सारनी : ग्राम भारती महिला मंडल द्वारा संचालित स्वाधार ग्रह बना निराश्रित पीड़ित महिलाओं स्वआधार

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सारनी : ग्राम भारती महिला मंडल द्वारा संचालित स्वाधार ग्रह बना निराश्रित पीड़ित महिलाओं स्वआधार

बैतूल/सारनी (ब्रजकिशोर भारद्वाज)। ग्राम भारती महिला मंडल द्वारा स्वाधार गृह का संचालन वर्ष 2011 से लगातार किया जा रहा है स्वाधार गृह में निराश्रित पीड़ित 18 से 59 वर्ष की महिलाओं एवं उनके आश्रितों को आश्रय प्रदान किया जाता है। स्वाधार गृह का संचालन कालीमाई, शोभापुर काॅलोनी जिला बैतूल से किया जा रहा है, स्वाधार गृह में विभिन्न विभागो जैसे पुलिस प्रशासन, न्यायालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वयं, जनप्रतिनिधी एवं समाज सेवियों के सहयोग से स्वाधार गृह में पंजीयन किए जाते है। पंजीकृत प्रकरणो की जटिलता के आधार पर प्रकरण सुलह में समय की कम या अधिकता होती है। सामान्यतः छोटी मोटी बातों से उपजे झगड़ो में आसानी से सुलह हो जाती है। किन्तु जटिल प्रकरणो में यदि अनावेदक पक्ष की उपस्थिती सुलभ न होने से प्रकरण सुलह होने में समस्या उत्पन्न होती है। स्वाधार गृह प्रबंधन का एकमात्र उद्देश्य पुर्नवासन है। संस्था द्वारा अधिकांश महिलाओं को पुर्नवासित कर पुनः परिवार में भेजा जाता है। किन्तु जिन महिलाओं को पुर्नवासित नही किया जा सकता उन्हे आर्थिक सहयोग प्रदान करने के उड़ से विभिन्न क्षमता वृद्धि प्रशिक्षणों से जोड़ा जाता है जिससे महिलाएं आर्थिक उपार्जन हेतु सक्षम हो जाती है। स्वाधार गृह में वर्ष 2018 -19 में कुल 80 प्रकरण पंजीकृत हुए जिनमें से 75 महिलाएं पुर्नवासित की गई एवं 5 महिलाएं निवासरत है। स्वाधार गृह के काउन्सलर्स के द्वारा हर संभव यह प्रयास किया जाता है कि महिलाओं को पुनःपरिवार मिले तथा महिलाओं के आश्रितों को परिवार तथा पिता की छत्रछाया मिले। स्वाधार गृह के प्रकरणो की गंभीरता एैसे परीलक्षित होती है कि यदि किसी महिला को कोई गंभीर बीमारी हो जाए इलाज या आप्रेशन में अधिक खर्च आता है एैसी स्थिती में परिवार की आर्थिक स्थिती ठीक न होने पर महिला का इलाज करवा न पाने की स्थिती में महिला द्वारा लगभग 5 से 6 वर्ष तक पीड़ा एवं दर्द सहन करने के उपरांत अंततः उसे घर से मायके छोड़ दिया। मायके वाले भी प्रताड़ित करने के बाद अंततः स्वाधार गृह में महिला आई और स्वाधार गृह प्रबंधन द्वारा महिला को जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया जहां उसके गर्भाशय में गंभीर बीमारी के लक्षण थे।

 

उस महिला का आप्रेषन कर गर्भाशय निकाल दिया गया। वर्तमान में महिला स्वस्थ है तथा उसे परिवार के साथ पुर्नवासित कर दिया गया अन्य प्रेकरणों में महिलाएं अबोध उम्र में निर्णय न ले पाने की स्थिती में गलत निर्णय ले लेती है यदि समय रहते उन्हे समझ में आ जाए कि उनका निर्णय गलत है तो हमेशा के लिए उनका जीवन नई राह पकड़ लेता है। स्वाधार गृह में भिन्न भिन्न समस्याओं से पीड़ित प्रकरण पंजीकृत होते है। स्वाधार गृह की महिलाओं में ज्यादातर प्रकरण में नाबालिग बालिकाएं किसी भी व्यक्ति के साथ घर छोड देती है एैसी स्थिती में परिवार वालो द्वारा पुलिस प्रकरण (गुमइंसान) दर्ज किए जातें है। नाबालिग बालिकांएं पुनः अपने घर जाने को इच्छुक नही होती ऐसी परिस्थिति में उन्हे स्वाधार गृह भेजा जाता है। स्वाधार गृह आने के पश्चात उनकी मनः स्थिती परिवर्तित करने में काफी समय लग जाता है। स्वधार गृह में पंजीकृत प्रकरणो की विवेचना करने पर पाया गया कि ज्यादातर प्रकरणो की उत्पति शराब सेवन के कारण होती है ‘‘ शराब पीना एवं कोई काम न करना ‘‘ झगड़ा मारा पीटी ज्यादातर प्रकरणों का मुख्य कारक है। महिलाएं स्वयं तो परेषान होती ही है किन्तु उनके छोटे छोटे बच्चें भी आते हैं बच्चे कुछ अंतराल के लिए आते है तब तो कम समस्या होती है। किन्तु जब महिलाए लंबे समय के लिए आती है तब आश्रितों की पढ़ाई अवरूद्ध होने के कारण स्वाधार गृह प्रबंधन द्वारा उन बालक/बालिकाओं की पढ़ाई हेतु लगातार प्रयास कर उन्हे सतत् शाला भेजने के एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। कई परीस्थितियों में नाबालिग बालिकाएं घर जाना उचित नही समझती किन्तु बालिकाओं की बार बार काउन्सिलिंग कर उन्हे गलत तथा सही के बारे में जागरूक किया जाता है। जिससे समय के साथ साथ बालिकाएं अपना निर्णय बदल कर अपने परिवार में पुनः पुर्नवासित होने हेतु सहमत हो जाती है। परिवार में पुर्नवासन के पश्चात् नाबालिग बालिकाओं के द्वारा पुनः पढ़ाई शुरू कर नवीन राह पर अपने कदम बढ़ाती है। विपरित परीस्थितियों में जीवन यापन करने वाली महिलाओं के पति या तो न्यायालयीन आदेश से जेल में होते है या किन्ही कारणों से उनके पति का ठिकाना नही होता एक समय के अंतराल तक निवास करने के उपरांत महिलाओं की मनःस्थिती ठीक होने पर पुनः अपने जीवन के निर्णय लेने हेतु या दुबारा परिवार बसाने के संदर्भ में निर्णय लेती है। और वर्तमान में महिलाएं अपने आश्रित बच्चों के साथ सुखमय जीवन निर्वाह कर रही है। स्वाधार गृह ग्राम भारती महिला मंडल शोभापुर काॅलोनी, पाथाखेड़ा जिला बैतूल में 1 अप्रैल 2018 से 30 मार्च 2019 तक 80 प्रकरण पंजीकृत किए गए जिसमें से 75 महिलाओं को पुर्नवासित किया गया तथा 7 महिलाएं वर्तमान में इस सत्र की तथा लम्बे समय से स्वाधार गृह में निवासरत है इस तरह स्वाधार गृह में 16 महिलाएं इस प्रकार 23 महिलायें एवं 10 बच्चे निवासरत है। स्वाधार गृह में महिला बाल विकास एवं अन्य विभागों के सहयोग से नियमित निरीक्षण कर आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है तथा महिलाओं की आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता से दृष्टिगत रखते हुए, क्षमता वृद्धी प्रशिक्षणों का आयोजन किया जाता है क्षमता वृद्धी प्रशिक्षण में प्रशिक्षित करने का मुख्य रूप से ब्यूटी पार्लर एवं सिलाई, कढ़ाई, कम्प्यूटर को रूचि अनुसार प्रदान किया जाता है।

 

प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ना तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करना जिससे उनका आत्मबल बढ़े स्वाधार गृह में निवासरत महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टी में विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों का लाभ दिया जाता है शिविर में मुख्यतः महिलाओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। स्वाधार गृह का एकमात्र उद्देश्य होता है कि महिला का घर में पुर्नवास हो किन्तु यदि महिला घर जाती है तो कुछ दिन तक तो माहौल ठीक रहता है, किन्तु कुछ समय के उपरांत स्थिती पूर्ववत हो जाती है तथा महिला का घर में रहना मुष्किल हो जाता है। ऐसी स्थिती में दोबारा स्वाधार गृह में पंजीकरण करने की स्थिती निर्मित होती है। स्वाधार गृह में विभिन्न प्रताड़ना से प्रताड़ित महिलाएं चाहे घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, दहेज प्रताड़ना एवं पति प्रताड़ना से ग्रसित प्रकरण ज्यादातर दर्ज होते है। स्वाधार गृह में निवासरत महिलाओं को यदि परिवार में पुर्नवासित नही हो पाते तो योग्यतानुसार नर्सिग आदि प्रशिक्षण हेतु प्रयास किया जाता है तथा आवेदन प्रेषित किए जाते है। स्वाधार गृह ग्राम भारती महिला मंडल का एकमात्र उद्देश्य है कि स्वाधार गृह में पंजीयन प्राप्त करने वाली महिलाएं या तो परिवार में पुर्नवासित हो जाए और यदि किसी कारणवर्ष महिलाओं का पुर्नवास नही हो पाता तो ऐसी महिलाओं को विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के तहत् आर्थिक सषक्तिकरण करने हेतु प्रशिक्षित कर उन्हे स्वयं के पैरो पर खड़ा करने का प्रयास का स्वआधार – स्वाधार शब्द को चरितार्थ किया जाता है।


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