by the commission. Here, youths are given prominence for seven days of special training from institutions such as Patanjali Yoga Committee and Sri Sri Ravi Shankar. Talk to departmental officers in this regard, then say who has stopped doing yoga.

Less demand for male trainer
After earning a job after studying yoga, these trained youth are giving training in yoga in any society or organization for income. But in most places a special woman trainer is demanded. In this case, the options for male trainers are quite low.

– Discussion of closure of Yoga Commission is not correct. At present, due to the election of the Lok Sabha and the Code of Conduct, the activities of the Commission have definitely diminished. – ML Pandey, Secretary, Chhattisgarh Yog Commission
– Any teacher trained in yoga is not currently in any school. Students are trained by giving training to yoga only to subject teachers. – AN Banjara, District Education Officer

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