अनुभवहीन ठेकेदार कर रहे करोड़ो के काम

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अनुभवहीन ठेकेदार कर रहे करोड़ो के काम

सुखदेव पांसे के विभाग के इकबाल पर सवाल – पार्ट 5


आठनेर (प्रकाश खातरकर)। आठनेर तहसील में करोड़ो रु की पेयजल योजना के कार्य चल रहे है। शिकायतो के अम्बार लगने जा रहे है, परन्तु पीएचई विभाग में डाकू की संज्ञा से नवाजे जा चुके जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नही दे रहे। जिनको एस्टीमेट की समझ नही ऐसे ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कार्य करने में लगे है। अभी हाल में इस बात का बेहतरीन उदाहरण नम्बर 1 – सामने आया जब ग्राम गोंडीघोगरा में पत्रकारों के दल ने ठेकेदार महेश लहरपुरे से उपयंत्री राजेश गौर के समक्ष एस्टीमेट में अंकीत सामग्री के संबंध में पूछा तो वह ठेकेदार सिर खुजाने लग गया। पाइप कीतने गहराई में गाड़ना है उसका जवाब भी ठेकेदार नही दे पाया। मतलब ठेकेदार को एस्टीमेट पढ़ने तक की समझ नही होने से अंततः ठेकेदार ने यह कह दिया की जब साहब मौजूद है तो उनसे ही पूछ लो? इस जवाब को सुनकर उपयंत्री ने बात को संभालते हुए बताया की मैं तो साइड देखता ही हू ठेकेदार को मत परेशान करो। उदाहरण नम्बर 2 – ग्राम आष्टी में एक करोड़ दस लाख की नलजल योजना का कार्य प्रगति रत है परन्तु साइड पर एस्टीमेट ही नही है। गुजरात के एक ठेकेदार द्वारा कीये जा रहे इस मामले में ठेकेदार का स्पष्ट कहना है की आपको एस्टीमेट देखना है तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय कार्यालय बैतूल जाइये हम आपको कोई जानकारी नही दे सकते। उदाहरण नम्बर – 3 ग्राम रजोला में पेयजल सप्लाई की टेस्टिंग में ही पाइप लाइन जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो गई। जिसका कार्य कोई संतोष कुंभारे नामक ठेकेदार ने कीया है वह भी एस्टीमेट की समझ रखता न उसने तकनीकी रूप से कार्य किया उदाहरण बहुत है इन सबको लेकर निर्लज्जता का लबादा ओढे उपयंत्री राजेश गौर अधिकृत रूप से बयान दे रहे है की सभी जगह कार्य गुणवत्ता पूर्ण है। इस ठेकेदारी को लेकर हमने नामी ठेकेदारो से बात की तो पता चला पी एच ई विभाग के उपयंत्री राजेश गौर ने ही इस तरह के अनपढ़ ठेकेदारो के रजिस्ट्रेशन करवाकर उनकी आड़ में खुद इस करोड़ो के कार्यो को करने की जानकारी पीएचई विभाग में चर्चा का विषय बनी है। इतना सब कुछ होने और शिकवा शिकायतो के बावजूद प्रशासन का इस ओर ध्यान नही देना भी कीसी चर्चा से कम नही है। विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है। एक उपयंत्री के कारण विभाग और सम्बन्धित मंत्री सुखदेव पांसे की साख पर सवाल उठने लगे है।


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