रामायण काल के जाम्बवंत से महाभारत काल के श्रीकृष्ण ने क्यों लड़ा था युद्ध

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रामायण काल के जाम्बवंत से महाभारत काल के श्रीकृष्ण ने क्यों लड़ा था युद्ध

भगवान श्रीकृष्ण का जाम्बवंत से द्वंद्व युद्ध हुआ था। जाम्बवंत रामायण काल में थे और उनको अजर-अमर माना जाता है। उनकी एक पुत्री थी जिसका नाम जाम्बवती था। जाम्बवंतजी से भगवान श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि के लिए युद्ध करना पड़ा था। उन्हें मणि के लिए नहीं, बल्कि खुद पर लगे मणि चोरी के आरोप को असिद्ध करने के लिए जाम्बवंत से युद्ध करना पड़ा था।

दरअसल, यह मणि भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा के पिता सत्राजित के पास थी और उन्हें यह मणि भगवान सूर्य ने दी थी। सत्राजित ने यह मणि अपने देवघर में रखी थी। वहां से वह मणि पहनकर उनका भाई प्रसेनजित आखेट के लिए चला गया। जंगल में उसे और उसके घोड़े को एक सिंह ने मार दिया और मणि अपने पास रख ली।

सिंह के पास मणि देखकर जाम्बवंत ने सिंह को मारकर मणि उससे ले ली और उस मणि को लेकर वे अपनी गुफा में चले गए, जहां उन्होंने इसको खिलौने के रूप में अपने पुत्र को दे दी। इधर सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर आरोप लगा दिया कि यह मणि उन्होंने चुराई है।

तब भगवान श्रीकृष्ण इस मणि को खोजने के लिए जंगल में निकल पड़े। खोजते खोजते वे जाम्बवंत की गुफा तक पहुंच गए। वहां उन्होंने वह मणि देखी। जाम्बवंत ने उस मणि को देने से इनकार कर दिया। तब श्रीकृष्ण को यह मणि हासिल करने के लिए जाम्बवंत से युद्ध करना पड़ा।

जाम्बवंत को विश्‍वास नहीं था कि कोई उन्हें हरा सकता है। उनके लिए यह आश्चर्य ही था। बाद में जाम्बवंत जब युद्ध में हारने लगे तब उन्होंने सहायता के लिए अपने आराध्यदेव प्रभु श्रीराम को पुकारा। आश्चर्य की उनकी पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने राम स्वरूप में आना पड़ा। जाम्बवंत यह देखकर आश्चर्य और भक्ति से परिपूर्ण हो गए।

तब उन्होंने क्षमा मांगते हुए समर्पण कर अपनी भूल स्वीकारी और उन्होंने मणि भी दी और श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि आप मेरी पुत्री जाम्बवती से विवाह करें। श्रीकृष्ण ने उनका निवेदन स्वीकार कर लिया। जाम्बवती-कृष्ण के संयोग से महाप्रतापी पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम साम्ब रखा गया। इस साम्ब के कारण ही कृष्ण कुल का नाश हो गया था।

उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण द्वारा इस मणि को ले जाने के बाद उन्होंने इस मणि को सत्राजित को नहीं देकर कहा कि कोई ब्रह्मचारी और संयमी व्यक्ति ही इस पवित्र मणि को धरोहर के रूप में रखने का अधिकारी है। अत: श्रीकृष्ण ने वह मणि अक्रूरजी को दे दी। उन्होंने कहा कि अक्रूर, इसे तुम ही अपने पास रखो। तुम जैसे पूर्ण संयमी के पास रहने में ही इस दिव्य मणि की शोभा है। श्रीकृष्ण की विनम्रता देखकर अक्रूर नतमस्तक हो उठे।

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NEWS IN ENGLISH

Why did Shrikrishna fought the war of Jainism from Ramayana period of Mahabharata?

Lord Shiva’s war fought with Jambvant. Jambwant was in Ramayana period and he is considered as Ajar-Amar. She had a daughter named Jambwati. Jambvantji had to fight Lord Sree Krishna for the simple gem. He had to fight with Jambwant not only for Mani, but to impede the allegation of theft of the money stolen on himself.

Indeed, this gem was near Sutradhaj, the father of Lord Krishna’s wife Satyabhama and given this gem to Lord Sun God. Sattarajeet kept this gem in his deity house. From there, wearing the gem, his brother went to Prasenjit Chetu. In the forest, he and his horse were killed by a lion and kept the gem near him.

Seeing the gem near the lion, Jambwant slaughtered the lion and took it from the gem and went to his cave with that gem, where he gave it to his son as a toy. Here, Sartrejt has accused Krishna of stole this gem.

Then Lord Krishna went out of the woods to find this gem. They went to Jambwant’s cave after searching for them. There they saw the gem there. Jambwant refused to give that gem. Then Sri Krishna had to fight with Jambvant to get this gem.

Jambvant did not believe that someone could beat him. It was a surprise for them. Later, when Jambvant started to lose in the war, he called his prayer lord Prabhu Shriram for help. Upon hearing his call of wonder, Lord Shri Krishna had to come in his Rama form. Jambvutt was full of wonder and devotion by seeing this.

Then he apologized and surrendered and accepted his mistake and he also gave the gem and requested Lord Krishna that you should marry my daughter Jambwati. Sri Krishna accepted his request. Jambvati-Krishna was born with a great son, whose name was Sam. Due to this serum, Krishna Kul was destroyed.

It is noteworthy that after taking this gem from Shrikrishna, he did not give this Mani to Sartrejita and said that any Brahmachari and Paramyamy person is entitled to keep this sacred gem in the form of heritage. Hence, Shrikrishna has given that gem to Akroji. He said that Akrur, keep it with you only. It is the beauty of this divine gem, just as you have to live near complete restraint. Seeing the humility of Shrikrushna, Akrur fell on his knees.

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