स्वच्छता अभियान: देशवासी आगे आए तो खिलखिलाई सफलता, सफाई के प्रति आई जागरूकता

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स्वच्छता अभियान: देशवासी आगे आए तो खिलखिलाई सफलता, सफाई के प्रति आई जागरूकता

मालवा-निमाड़। स्वच्छता सर्वेक्षण के हाल ही में आए परिणामों में नफा-नुकसान को परे रख देखा जाए तो एक बात प्रमुखता से सामने आई है और वह यह कि सफाई के प्रति लोगों में अभूतपूर्व जागरूकता आई है। इसे बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा जा सकता है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो सफाई में अव्वल आने की दौड़ में शामिल शहरों के सार्वजनिक स्थान पहले की तुलना में अब साफ नजर आने लगे हैं। इसमें स्थानीय निकायों के दिन-रात काम करने वालों की मेहनत तो है ही नागरिकों को भी सफाई का महत्व समझ में आया है।

अपने शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए वे नियत स्थान पर ही कचरा डाल रहे हैं। गंदगी फैलाने वालों को समझाइश देने में भी नागरिक ही आगे आ रहे हैं। किसी भी अभियान की सफलता इसी में मानी जाती है कि उससे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें। जब स्वच्छता के अभियान में पूरा देश जुड़ गया है तो अच्छे परिणाम आना तो तय है ही। प्रदेश का इंदौर शहर तो लगातार तीसरे वर्ष देश भर में सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल कर चुका है, मालवा निमाड़ के छह जिला मुख्यालयों ने भी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर काम कर अपनी स्थिति में सुधार किया है। हालांकि मंदसौर जैसे शहर में सुधार की गुंजाइश अवश्य है क्योंकि यह शहर पिछले वर्ष की तुलना में 80 पायदान लुढ़का है।

उज्जैन- मझोले शहरों में रहा पहले क्रम पर

कैटेगरी: 3 से 10 लाख आबादी

इस वर्ष क्रम – पहला क्रम, देश में चौथा स्थान

गत वर्ष क्रम – देश में 17वां स्थान

स्वच्छता के मामले में उज्जैन शहर ने बड़ी छलांग लगाई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 की रैंकिंग में पहली बार उज्जैन 3 से 10 लाख तक की आबादी वाले मझोले शहरों की सूची में नंबर-1 चुना गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश का चौथा सबसे साफ शहर करार दिया गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में उज्जैन देश का 17वां सबसे साफ शहर करार दिया गया था। 157 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 5.65 लाख की आबादी वाले उज्जैन को तीन कैटेगरी में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार भी मिले हैं।

इनोवेशन आइडिया कैटेगरी अवॉर्ड पुराने कपड़ों से कागज, मंदिरों से निर्माल्य से अगरबत्ती एवं खाद बनवाने के लिए, इंडियाज फास्टेस्ट क्लीन सिटी अवॉर्ड, स्वच्छता की रेस में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने के लिए और थ्री स्टार गारबेज फ्री सिटी अवॉर्ड, शहर को खुले में कचरा मुक्त करने के लिए प्राप्त हुआ है। मालूम हो कि शहरी विकास मंत्रालय ने विश्व का सबसे बड़ा स्वच्छ सर्वेक्षण जनवरी माह में देश के 4237 शहरों के बीच कराया था। सर्वे 5000 अंकों का था, जिसमें उज्जैन को 4244 अंक प्राप्त हुए हैं।

7 वजह जिनसे बढ़ा मान

शत-प्रतिशत घर और प्रतिष्ठान में गीला-सूखा कचरा अलग रखने और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन गाड़ीवाले को ही देने की आदत बनाई, 5424 परिवारों द्वारा अपना गीला कचरा खुद निष्पादित करना शुरू किया, मंदिरों से निकले फूलों से खाद, अगरबत्ती और पुराने कपड़ों से कागज बनवाने का कारखाना स्थापित किया, मक्सी रोड स्थित सब्जी मंडी में बायोमिथिनेशन प्लांट स्थापित किया,जहां बायोगैस से 30 किलोवॉट बिजली प्रतिदिन उत्पादित हो रही है।

निर्माण के मलबे का निष्पादन शुरू कराया, शहर में सुंदरता के ऐसे इंतजाम किए, जो साफतौर पर दिखे और महसूस किए गए, जैसे वैज्ञानिक तरीके से शिप्रा नदी, रोटरी, बगीचे, पुरुषोत्तम सागर एवं कचरा ठियों का सौंदर्यीकरण किया गया, भंगार में पड़े लोहे-पतरे से खूबसूरत प्रतिमाओं का निर्माण कर उन्हें मुख्य मार्गों पर लगाया गया, शौचालयों को रिनोवेट कर मॉल कल्चर की तर्ज पर बनवाया, 80 हजार वर्ग फीट सार्वजनिक दीवारों पर लोकतंत्र की ताकत, स्वच्छता और संस्कृति का संदेश देती चित्रकारी कराई गई, कचरा उत्सर्जन में कमी लाई गई और उज्जैन को खुले में शौच मुक्त किया, सफाई से जुड़ी शिकायतों का तत्काल समाधान मोबाइल स्वच्छता एप एवं हेल्पलाइन नंबर के जरिए किया, गोंदिया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कई सालों से जमा 25 हजार टन पुराना कचरा निष्पादित किया, उससे खाद और सीमेंट इंडस्ट्रीज में उपयोगी कोल का विकल्प आरडीएफ बनाया गया।

शहर की तस्वीर बदली

स्वच्छ भारत मिशन से शहर की सुंदरता और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है। लोग पहले की अपेक्षा अब ज्यादा हेल्दी महसूस करने लगे हैं। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी, एलर्जी, मलेरिया जैसी बीमारी के मरीजों की संख्या घट गई है। लगभग हर वार्ड में दो से तीन खूबसूरत बगीचे बन गए हैं। मुख्य मार्ग और चौराहे खूबसूरत रोटरी एवं प्रतिमाओं से सजा दिए गए हैं।

नंबर-1 बना रहेगा उज्जैन

नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने कहा कि पहले हमारा नारा था कि उज्जैन बनेगा नंबर 1, लेकिन अब हमारा नारा है नंबर 1 बना रहेगा उज्जैन। स्वच्छता तभी संभव है जब हर व्यक्ति इसके लिए आदत में सुधार लाए। अब इस आदत को बरकरार रखना है। जहां संसाधनों की कमी होगी, वहां नगर निगम पूरी करेगा।

रतलाम -परिणाम सुधरे लेकिन जमीनी हालात नहीं

कैटेगरी: एक से तीन लाख आबादी

इस वर्ष क्रम – 62वां

गत वर्ष क्रम – 72वां

स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के परिणाम में रतलाम देश में सफाई के मामले में 62वें क्रम पर रहा। पिछले वर्ष की तुलना में 10 शहरों को पछाड़कर रतलाम ने यह स्थान पाया, लेकिन समय पर पर्याप्त मॉनीटरिंग और इच्छाशक्ति से काम किया जाता तो हालात और बेहतर होते। वैसे दुख की बात यह है कि सर्वे के बाद हालात फिर पूर्व की तरह हो गए हैं। इस कवायद से शहरवासियों में जागरूकता जरूर है। अब वह पहले की तरह सड़कों पर कचरा नहीं फेंकते हैं। घर-प्रतिष्ठानों में कचरा डस्टबिन में संभालकर रखते हैं और वाहन आने का इंतजार करते हैं, किन्हीं कारणों से वाहन वार्डों में नहीं पहुंच पाता है तो वार्ड पार्षद से लेकर निगमायुक्त तक फोन लगाकर शिकायत करते हैं।

यह सुधार करना होंगे

शहर के विस्तार के साथ अब आधुनिक सफाई मशीनों की आवश्यकता है, शहर के जलाशय और नाले कूड़ादान बने हैं, इस स्थिति को ठीक करना होगा, ट्रेंचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन 80 टन कचरा पहुंचता है, लेकिन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए तैयार 156 करोड़ की योजना अभी अटकी है, सफाई कर्मचारियों की संख्या 1200 से अधिक है, लेकिन 49 वार्डों में सफाईकर्मियों की पर्याप्त मॉनीटरिंग भी जरूरी है, गंदगी की शिकायत और जनता के फीडबैक को लेकर निगम स्तर पर व्यवस्था करना होगी और सर्वेक्षण में इस बार हरियाली को बढ़ावा देने के नंबर थे, लेकिन उद्यानों की दुर्दशा के कारण अंक नहीं मिल सके, इसलिए हरियाली बढ़ाने पर काम करना होगा।

ज्यादा प्रयास करेंगे

सर्वेक्षण से पहले मॉनीटिरंग सहित जनजागृति लाने की पूरी कोशिश की गई। नए सर्वेक्षण के लिए हम अभी से तैयारी शुरू करेंगे और देश के टॉप टेन में जगह बनाने के प्रयास करेंगे – एसके सिंह, आयुक्त, नगर निगम रतलाम

स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाना होगा

स्वच्छता सर्वेक्षण चंद दिनों का होता है। एजेंसी के सदस्य आते हैं और जमीनी पड़ताल करते हैं, लेकिन हर नागरिक को स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। सड़क पर थूकना और कचरा फेंकना बंद करना पड़ेगा- डॉ. सुनीता यार्दे, महापौर, नगरनिगम रतलाम

बड़वानी – तकनीकी त्रुटि से बड़वानी देश अव्वल आने से चूका

कैटेगरी: एक लाख से कम आबादी वाला शहर

इस वर्ष क्रम – प्रदेश में 7वां और देश में 88वां

गत वर्ष क्रम – देश में 527

स्वच्छ सर्वेक्षण में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में बड़वानी को प्रदेश में सातवां और देश में 88वां स्थान प्राप्त मिला है। गत वर्ष बड़वानी की देश में 527वीं रैंक थी। इस वर्ष के सर्वेक्षण में जिला मुख्यालय पर ओडीएफ प्लस-प्लस और फाइव स्टार रैंकिंग का 950 अंक का सर्वे नहीं हो सका। नपा का दावा है कि इस सर्वे में हमें पूरे अंक मिलते और बड़वानी प्रदेश ही नहीं देश में अव्वल आ सकता था। इस वर्ष अपनी श्रेणी में बड़वानी को 3162 अंक मिले हैं, जबकि देश में इस श्रेणी में प्रथम रहे महाराष्ट्र के कराड़ को 4063 अंक और प्रदेश में अव्वल रहे शाहगंज को 3923 अंक मिले हैं।

बेहतरी के लिए यह किया

घर-घर से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेना शुरु किया, ट्रेंचिंग ग्राउंड के कचरे का वर्गीकरण कर गीले कचरे से खाद और सूखे का रिसाइकल शुरु किया, लोगों को जागरुक करने के प्रयास किए, शहर को पॉलिथीनमुक्त करने का अभियान चलाया। कचरे में मिली पॉलिथीन से गट्टे बनाने की मशीन लगाई, सुबह-शाम सफाई और मुख्य बाजारों में तीसरी बार रात को सफाई।

यह रह गई कमियां

सर्वे के दौरान सार्वजनिक सुविधाघर निर्माणाधीन होने से अंक कम मिले, कचरा वाहनों में अब भी करीब 30 प्रतिशत लोग पूरी तरह सूखा-गीला कचरा अलग-अलग नहीं डाल रहे, जनजागरुकता और आमजन की सहभागिता के लिए और काम होना जरुरी है, शहर सोंदर्यीकरण पर भी देना होगा ध्यान और शहर को पूरी तरह धूलमुक्त करने के लिए मशीनों से सफाई की जरूरत।

अगली बार आएंगे अव्वल

इस बार ओडीएफ प्लस-प्लस और फाइव स्टार रैंकिंग न हो पाने से हम पिछड़े, नहीं तो अव्वल होते। सार्वजनिक सुविधाघर निर्माणाधीन होने से भी नंबर कम मिले। अगले वर्ष के लिए अभी से तैयारियां शुरु कर रहे हैं। हर स्तर पर और बेहतर काम करने का प्रयास करेंगे। सफाई के लिए मशीनें, जागरूकता के लिए मोबाइल एप, संसाधनों में वृद्धि आदि काम करेंगे – कुशलसिंह डोडवे, सीएमओ, बड़वानी

खंडवा – आमजन की मानसिकता में आए बदलाव से मिली बढ़त

कैटेगरी: एक लाख से अधिक जनसंख्या वाला शहर

इस वर्ष क्रम मिला: 93वां

गत वर्ष क्रम: 99 वां

लगातार प्रयासों की वजह से गत वर्ष की तुलना में खंडवा सर्वेक्षण में 6 पायदान ऊपर चढ़ा है। पिछले तीन सालों की तुलना में शहर की सफाई व्यवस्था के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। पहले सार्वजनिक क्षेत्रों में चौराहों पर बड़ी कचरा पेटियों के आसपास गंदगी के ढेर पड़े दिखाई देते थे, वहीं अब ऐसे नजारे इतिहास की बात हो गई है। सफाई को लेकर आमजन की मानसिकता में भी बदलाव आया है। घर के बाहर कचरा फेंकने वाले अब डस्टबीन में एकत्र करने लगे हैं। सुबह घर के दरवाजे पर कचरा वाहन आने पर उसी में कचरा डाला जा रहा है। स्वच्छ वातावरण से मच्छरजनित बीमारियों में भी कमी आई है।

इस वजह से हुआ सुधार

सुबह के साथ, दोपहर और रात्रि में भी सफाई ने सर्वे करने आई टीम को प्रभावित किया, वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, सार्वजनिक क्षेत्रों में 500 मीटर के दायरे में हैंगिंग डस्टबिन लगाए जाने से सर्वे में अंक बढ़े, सर्वे के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर आमजन के अच्छे फीडबैक का भी योगदान रहा, इस वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण की गाइड लाइन के अनुसार रहवासी क्षेत्रों को कचरा पेटियों से मुक्त कर दिया गया। परिणामस्वरूप नंबर बढ़े।

जल्द बनेगा क्लस्टर

कचरे के निपटान की बेहतर व्यवस्था नहीं होने पर हमारे अंक कम हुए हैं। वैज्ञानिक ढंग से कचरे के निपटान के लिए क्लस्टर तैयार होगा। जहां खंडवा के साथ बुरहानपुर और आसपास के नगरीय निकायों का कचरा भी एकत्रित होगा। कचरे के सदुपयोग की योजना पर भी काम चल रहा है – मोहम्मद शाहीन, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी

धार – सर्वे में पिछड़े पर लोगों की आदतों में आया है बदलाव

कैटेगरी: एक लाख से कम आबादी वाला शहर

इस वर्ष क्रम: प्रदेश में 5वां, देश में 56वां

गत वर्ष क्रम: प्रदेश में पहला, देश में 13वां

अपनी कैटेगरी में धार शहर को इस साल प्रदेश में पांचवां और देश 56वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल प्रदेश में पहला और देश में 13वां स्थान मिला था। गत वर्ष की तुलना में अंकों की दौड़ में पिछड़ने के बावजूद अच्छी बात यह रही कि लोगों की आदतों में बदलाव आया है। गीला-सूख कचरा अलग-अलग एकत्रित कर वाहनों में डालने के लिए लोग जागरुक हुए हैं। जिले के दो नगरों का प्रदर्शन भी सर्वे में बेहतर रहा। प्रदेश के 10 स्वच्छ शहरों में राजगढ़ दूसरे स्थान पर और सरदारपुर छठे स्थान पर रहा। धार को इस बार 5000 में से 3294 अंक प्राप्त हुए हैं।

इस वजह से पिछड़े

लोगों को सर्विस देने में नंबर सबसे ज्यादा कटे हैं। वाहनों के वार्डों में नहीं आने की लगातार शिकायतें रहींं। इससे लोगों के घरों से कचरा उठने में दिक्कतें रहीं, नपा को दस्तावेजों के प्रस्तुतिकरण में कमी का भी खामियाजा उठाना पड़ा है। कई कामों के दस्तावेज सहेजे नहीं जा सके, इससे अंक कटे, नियमों के उल्लंघन पर नपा फील्ड में चालानी कार्रवाई करने में भी पिछड़ी, पोर्टल पर भी दस्तावेजों की कमी से अंक कम मिले, फील्ड में कमजोर तैयारियों का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। शौचालयों का रखरखाव ठीक नहीं था और निर्माण की गुणवत्ता भी आला दर्जे की नहीं थी। स्लोगन के मामले में भी नपा पीछे रही। नपा ने कुछ नवाचार भी नहीं किया।

पिछले साल इसलिए अव्वल

48 बड़े कचरों के अड्डों को खत्म कर सौंदर्यीकरण कि या, शहर के 23 शौचालयों को आदर्श बनाया, ट्रेंचिंग ग्राउंड की बदली थी तस्वीर, शहर में घर-घर से उठने लगा था कचरा, इस वजह से नागरिकों का फीडबैक भी अच्छा मिला था।

बुरहानपुर – अफसरों की उदासीनता और लोगों में जागरूकता पड़ी भारी

इस वर्ष क्रम: देश में 103वां, प्रदेश में 21वां

गत वर्ष का क्रम: देश में 81वां

स्वच्छ सर्वेक्षण मेें बुरहानपुर को इस बार टॉप-100 में भी जगह नहीं मिल पाई। इस वर्ष शहर 103 वे स्थान पर रहा, जबकि गतवर्ष 81वें स्थान पर था। अच्छी बात यह रही कि देश में पिछड़ने के बावजूद बुरहानपुर इस बार प्रदेश में 21 वे स्थान पर आ गया है। गतवर्ष 81 वे क्रम पर था। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से अधिकांश वार्डों में साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। केंद्र से अधिकारियों के दल के आने पर दिखावे के लिए सफाई कराई गई। जनप्रतिनिधि, अफसरों और कर्मचारियों की उदासीनता और आमजन में जनजागरूकता में कमी भी पिछड़ने की वजह मानी जा रही है। सफाई व्यवस्था की ठीक से मॉनिटरिंग नहीं की गई और कार्रवाई भी नहीं हुई।

इस वजह से पिछड़े

शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम ठीक से नहीं हो सका। कु छ वार्डाें में तो कचरा संग्रहण वाहन पहुंच ही नहीं पा रहे हैं, ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पुराने कचरे को नष्ट करने का काम भी नहीं हो सका, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन को लेकर भी कु छ नहीं हुआ, आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान नहीं हुआ, पेयजल लाइन एवं सीवरेज लाइन की शहरभर में खुदाई के कारण भी कई मोहल्लों मेें कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। पूरे शहर में धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। नगर निगम द्वारा आमजन में सफाई के प्रति जागरुकता पैदा नहीं कर सकी। वार्डों में गंदगी की सूचना के बाद भी हालात नहीं बदलते।

अच्छे परिणामों के लिए प्रयास करेंगे

नगर निगम आयुक्त पवन कु मार सिंह का कहना है कि अब और बेहतर प्रयास करेंगे ताकि अगले साल अच्छा परिणाम मिले। आमजन के बीच पहुंचकर उन्हें स्वच्छता का महत्व बताया जाएगा- पवनकुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त

नागरिकों को भी जागरूक होना पड़ेगा

शहर में स्वच्छता को लेकर और भी बेहतर प्रयास करेंगे। स्वच्छता के लिए आमजन को भी जागरुक होना पड़ेगा -अनिल भौंसले, महापौर

आलीराजपुर – स्वच्छता में अच्छी रैंकिंग के लिए सालभर करने होंगे प्रयास

कैटेगरी: 50 हजार से कम आबादी

इस वर्ष क्रम: प्रदेश में 294 वा

नपा ने इस बार प्रदेश के टॉप 100 में स्थान पक्का के मंसूबे बांधे थे, लेकिन पहुंच गया 294वें क्रम पर। पिछड़ने की मूल वजह अफसरों की लापरवाही ही है, क्योंकि सालभर बेहतर रैंकिंग के लिए विशेष प्रयास नहीं किए गए। सर्वेक्षण के लिए टीम पहुंची तब अफसरों की नींद खुली। कर्मचारियों को ताबड़तोड़ व्यवस्था में लगाया, उसके परिणाम सामने हैं। पिछड़ने की वजह नपा में बीते डेेढ़-दो साल से स्थायी सीएमओ की कमी भी मानी जा सकती है। इसके चलते सफाई के यथोचित प्रयास ही नहीं हो सके। नगर में डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था तो नपा ने की है लेकिन एकत्रित कचरे के निपटान की स्थायी व्यवस्था नहीं है, जो कि स्वच्छता रैंकिंग में कम नंबर मिलने की प्रमुख वजहों में से एक है। नपा प्रशासन द्वारा सुरेंद्र उद्यान में कचरे से खाद बनाने के लिए प्लांट तैयार किया गया, लेकिन वह भी पूूरी तरह सफल नहीं हो सका। नपा सीएमओ संतोष चौहान ने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उनका कहना है कि आगामी वर्ष के लिए बेहतर प्रयास करेंगे।

शाजापुर – एक सर्वे टीम नहीं आने से बोनस अंक नहीं मिल सके

कैटेगरी: एक लाख से कम आबादी

इस वर्ष क्रम: देश में 324वां, प्रदेश में 82वां

गत वर्ष क्रम: 290वां, प्रदेश में 106वां

शाजापुर शहर ने मप्र में स्वच्छ शहरों की 82वी रैंकिंग हासिल की है, पिछले वर्ष यह 106 थी। हालांकि देश की रैंकिंग में नगर करीब 34 पायदान नीचे खिसक कर 324 पर पहुंच गया। गत वर्ष 290 वे स्थान पर था। जिले के पोलायकलां को पिछले वर्ष देश में 37 वीं रैंक मिली थी, लेकिन इस बार वह 139 वे क्रम पर लुढ़क गया।

सुधार की वजह

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की प्रभावी व्यवस्था, ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पार्क विकसित किया, मुख्य मार्गों पर सफाई की व्यवस्था बेहतर की, ऑनलाइन डाटा में बेहतर काम किया, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों की सतत मानीटरिंग।

जीतोड़ मेहनत करेंगे

सर्वे के लिए एक टीम नहीं आई। इसलिए बोनस अंक मिले। यदि टीम आती तो रैंकिंग में सुधार होता। टॉप-50 रैंकिंग की उम्मीद थी। अगले सर्वे के लिए जीतोड़ प्रयास करेंगे- भूपेंद्र दीक्षित, सीएमओ

मंदसौर- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नहीं करना पड़ा भारी

कैटेगरी: एक लाख से अधिक आबादी

इस वर्ष क्रम: देश में 104वां

गत वर्ष क्रम: 24वां

2018 के स्वच्छ सर्वेक्षण में मंदसौर देशभर में 24वें नंबर क्रम पर था, लेकिन 2019 में 80 स्थान गिरकर 104 पर जा पहुंचा है। इसकी मुख्य वजह नगर पालिका अधिकारियों की लापरवाही मानी जा रही है। मापदंडों के अनुरूप काम करने की बजाय उन्होंने लीपा पोती की कोशिश की। शहर में कई जगह डस्टबिन बिना स्टैंड रख दिए गए है। इधर-उधर लुढ़ककर वे ही गंदगी फैला रहे हैं। पिछले तीन सालों में पहले दो साल शहर की तस्वीर सुधरी थी। इसी वजह से पिछले साल मंदसौर देश में टॉप 25 शहरों में शामिल हो पाया था। 2016 में मंदसौर देश में 377 नंबर पर था। 2017 में 74 वे स्थान पर आया और 2018 में 24वें क्रम पर आ पहुंचा था। नगर पालिका ने शौचालय निर्माण, साफ-सफाई और ई अटेंंडेंस की व्यवस्था तो कर ली पर सर्वे दल को वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उपाय नहीं बता पाए। अच्छी बात यह रही कि लोगों की आदतों में सुधार जरूर आया है। अब सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैका जाता। घरों में नगर पालिका की कचरा गाड़ी का इंतजार होता है।

गिरावट की वजह

अपशिष्ट से ऊर्जा और खाद संयंत्र की स्थापना नहीं की गई, निकाय द्वारा प्लास्टिक का उपयोग सड़क बनाने और सुधार में शुरु नहीं किया गया, लैडफिलिंग कार्य भी वैज्ञानिक तरीके से करना था नहीं हुआ, कचरे का संग्रह एवं पृथक्करण से नहीं हुआ, शहर मेें डस्टबिन लगाने के बजाय बिना स्टैंड ही रखवा दिए गए।

हम कमजोर पड़े

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का प्रारंभ नहीं होने से हमारे नंबर कम हुए हैं। सर्वे के समय मैं यहां पदस्थ नहीं था इसलिए सही स्थिति नहीं बता सकता की वजह क्या रही, पर निश्चित ही कही न कही हम कमजोेर रहे हैं। अब नए सिरे से कार्ययोजना बनाकर अगले वर्ष की तैयारी करेंगे – आरपी मिश्रा, सीएमओ, नपा

झाबुआ- पिछले साल से सबक लिया तो सुधरी झाबुआ की रैंकिंग

कैटेगरी: एक लाख से कम आबादी

इस वर्ष क्रम: प्रदेश में 15वां

गत वर्ष क्रम: प्रदेश में 24वां

जिले के पांच नगरीय निकायों में से सिर्फ झाबुआ ही ठीकठाक प्रदर्शन कर पाया है। प्रदेश में झाबुआ की रैंकिंग नौ अंक सुधर कर 15 हो गई जबकि गत वर्ष 24 वा स्थान मिला था। पिछले साल जिले में पहले क्रम पर रहा पेटलावद को वेस्ट जोन में 568 और राज्य में 226 अंक पिछड़ गया। झाबुआ में सुधार की निम्न वजह रही-176 सफाईकर्मी 10 सुपरवाइजर की निगरानी में लगातार दो शिफ्ट में काम करते रहे। रात में भी सड़कें धोने और सफाई का काम चला, ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा निपटान की व्यवस्था की गई। पहले जहां कचरे का ढेर था, अब वहां मैदान बन गया है, बगीचों और चौराहों के मेंटेनेंस के साथ सुधार का काम भी किया गया, पौधों की देखरेख की गई, नालियों की सफाई हुई और सोशल मीडिया से शहर के लोगों को जोड़ा गया।

जिले के नगरों के पिछड़ने की वजह

पेटलावद पहले के कामों को दोहरा नहीं सका। यहां अब पहले से ज्यादा गंदगी दिखती है। थांदला के हाल सबसे ज्यादा बुरे हुए। यहां रैंक में सबसे अधिक गिरावट आई। सफाई का अभाव पूरे शहर में है। एक बार सर्वे में शामिल होने के बाद लगातार उत्साह कम होता गया, जो सुस्ती पिछले साल झाबुआ में थी, वह अन्य नगरों में दिखाई दी।

खरगोन- स्वच्छता के प्रतिरुझान बढ़ा, बीमारियां भी घटीं

कैटेगरी: एक लाख से अधिक आबादी वाला शहर

इस वर्ष क्रम: देश के शीर्ष 20 शहरों में 17वां स्थान

गत वर्ष का क्रम: देश के शीर्ष 20 शहरों में 15वां स्थान

स्वच्छ सर्वेक्षण के हाल ही में आए नतीजों में खरगोन दो पायदान खिसक कर 17 स्थान पर जरूर पहुंच गया है, लेकिन नागरिकों का स्वच्छता के प्रति रुझान बढ़ा है। शहर को साफ-सुथरा रखने के तहत लगातार प्रयासों का असर यह हुआ है कि ट्रेचिंग ग्राउंड जहां पहले शहर भर का कचरा फेंका जाता था, वहां का नक्शा ही बदल गया है। नपा ने वहां उद्यान विकसित कर दिया है, जिसमें बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं। पहले इस क्षेत्र के पास से गुजरने में ही लोग बचते थे। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था के बाद शहर में सार्वजनिक स्थानों से कचरा पेटियां हटा दी गई हैं। इससे सार्वजनिक स्थान साफ-सुथरे नजर आने लगे हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था के बाद कॉलोनीवासियों को सुबह-शाम कचरा वाहन का इंतजार रहता है। शहर साफ हुआ तो बीमारियों का प्रतिशत भी घटा है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने वाले 350 सफाईकर्मियों की मेहनत की बदौलत शहर को यह सफलता हासिल हुई है। अब तो शासन ने भी उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा कर दी है।

अभी से तैयारी शुरू

स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में विश्वास था कि शहर की रैंकिंग में वर्ष 2018 की तुलना में बेहतर होगी, लेकिन उम्मीद के अनुसार स्टार रैंकिंग नहीं मिली। अगले वर्ष के लिए हमने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सभी के प्रयासों से शहर को बेहतर रैंकिंग मिलेगी- निशिकांत शुक्ला, सीएमओ

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NEWS IN ENGLISH

Sanitation Campaign: If the DeshGujarat comes forward, then the awareness about the success of flowering, cleanliness

Malwa-Nimad In the recently concluded results of cleanliness survey, if one is kept out of profit-loss, one thing has been prominently highlighted and it is that unprecedented awareness has taken place among the people towards cleanliness. This can be called a great and important achievement. Except for a few exceptions, the public spaces in the race for the top of cleanliness are now clearly visible as compared to the first. It is the hard work of the local people working day and night, the citizens have also understood the importance of cleanliness.

To keep their city clean, they are putting garbage in the destination. Citizens are coming forward to explain to those who spread the mess. The success of any campaign is believed to be that more and more people join it. When the whole nation is involved in cleanliness campaign, then it is certain to have good results. Indore city of the state has achieved the title of cleanest city for the third consecutive year, six district headquarters of Malwa Nimad has also improved its position by doing better than last year. However, there is a scope for improvement in cities such as Mandsaur as this city has rolled 80 points compared to the previous year.

Ujjain – in the middle of the first place in the middle cities

Category: 3 to 10 million population

This year’s sequence – the first sequence, fourth place in the country

Last year’s order – 17th place in the country

Ujjain city has made a big leap in cleanliness. For the first time in the ranking of Clean Survey-2011 released by the Central Government, Ujjain has been number one in the list of medium cities with population of 3 to 10 lakhs, whereas the national level has been declared as the fourth most cleanest city in the country. Earlier in 2018 Ujjain was declared the 17th most cleanest city in the country. Ujjain, who has a population of 5.65 lakh spread over 157 sq km area, has also been awarded in three categories by the President.

Innovation Idea category award for paper, clothes from old clothes, making agarbattis and manure from Nirmalya, India’s Fastest Clean City Award, to move ahead at the fastest pace in the cleanliness race, and the Three Star Garbage Free City Award, to open the city Garbage has been obtained for free. It is known that the Urban Development Ministry has made the world’s largest clean survey in January with 4237 cities in the country. Survey was 5000 points in which Ujjain received 4244 points.

7 Reasons to Increase

In habit of establishing wet-dredged garbage in cent percent home and establishment, and making door-to-door garbage collection, it was a habit to give to the carrior, 5424 families began to perform their own wet garb by themselves, flowers from flowers, incense and old clothes Established a factory for paper making, installed biomethination plant in Maxi Road located in the vegetable market, where 30 kg electricity per day from biogas Is being edited.

Started the execution of construction wreck, made arrangements for beauty in the city, which were clearly seen and felt, such as the beautification of Shipra river, rotary, garden, Purushottam ocean and garbage bases in scientific manner, iron in scratches The beautiful statues were constructed by constructing them on main roads, reconstructing the toilets and making them on the lines of mall culture, 80 thousand square feet of public Painting, giving cleanliness and culture of democracy on the walls, reducing garbage emissions and reducing Ujjain open defecation, urgent complaints about cleanliness related complaints through mobile hygiene app and helpline number, Gondia traying Over 25,000 tonnes of old garbage deposited on the ground for several years, it is useful to use useful coal in fertilizer and cement industries. CFF was created.

City Snapshot

Clean India Mission has also improved the beauty of the city and the health of the people. People have started feeling more healthy than ever before. In the hospitals, the number of patients suffering from colds, cough, allergy, malaria, has decreased. Almost every ward has two to three beautiful gardens. The main roads and intersections have been decorated with beautiful rotary and statues.

Ujjain will be No. 1

Municipal Commissioner Pratibha Pal said that earlier our slogan was that Ujjain will become No. 1, but now our slogan is going to be No. 1 Ujjain. Cleanliness is possible only when every person improves habit for it. Now this habit has to be retained. The municipal corporation will complete where resources are lacking.

Ratlam – Improve the results but not the ground situation

Category: One to three lakh population

This year’s order – 62nd

Last year sequence – 72nd

In the result of cleanliness survey-2009, Ratlam remained 62th in the case of cleanliness in the country. Ratlam found this place by overtaking 10 cities compared to last year, but the situation would have been better if the time was done with adequate monitoring and will. The sad thing is that after the survey, the situation has again become like the former. There is definitely awareness among the residents of this exercise. Now he does not throw garbage on the roads like before. Garbage in the home-establishments is stored in the dustbin and waiting for the arrival of the vehicle, for any reason, the vehicle does not reach the wards, then the complaints from the ward councilor to the corporation make phone calls.

It needs to be improved

With the expansion of the city, modern cleaning machines are now required, the city’s reservoir and drainage waste are made, this situation needs to be fixed, 80 tonnes of garbage per day on the traying ground, but 156 crore prepared for solid waste management. It is still stuck, the number of cleaning workers is more than 1200, but adequate monitoring of cleaners in 49 wards is also necessary, complaint of dirt and public feed Track will be working on will be arranged at the corporate level and in the survey was the number of promotion this time greener, but Parks could not get points because the situation, therefore increasing greenery.

Will try more

Prior to the survey, there was a complete effort to bring public awareness along with the monitoring. We will start preparations for the new survey and will make efforts to make the place in the top ten of the country – SK Singh, Commissioner, Municipal Corporation Ratlam

Cleanliness must be a part of life

Hygiene Survey is a few days. The members of the agency come and explore the ground, but every citizen has to make cleanliness a part of his life. Dropping of spitting and garbage will be stopped on the road – Dr. Sunita Yarde, Mayor, Nagar Nigam Ratlam

Badwani – Badwani failed due to technical impairment

Category: City with population less than one lakh

This year’s order – 7th in the state and 88th in the country

Last year’s order – 527 in the country

In the clean survey, in the category of cities with less than one lakh population, Vadwani got the seventh place in the state and 88th in the country. Last year, in the country of Bardwani was 527th rank. Survey of 950 points of ODF Plus-Plus and Five Star Rankings could not be done at the district headquarters in this year’s survey. Napa claims that in this survey we could get full marks and not only the Badwani region but it could be the best in the country. This year, Badwani has got 3162 marks in its category, whereas in the first place in this category, Maharashtra’s Karad has 4063 marks and Shahaganj has the highest number of 3 points in the state.

Did it for betterment

Started separating wet-dirt trash from home, classifying garbage of trunting ground and starting recycling of manure and dry from wet wastes, tried to make people aware, campaigned for polythene the city Putting polythene gutter machine in the garbage, cleaning in the morning and evening and cleaning the night for the third time in the main markets.

It remains the loopholes

During the survey, the number of points reduced by getting public facilities under construction; nearly 30 percent of the garbage vehicles still do not completely separate the drought and garbage, more work has to be done for the participation of public awareness and public, on city socialization Also, the need to clean the machine and clean the machines to completely clean the city.

Next time will come

This time we will not be able to get ODF Plus-Plus and Five Star ranking, if we are backward or not. There will be less number of people being under construction in public facilities. The preparations for the next year are starting now. Efforts to work better at every level. Machines for cleaning, mobile app for awareness, increase in resources, etc. will work – Kaushish Singh Dodve, CMO, Bardwani

Khandwa – A change made in the mindset of the common man

Category: City with population above a million

Found this year’s order: 93th

Last year order: 99th

Due to continuous efforts, in the Khandwa survey, it has climbed six places over the past year. Compared to the last three years, the city’s cleanliness system has shown good results. In the first public areas, there were stacks of dirt around the huge garbage boxes on the intersections, and now the sight of such scenes has become a thing of the past. There has also been a change in the mentality of cleanliness regarding the cleanliness. Those who throw garbage outside the house are now gathering in the dustbin. Garbage is being brought in the garbage vehicle on the door of the house in the morning. In a clean environment mosquito-borne diseases have also decreased.

Improvement due to this

In the morning, even in the afternoon and night, cleanliness affected the team that took the survey, 100% door-to-door garbage collection played an important role in the wards, in the survey conducted by the Hanging Dustbin in the public areas of 500 meters. Increased points, during the survey, the good feedback of the general public contributed to the cleaning system, according to the guide line of the sanitation survey this year, residential area Not been free of trash boxes. As a result the numbers increased.

Will soon become cluster

If there is no better disposal of waste, our points have decreased. The cluster will be ready for scientific disposal of waste. Where there is a gathering of Burhanpur and surrounding urban bodies along with Khandwa. Work on waste management is also being done – Mohammad Shahin, In-charge Health Officer

Dhar – Survey has changed in people’s habits on backward

Category: City with population less than one lakh

This year’s order: 5th in the state, 56th in the country

Last year’s order: First in the state, 13th in the country

In its category, Dhar city is ranked fifth in the state this year and 56th in the state, whereas last year it was the first in the state and 13th in the country. Despite lags behind in the race for the last year, the good thing is that the habits of people have changed. People have become aware of collecting wet-dried garbage separately in vehicles. Performance of two cities in the district was also better in the survey. Rajgarh is in second place and Sardarpur is in sixth place in 10 clean cities of the state. Dhar has received 3294 marks out of 5000 this time.

Backward for this reason

Number is the highest cut in service to the people. There were frequent complaints not coming in the vehicles wards. With this there was a problem in getting the garbage out of the people’s houses, Napa has also suffered a loss in the presentation of documents. The documents of many works could not be saved, the number was cut, there was a decline in the number of documents due to the lack of documents on the portal and also the shortage of weak preparations in the field, due to the violation of the rules, in the field of action in the field, there was also a delay. Toilets were not well maintained and the quality of construction was not very high. In the slogan case, the Napa is behind. Napa did not even make any innovation.

Last year so

48 beautifying the bases of big wastes, making the ideal of 23 toilets in the city, changing the trenching ground, the picture was started arriving from the house to the house, due to this, the citizen’s feedback was also good.

Burhanpur – The apathy of the officers and the awareness among the people is huge

This year’s order: 103th in the country, 21st in the state

Last year’s order: 81st in the country

Burhanpur did not get a place in the Top 100 in the clean survey. This year the city was at 103th place, while it was 81st last year. The good thing is that, despite lagging behind in the country, Burhanpur has been ranked 21st in the state this time. Last year, the 81 was in the sequence. People say that most wards are not sanitized by municipal corporation. After the arrival of a team of officers from the center, cleaning was done for the show. The popularity of the people, the officers and the employees, and lack of public awareness in the public is being considered as the reason behind this. The cleaning system was not properly monitored and no action was taken.

Backward for this reason

The door to door garbage collection in the city could not be done properly. In very few wardens, the garbage collectors are not able to reach the vehicle, the destruction of old garbage can not even be done on the trunking ground, there is no problem with solid waste management, the problem of the stray cattle has not been solved, Due to the digging of the drinking water line and sewerage line in the city, many garbage collection vehicles are not available in many places. Dust dust flies throughout the city. Municipal citizens could not raise awareness about cleanliness in the public. Things do not change even after information about dirt in wards.

Will try for good results

Municipal Commissioner Pawan K. Mur Singh said that now we will do better efforts to get better results next year. By reaching among the commoners, they will be told the importance of cleanliness – Pawan Kumar Singh, Municipal Commissioner

Citizens will also have to be aware

You will also do better efforts to cleanliness in the city. Amnesty will also have to be aware of cleanliness – Anil Bhosle, Mayor

Alirajpur – Efforts will be made to make good marks in cleanliness year after year

Category: Population less than 50 thousand

This year’s order: 294th in the state

This time Nappa was in the top 100 in the state’s top ten posts, but reached the 294th rank. The main reason behind this is the negligence of the officers, as special efforts were not made for better rankings throughout the year. When the team reached the survey then the officers slept open Employees To put it in the system of demolition, its results are in front. Due to the reason behind the shortage of CMOs lasting for two and a half years, the lack of permanent CMO can be considered. Due to this, due diligence efforts can not be made. Napa has arranged to gather door to door garbage in the city but there is no permanent arrangement for disposal of collected waste, which is one of the main reasons for getting fewer numbers in sanitary ranking. The plant was prepared by the Napa administration to make fertilizer from the garbage in Surendranagar garden, but that too could not be fully successful. Napa CMO Santosh Chauhan has taken over recently. They say that they will make better efforts for the coming year.

Shajapur – bonus points can not be received from a survey team

Category: population less than one lakh

This year’s order: 324th in the country, 82th in the state

Last year order: 290th, 106th in the state

Shajapur city has achieved 82th ranking of clean cities in MP, last year it was 106. However, in the country’s ranking, the city dropped below 34 places to 324 Last year was 290th place. District Pollayaklank got 37th rank in the country last year, but this time it has dropped to 139th rank.

Reason for improvement

The effective mechanism of door-to-door garbage collection, developed the park on the trunking ground, improved the cleanliness system on the main roads, did better work in online data, continuous monitoring of public representatives and officials.

Will work hard

There was not a team for the survey. So get bonus points. If the team comes then the rankings will improve. The top-50 ranking was expected. Will try to win the next survey – Bhupendra Dixit, CMO

Mandsaur – Solid waste management did not have to be heavy

Category: Population of more than a million

This year’s order: 104th in the country

Last year’s order: 24th

In the clean survey of 2018, Mandsaur was ranked 24th in the country, but in 2019 80 places dropped to 104. This is mainly due to the negligence of municipal officials. Instead of working in accordance with the criteria, they tried the Lipa granddaughter. Many places in the city have been kept without dustbins. They are spreading dirt by rolling them around. In the last three years, the city’s picture improved for the first two years. That is why last year, Mandsaur was able to join top 25 cities in the country. In 2016, Mandsaur was at 377 in the country. Came in 74th place in 2017 and came in 24th in 2018. The municipality has arranged for the construction of latrines, cleanliness and e-attendance but they can not tell the solutions for solid waste management. The good thing is that people’s habits have definitely improved. Now the garbage is not used at public places. There is a waiting list of the municipality’s garbage in the houses.

Due to fall

The waste and fertilizer plant was not established, plastic was not used by the body in the construction of the road and the improvement was done, the landfilling work was not done in scientific way, it was not done by the collection and separation of wastes, in the city dustbin Instead of putting it on the stand alone.

We are weak

With no start of solid waste management, our numbers have come down. I did not stay here during the survey, so the exact situation can not tell what the reason might be, but surely we are less and less. Now, prepare a new plan for the next year – RP Mishra, CMO, Napa

Jhabua – Improved Jhabua rankings after taking lessons from last year

Category: population less than one lakh

This year’s order: 15th in the state

Last year’s order: 24th in the state

Of the five urban bodies in the district, only Jhabua has performed properly. Ranking of Jhabua in the state improved nine points to 15 and the last year was 24rd. Last year, in the district, Petlawat, which was the first in the district, went down 568 in West Zone and 226 points in the state. The following reasons for improvement in jhabua-177 cleaners were working in two shift continuously under supervision of 10 supervisors. During the night, roads and washing work were done, garbage disposal was arranged on the trunking ground. Earlier, where there was a heap of waste, now there has been grounds, reforms were done with the maintenance of gardens and intersections, plants were supervised, cleaned drains and people from the city were added to social media.

Reasons for backwardness of the districts

Petlavah could not repeat the previous works. There is now more dirt than ever before. Thandla’s worst was worst. Ranked the biggest drop in rank The lack of cleanliness is in the entire city. Once inclusion in the survey, the enthusiasm decreased continuously, the lethargic last year was in Jhabua, it appeared in other cities.

Khargone- Increasing the hype of hygiene, diseases also decreased

Category: City with a population of more than a million

This year’s order: 17th place in the top 20 cities in the country

Rank of last year: 15th place in the top 20 cities in the country

In the recent results of the clean survey, Khargone has slipped two places and reached the 17th spot, but the trend towards the cleanliness of citizens has increased. Continuous efforts have been made to keep the city clean so that the map has changed in the Treacherous Ground where the garbage was thrown first in the city. Napa has developed gardens there, in which swings have also been installed for children. Earlier, people used to avoid passing through this area. After the door-to-door garbage collection system, garbage boxes have been removed from public places in the city. With this, public places have started to look neat and clean. After the door-to-door garbage collection system, the colonists are waiting for garbage vehicle in the morning and evening. If the city is clean then the percentage of diseases is also reduced. The city has achieved this success thanks to the efforts of 350 clean workers who make the city clean and beautiful. Now the government has also announced to reward them.

Starting from now

Sanitation Survey was believed in 2019 that the city’s ranking would be better than the year 2018, but did not get the star ranking as expected. For the next year we have started preparing for now. The city will get better rankings by all efforts – Nishikant Shukla, CMO

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