परियोजना अधिकारी के विवादित आदेश से गाँव मे तनाव

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परियोजना अधिकारी के विवादित आदेश से गाँव मे तनाव


आठनेर (प्रकाश खातरकर)। काफी विवादों से घिरी आठनेर तहसील में पदस्थ परियोजना अधिकारी नेहा यादव अपने आपको तहसील की सुप्रीमो समझकर उटपटांग आदेश जारी कर मनमर्जी से किसी भी सहायिका की नियुक्ति कर दे रही और किसी भी कार्यकर्ता की भर्ती कर दे रही है। ताजा विवाद आठनेर तहसील के वन ग्राम पलासपानी से शरू हुआ है।जिसकी सूचना जनपद की स्थाई समीती को भी नही है। मामला कुछ इस तरह है की इस केंद्र में पदस्थ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुनीता पतीराम आहाके की विभिन्न शिकायतो और अनीयमीताओ के आधार पर 13/6/2017 को सेवा समाप्त कर सुनीता के स्थान पर खण्ड स्तरीय चयन समिति की सहमति से शांता गाठे को अनंतिम प्रोवीजनल मेरिट सूची के आधार पर तमाम दावे आपत्तियों की सुनवाई पश्चात 29/7/ 2017 को लिए गए निर्णय पत्रक के आधार पर जिला कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बाल विकास सेवा बेतुल के पत्र क्र 3534 दिनांक 11/ 8 / 2017 को नियमानुसार वन ग्राम पलासपानी का आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता के पद पर नियुक्त कर दिया था। उस बीच इस आदेश और अपनी सेवा समाप्ती को कथित रूप से चुनौती देकर कहते है सुनीता ने अपर कलेक्टर के न्यायलय में परिवाद दायर किया था। और सुनीता के पक्ष में ताबड़तोड़ फैसला 11/ 9/ 2017 को आ गया और सुनीता को पुनः बहाल करने के आदेश पारित हो गए।तब से अब तक सुनीता के आदेश को परियोजना अधिकारी नेहा यादव ने किस कूट रचना और बुनियाद के आधार पर अब तक रोके रखा। जब यह मामला चर्चा में आया तो काफी सेटिंग के बाद आनन फानन में 7/3/2019 को सुनीता को एकतरफा बहाली का आदेश सौपा गया। जबकि शांता गाठे को अब तक भी उसके स्थान पर सुनीता की बहाली के आदेश नही मिले है। बहरहाल एक सप्ताह से शांता गाठे और सुनीता आहाके दोनो आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन करने जा रहे है। यहां के पूर्व जनपद सदस्य श्यामलाल ने बताया की जब से परियोजना अधिकारी ने विवादित आदेश से सुनीता की बहाली की है तब से ग्रामीण अपने बच्चो को आंगनवाड़ी में नही भेज रहे है।गाव में तनाव का माहौल निर्मित है। इतना सब कुछ होने के बावजूद परियोजना अधिकारी संदिग्ध रूप से खामोश है। पलासपानी के जागरूक ग्रामीण महिला बाल विकास विभाग के कार्यालय में जाकर अपर कलेक्टर के फैसले की कॉपी मांग रहे परन्तु परियोजना अधिकारी उन्हें यह कॉपी नही दे रही और खुद के द्वारा जारी आदेश का हवाला दे रही है। इस मामले को लेकर आमने सामने होकर इस प्रतिनिधी ने तमाम सवाल किए परन्तु परियोजना अधिकारी मामले का पटाक्षेप करने के बजाय खामोश रहकर इस मामले को उलझा रही है।


इनका कहना है।
अपर कलेक्टर बैतूल के आदेशानुसार सुनीता आहके को सेवा में रखा गया है। तथा शांन्ता गाठे को एडीएम कोर्ट से जारी पत्र के अनुसार विधिवत पत्र देकर हटाया गया है। और शांन्ता गाठे ने पत्र तमिल भी कर लिया है। उसके बावजूद शांन्ता घाटे असमंजस की स्थिति में क्यों है यह मुझे ज्ञात नहीं है।

नेहा यादव, परियोजना अधिकारी आठनेर, महिला बाल विकास विभाग


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