प्यार की खातिर आग में जली होलिका, पढ़ें होलिका की दिल दहलाने वाली प्रेम कथा

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प्यार की खातिर आग में जली होलिका, पढ़ें होलिका की दिल दहलाने वाली प्रेम कथा

होली पर्व के साथ ही जुड़ी है होलिका की कहानी। या यूं कहें कि होलिका की वजह से ही रंग-गुलाल के इस पर्व का नाम होली पड़ा तो यह कहना गलत नहीं होगा। होली को यूं तो बुराई का प्रतीक मानते हैं और होलिका जलाकर बुराई के अंत का उत्सव मनाते हैं। लेकिन सच यह भी है कि होलिका को जलाने से पहले उसकी पूजा की जाती है। होलिका अगर वास्तव में बुराई की प्रतीक होती तो उसकी पूजा नहीं की जाती।

हिमाचल के लोककथाओं में होलिका की वह कहानी मिलती है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे और कहेंगे होली बुराई की प्रतीक नहीं बल्कि प्रेम की देवी थी जिसने प्यार की खातिर अपने जीवन का बलिदान दे दिया। आइए जानें होलिका की वह अनजानी अनसुनी कहानी।

होलिका राक्षस कुल के महाराज हिरण्‍यकश्‍यप की बहन थीं। यह अग्निदेव की उपासक थी। अग्निदेव से इन्हें वरदान में ऐसा वस्त्र मिला था जिसे धारण करने के बाद अग्नि उन्हें जला नहीं सकती थी। बस इसी बात के चलते हिरण्‍यकश्‍यप ने उन्‍हें यह आदेश दिया कि वह उनके पुत्र प्रह्लाद यानी कि होलिका के भतीजे को लेकर हवन कुंड में बैठें। भाई के इस आदेश का पालन करने के लिए वह प्रहलाद को लेकर अग्नि कुंड में बैठ गईं। इसके बाद ईश्‍वर की कृपा से इतनी तेज हवा चली कि वह वस्‍त्र होलिका के शरीर से उड़कर भक्‍त प्रहलाद के शरीर पर गिर गया। इससे प्रहलाद तो बच गया लेकिन होलिका जलकर भस्‍म हो गईं। लेकिन होलिका के अग्नि में बैठने के पीछे जो कथा है उसे कम लोग ही जानते हैं।

कथा के अनुसार होलिका इलोजी नाम के राजकुमार से प्रेम करती थी। इन दोनों ने विवाह की योजना भी बना ली थी। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इलोजी बारात लेकर होलिका से विवाह करने आने वाला था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर बैठ जाए। अग्नि देव के वरदान के कारण तुम्हें कुछ नहीं होगा लेकिन प्रह्लाद जल जाएगा। होलिका इस क्रूर काम के लिए तैयार नहीं हुई तो हिरण्यकश्यप ने होलिका को यह भय दिखाया कि अगर उसने आदेश का पालन नहीं किया तो इलोजी के साथ विवाह नहीं होने देंगे और इलोजी को दंडित भी करेंगे।

अपने प्रेम को बचाने के लिए होलिका ने आदेश का पालन किया और चिता पर प्रह्लाद को लेकर बैठ गई। लेकिन चुपके से प्रह्लाद को अग्निदेव के वरदान से बचा लिया और खुद जलकर खाक हो गई।

इलोजी इन सब बातों से अंजान जब होलिका से विवाह करने बारात लेकर आया तो सामने होलिका की राख देखकर व्याकुल हो उठा और हताश होकर वन में चला गया।

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NEWS IN ENGLISH

Burning Holika for the sake of love, read Holika’s heart shocked love story

Story of Holika is associated with Holi festival Or, say that Holi is the name of this festival of Holi because of Holika, it would not be wrong to say it. Holi is believed to be the symbol of evil and burn Holika and celebrate the end of evil. But the truth is that Holika is worshiped before burning. If Holika was indeed a symbol of evil then she would not be worshiped.

In the folklore of Himachal, you get the story of Holika which will surprise you and say Holi is not a symbol of evil but Goddess of love, who sacrificed her life for the sake of love. Let’s learn that the unknowingly unheard of story of the hoolika.

Holika was the sister of Maharaja Hiranyakashipu of Monks Kuli. It was the worshiper of Agnidev. Agnidew had got such a garment in the boon which he could not burn after the fire. Just because of this, Hiranyakashipu ordered him to sit in the havan kund about his son Prahlad, ie the nephew of Holika. To follow this order of brother, he sat in the fire trunk with Prahlad. After this, so much wind moved by the grace of God that it was flying over the body of the Holy Holika and fell on the body of the devotee Prahlad. Prahlad survived this but Holika was burnt to death. But there are few people who know the story behind sitting in the fire of Holika.

According to legend, Holika was in love with Prince Raja. Both of them had also planned marriage. On the day of Falgun Purnima, I was about to get married to Holika, with the Goddess Sarita. But luck was only approved.
Hiranyakaship ordered Holika to sit on her lap and take her Prahlad in her lap and sit on a pyre. Because of the boon of Agni Dev you will not have anything but Prahlada will burn. If the Holika was not ready for this cruel work, Hiranyakashyap showed Holika the fear that if she did not follow the order, then marriage would not let him marry and punish the Goddess.

To save his love, Holika obeyed the order and sat down with Prahlad on a pyre. But secretly saved Prahlad from the boon of Agnidev and himself got blurred.

Illogi, when all these things came to a wedding procession to marry Holika, she was disturbed after seeing the ashes of Holika and went desperately to the forest.

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