इस मंदिर में देवी की प्रतिमा जहां रखी, वहां से हिली नहीं, इसलिए दिखती है तिरछी

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इस मंदिर में देवी की प्रतिमा जहां रखी, वहां से हिली नहीं, इसलिए दिखती है तिरछी

रायपुर । अमूमन मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बिलकुल सीधी दिखाई देती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हजारों साल पुराने मां महामाया देवी मंदिर में विराजी मां की मूर्ति थोड़ी-सी तिरछी दिखती है। इसका कारण यह बताया जाता है कि कल्चुरि वंश के राजा मोरध्वज, मां के स्वप्न में दिए आदेश पर खारुन नदी से प्रतिमा को सिर पर उठाकर पांच किलोमीटर पैदल चले।

जब थक गए तो प्रतिमा को एक शिला पर रख दिया। रखते समय प्रतिमा थोड़ी तिरछी हो गई। इसके बाद लाख कोशिश की गई, किंतु प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। मजबूर होकर उसी अवस्था में मंदिर का निर्माण किया गया। यही वजह है कि प्रतिमा तिरछी दिखाई देती है।
ऐसी मान्यता है कि राजा मोरध्वज खारुन नदी के तट से गुजर रहे थे। नदी की बीच धार में देवी मां की प्रतिमा दिखाई दी। राजा को ऐसा आभास हुआ कि मां कह रही हैं कि नदी से प्रतिमा निकालकर मंदिर में स्थापित करवाई जाए।

प्रतिमा को कांधे पर उठाकर ले जाया जाए। मां के आदेश पर राजा ने प्रतिमा को कांधे पर रखा। पांच किलोमीटर चलने पर राजा थक गए। जैसे ही प्रतिमा को नीचे रखा, वह प्रतिमा वही स्थापित हो गई। जिस जगह पर प्रतिमा रखी गई, वह जगह थोड़ी ऊंची थी। इसके चलते प्रतिमा तिरछी दिखाई पड़ती है।

प्रतिमा एक खिड़की से ही दिखती है

गर्भगृह में दो खिड़कियां हैं। इसमें से दाहिनी ओर की खिड़की से प्रतिमा दिखाई देती है, लेकिन बाईं खिड़की से नहीं दिखती। मंदिर के पुजारी पं.मनोज शुक्ला बताते हैं कि 1977 में ‘महामाया महत्तम” पुस्तक में मंदिर के इतिहास का जिक्र किया गया है। इसके बाद 2012 में मंदिर ट्रस्ट की ओर से ‘रायपुर का वैभव श्री महामाया देवी मंदिर”प्रकाशित किया गया।

मां के चरणों में पहुंचती है सूर्य की किरणें

वास्तु शास्त्र और तांत्रिक पद्धति से निर्मित मां महामाया की प्रतिमा पर सूर्य अस्त होने के समय सूर्य की किरणें माता के चरणों का स्पर्श करती हैं। तीनों रूप में विराजीं मां मां महामाया देवी, मां महाकाली के स्वरूप में यहां विराजमान हैं। सामने मां सरस्वती के स्वरूप में मां सम्लेश्वरी देवी विराजी हैं।

महाकाली, मां सरस्वती, मां महालक्ष्मी तीनों स्वरूप में मां के दर्शन होते हैं। अंग्रेजी शासनकाल में विशेष देखरेख हैहयवंशी राजा मोरध्वज द्वारा बनाए गए मंदिर का कालांतर में भोसला राजवंशीय सामंतों ने नवनिर्माण करवाया। मुगल शासनकाल और अंग्रेजी शासनकाल में भी माता के चमत्कार से मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ती चली गई। अंग्रेजों ने भी मंदिर की विशेष देखरेख में योगदान दिया।

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NEWS IN ENGLISH

In this temple, where statue of goddess is laid, there is no hail from it, therefore it seems to skew

Raipur . Generally, the statues of gods and goddesses are seen quite straight in the temples, but in the Mahamaya Devi temple of thousands of years old in Chhattisgarh’s capital, Raipur, the idol of Virji Maa looks a bit skewed. The reason for this is that it is said that King Mordhav of the Kalchuri dynasty, carrying the statue from the Kharun River on the order given in the dream of the mother, walk a five kilometer walk on the head.

When tired, put the statue on a rock. While keeping the statue slightly skewed After this, millions of effort was made, but the statue did not come from its place. Forcing the temple to be built in the same state. That is why the image appears skewed.
It is believed that Raja Mordhav was passing through the river Kharun. The statue of Mother Goddess appears in the middle of the river. The king was so impressed that the mother is saying that the statue should be taken out of the river and installed in the temple.

Carrying the statue on the shoulder On the order of the mother, the king placed the statue on the shoulder. The king was tired of running five kilometers. As soon as the statue was placed below, that statue was established. The place at which the statue was placed was a little higher. Because of this, the image can be seen slanting.

The image is seen from a window

There are two windows in the sanctum sanctorum. From this there appears the image from the window on the right, but the left is not visible from the window. Temple priest P.Monj Shukla points out that in the book “Mahamaya Greatest” in 1977, the history of the temple has been mentioned, followed by the temple trust’s ‘Vaibhav Sri Mahamaya Devi Temple of Raipur’ in 2012.

Sun rays reach the mother’s feet

When the sun sets on the statue of Mahamaya, Vaastu Shastra and Tantrik method, the sun rays touch the feet of the mother. In three forms, Virgins mother Mother Mahamaya Devi, mother is sitting here in the form of Mahakali. In front of the mother Saraswati, Mother Samaleeshwari is Goddess Virji.

Mahakali, mother Saraswati, mother Mahalakshmi are the mother’s eyes in all three forms. Special Monitoring During the British rule, the temple built by the Haiyavanshi King Moravjh, in a timely fashion, Bhosala dynastic feudals were reformed. Even during the Mughal regime and the British rule, the glory of the temple increased with the miracle of Mother. The British also contributed in the special care of the temple.

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