पाकिस्तान में घुसकर हमले के बाद भारत के बयान के मायने

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पाकिस्तान में घुसकर हमले के बाद भारत के बयान के मायने

मंगलवार को भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हमले के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत का निशाना न तो सिविलियन थे और न ही पाकिस्तानी सेना. भारत की ओर से की गई कार्रवाई केवल आतंकियों को निशाना बनाने के लिए की गई है.

भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने अपने बयान में यह भी बताया कि हमला सफल रहा और इसमें आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर उस्ताद गौरी, कुछ ट्रेनर और आतंकवादी हमलों का प्रशिक्षण ले रहे कई आतंकवादी मारे गए हैं. हालांकि भारत सरकार की ओर से मारे गए लोगों की संख्या का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है.

भारत की ओर से जारी बयान बहुत सधा हुआ और कूटनीतिक है. भारत के बयान के कुछ निहितार्थ इस प्रकार हैं.

भारत ने अपने बयान में सीधे तौर पर कहा कि यह हमला पाकिस्तान पर, उसकी अवाम पर या सेना पर हरगिज़ नहीं था. केवल आतंकवादियों को निशाना बनाया गया. यानी भारत युद्ध का न तो अपनी ओर से संकेत दे रहा है और न ही पाकिस्तान को युद्ध में जाने के लिए किसी तरह की वजह दे रहा है.

विदेश सचिव को सामने लाकर भारत ने इसे सेना बनाम सेना होने से रोका. साथ ही विश्व समुदाय को संदेश देने के लिए विदेश मंत्रालय को सामने लाया गया.

भारत ने इसे आतंकियों पर हमला बताया. इससे भारत विश्व समुदाय को यह संदेश दे पाया है कि भारत की यह कार्रवाई युद्ध नहीं, आतंकवाद के खिलाफ भारत के एहतियाती प्रयास हैं.

ऐसी कार्रवाई करना क्यों अनिवार्य हो गया था, इसे समझाते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि पुलवामा में हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद भारत के कई अन्य हिस्सों में भी हमले की तैयारी कर रहा था और इसके लिए बड़े पैमाने पर आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था. भविष्य में पुलवामा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ऐसा करना ज़रूरी था.

भारत ने यह भी संकेत दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वो केवल विश्व समुदाय की पैरवी का मोहताज नहीं है. वो अकेले भी निर्णय ले सकता है और आतंकवाद से निपटने के लिए खुद ज़रूरी कदम उठाने में सक्षम है.

भारत की पाकिस्तान में घुसकर की गई इस कार्रवाई के बाद यदि सेना के मंच को आधिकारिक घोषणा के लिए इस्तेमाल किया जाता तो यह कूटनीतिक से ज़्यादा एक सामरिक संदेश देना होता. बहुत सोच-समझकर भारत ने विदेश मंत्रालय के ज़रिए इस कार्रवाई पर अपनी आधिकारिक स्थिति रखी है.

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NEWS IN ENGLISH

The meaning of India’s statement after the attack by entering into Pakistan

On Tuesday, after the Indian Air Force’s attack in Balakot, Pakistan, India’s Foreign Ministry issued a statement saying that the target of India was neither civilian nor the Pakistani army. The action taken by India has been done only to target the terrorists.

Indian Foreign Secretary Vijay Gokhale also said in the statement that the attack was successful and that many terrorists who were trained by the commander of the terrorist organization Jaish-e-Mohammed, Ustad Ghauri, some trainers and terrorists were killed. However, no figure has been issued for the number of people killed by the Indian government.

The statement issued by India is very quick and diplomatic. Some implications of the statement of India are as follows.

India directly said in its statement that the attack was not at stake on Pakistan, its people or the army. Only terrorists were targeted. That is, neither India is indicating either of its war nor is giving any reason for Pakistan to go to war.

By bringing foreign Secretary to India, India has prevented it from being a military versus army. Alongside, the Ministry of External Affairs was brought in to convey message to the world community.

India has called it an attack on terrorists. This has given India the message to the world community that this action of India is not war, but it is India’s precautionary efforts against terrorism.

Explaining this why it was compulsory, Foreign Secretary Vijay Gokhale said that after the attack in Pulwama, Jaish-e-Mohammed was preparing for the attack in many other parts of India and for this, Training was going on. In the future, it was necessary to prevent the repetition of the Pulwama.

India also indicated that in the fight against terrorism, it is not merely the admissibility of the world community. He alone can make a decision and is capable of taking necessary steps to deal with terrorism itself.

If the army’s platform was used for official declaration after the action taken by India, then it would have been more strategic than diplomatic. Very carefully, India has kept its official status on this action through the Ministry of External Affairs.

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