माइंडट्री के अधिग्रहण की पहल सिद्धार्थ के हिस्सेदारी बेचने से हुई शुरू: एलएंडटी

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माइंडट्री के अधिग्रहण की पहल सिद्धार्थ के हिस्सेदारी बेचने से हुई शुरू: एलएंडटी

मुंबई । सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी माइंडट्री के जबरन अधिग्रहण की कोशिश कर रही कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का बयान सामने आया है। कंपनी ने कहा हैं कि इस सौदे का विचार तीन महीने पहले तब बना जब कंपनी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले वी.जी. सिद्धार्थ ने अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए कंपनी से संपर्क किया। एलएंडटी ने विश्वास जताया कि वह माइंडट्री के नाराज प्रवर्तकों को मना लेगी। एलएंडटी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसएन सुब्रमण्यम ने मसाला हिंदी फिल्मों से स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि यह दिल और प्यार का मामला है और हम सबके दिलों को जीत लेने वाले है। सुब्रहमणयम ने स्पष्ट किया कि माइंडट्री के अधिग्रहण को वह अपने 15,000 करोड़ रुपए से अधिक के नकदी भंडार के निवेश के तौर पर देखते हैं। वह इस कंपनी में न्यूनतम 26 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं।

एलएंडटी ने कैफे कॉफी डे के मालिक वी.जी. सिद्धार्थ की माइंडट्री में 20.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए सोमवार को समझौता कर लिया। इसके लिए कंपनी ने 980 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से कुल 3,269 करोड़ का नकद भुगतान करने पर सहमति जताई। कंपनी ने माइंडट्री में लगभग 67 प्रतिशत तक हिस्सेदारी 10,733 करोड़ रुपए में अधिगृहीत करने की घोषणा की थी। इसके लिए सिद्धार्थ की हिस्सेदारी के अलावा खुले बाजार से 2,434 करोड़ रुपए में माइंडट्री की 15 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने और माइंडट्री में ही 31 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए 5,030 करोड़ रुपए की खुली पेशकश शामिल है। हालांकि, इस पर माइंडट्री के प्रवर्तकों ने नाराजगी जताई।

कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन कृष्णकुमार नटराजन के नेतृत्व में माइंडट्री के सह-संस्थापक सुब्रतो बागची और कार्यकारी उप चेयरमैन एवं मुख्य परिचालन अधिकारी पार्थसारथी एनएस इत्यादि ने संयुक्त तौर पर एक बयान में कहा कि यह अधिग्रहण पिछले 20 साल में कड़ी मेहनत से खड़े किए गए माइंडट्री के लिए ‘गंभीर खतरा’ है। प्रवर्तकों ने अधिग्रहण की इस जबरन कोशिश का ‘विरोध’ किया है। उन्होंने कहा,इस लेनदेन में हमें कोई रणनीतिक लाभ नहीं दिखता, बल्कि यह कंपनी के मूल्य में गिरावट लाएगा जिससे सभी शेयरधारक का हित प्रभावित होगा।

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NEWS IN ENGLISH

Mindtree’s acquisition initiatives started selling Siddhartha’s stake: L & T

Mumbai . The statement of company Larsen and Toubro (L & T), which is trying to forcibly acquire the information technology company MindTree, has come out. The company has said that the deal was made three months ago when VG, which holds the highest stake in the company, Siddhartha contacted the company to sell his stake. L & T has convinced that he will persuade Mindtree’s angry promoters. Managing director and chief executive officer of L & T, SN Subramanyam, while comparing the situation with the Masala Hindi films, said that this is a matter of heart and love and we are going to win hearts of all of us. Subramanyam clarified that he saw the acquisition of MindTree as an investment of cash reserves of more than Rs 15,000 crore. He wants a minimum 26 percent stake in this company.

L & T has been the owner of Cafe Coffee Day, V.G. Siddhartha agreed on Monday to buy 20.32 percent stake in MindTree. For this, the company agreed to pay a total of Rs 3,269 crores in cash at a price of 980 rupees per share. The company had announced acquisition of MindTree of about 67 percent in 10,733 million rupees. In addition to Siddhartha’s stake, the open market offer of open offer of Rs 5,303 crore for the purchase of 15 per cent additional MindTree of MindTree from open market and acquisition of 31 per cent stake in MindTree is Rs 5,030 crore. However, the promoters of MindTree expressed displeasure at this.

MindTree co-founder Subroto Bagchi and Executive Vice Chairman and Chief Operating Officer Parthasarthi N. S., under the leadership of Executive Chairman, Krishnakumar Natarajan, jointly said in a statement that the acquisition of MindTree, which was made of hard work in the last 20 years, There is a ‘serious danger’ for. The promoters have ‘opposed’ this forcible attempt of acquisition. He said, we do not see any strategic advantage in this transaction, but it will bring down the value of the company, which will affect the interest of all the shareholders.

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